जशपुर मुनादी।। बीते 25 मई को जशपुर के दुलडुला सरकारी अस्पताल में आधी रात को डॉक्टरों के साथ हुई मारपीट की घटना से ज्यादा चर्चा इस बात की ज्यादा हो रही है कि अस्पताल के डॉक्टर इतनी जल्दी इतना मुखर कैसे हो गए और मामले ने इस कदर तूल कैसे पकड़ लिया?वह भी तब जब इस मामले में सीधे सीधे कलेक्टर और संसदीय सचिव के नाम आ रहे हो ।बल्कि यह कहना ज्यादा मुनासिब होगा कि डॉक्टरों ने इस घटना से सीधे सीधे कलेक्टर और संसदीय सचिव का नाम जोड़कर बड़े हिम्मत के साथ उन्होंने दोनो को कटघरे में खड़ा कर दिया ।
डॉक्टर महेश्वर माणिक और डॉक्टर निशांत सोनवानी द्वारा बीएमओ को दिए गए इस्तीफे के लेटर में उन्होंने सीधे सीधे यह लिखा है कि कलेक्टर और विधायक के निरीक्षण दल के लोगों के द्वारा उनके साथ मार पीट की गई उन्हें अपमानित किया गया और इससे आहत होकर वे पद से इस्तीफा दे रहे हैं।
इसे अदम्य साहस ही कहेंगे कि दोनो डॉक्टरों ने अपने अपने त्याग पत्र में कलेक्टर और संसदीय सचिव के निरीक्षण दल पर आरोप लगाए और थाने में तबतक डटे रहे जबतक की मारपीट करने वाले आरोपियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज नहीं हो गए ।
यह छोटी बात नही हो सकती कि अस्पताल के डॉक्टर और कर्मचारी कलेक्टर और संसदीय सचिव के निरीक्षण दल पर मारपीट और अपमानित किये जाने के खिलाफ खुलकर एकजुट हो गए और सत्ता और प्रशासन दोनो को कटघरे में खड़ा कर दिया ।
हांलाकि मारपीट की खबर सामने आने के बाद कलेक्टर ने तत्काल इस मामले में रिएक्शन देते हुए साफ कर दिया कि वह घटना के वक़्त मौजूद नहीं थे न ही उन्हें इस घटना की कोई जानकारी थी ।उन्होंने तत्काल घटना की जाँच के लिए संयुक्त कलेक्टर,सीएमएचओ,जिला अस्पताल के सिविल सर्जन और एसडीएम जैसे अदिकारियों की एक जाँच टीम बना दी और मामले की जाँच भी शुरू कर दी गयी लेकिन कलेक्टर द्वारा बनाये गए जाँच टीम पर भी सवाल खड़े होने लगे और सवाल खड़ा करने वाला कोई और नहीं बल्कि काँग्रेस याने सत्ता दल के ही विधायक हैं।
प्रदेश के स्वास्थ मंत्री टीएस सिंहदेव के काफी करीबी कहे जाने वाले बिलासपुर के विधायक शैलेश पांडेय ने सोशल मीडिया में अपना बयान दिया है कि चूंकि इस मामले में जिला कलेक्टर के नाम आ रहे हैं इसलिए जाँच टीम में जिले के अधिकारियों को शामिल किया जाना उचित नहीं होगा याने उन्होंने सीधे सीधे यह कह दिया कि इस घटना की जांच के लिए दूसरी जाँच टीम बनाई जाय ।
गुरुवार की शाम को इस मामले में प्रदेश के स्वास्थ मंत्री का भी बयान सामने आ गया ।उन्होंने भी इस घटना पर नाराजगी जताई और कहा कि व्यवस्था सुधारने का यह कोई तरीका नहीं होता ।मारपीट करना जायज नहीं हो सकता ।डॉक्टर अगर गलत भी थे तो उन्हें किसी और तरीके से समझाया जा सकता था व्यवस्था ठीक करने का यह तरीका बिल्कुल गलत है।
याने पहले डॉक्टरों का एकबारगी मुखर हो जाना फिर इस घटना से सीधे विधायक और कलेक्टर का नाम जोड़ना ,मारपीट करने वालो के खिलाफ एफआईआर के लिए थाने में स्सास्थ कर्मचारियों और डॉक्टरों का थाने में घण्टो तक अड़े रहना , स्सास्थ मंत्री के कट्टर समर्थक कांग्रेस विधायक शैलेश पांडेय द्वारा कलेक्टर द्वारा बनाये गए जाँच टीम पर सवाल खड़ा करना और आखिरी में इस मामले में स्वास्थ मंत्री टी एस सिंहदेव की नाराजगी सामने आना काफी कुछ कहता हुआ प्रतीत हो रहा है ।आकस्मिक तौर पर घटिट हुए इस घटना को अब सियासी चश्मे से देखा जाने लगा है ।
इस मामले मे स्वास्थ मंत्री टीएस सिंहदेव का बयान इसलिए भी कई मायने में अहम है क्योंकि यह मामला स्वास्थ विभाग का तो है ही साथ ही साथ सरगुजा सिंहदेव के सियासी आधिपत्य वाला क्षेत्र माना जाता है।