रायपुर मुनादी।। सोशल मीडिया में भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री का एक बयान जोर शोर से वायरल हो रहा है जिसमें यह कहा गया है कि छत्तीसगढ़ में भाजपा की हालत खराब है। उन्होंने यह भी कहा कि जी 15 वर्ष भाजपा सत्ता में थी दरअसल छोटे दलों के वोट के बंटवारे के कारण रही जो अब अपनी प्रासंगिकता खो चुके हैं। उनका इशारा बसपा और जनता कांग्रेस की ओर था। उनके उस बयान को लेकर सोशल मीडिया में जोर शोर से बहस चल रही है।
इससे पहले किसी भाजपा नेता ने इस तरह की बातें नहीं की। स्व. युद्धवीर सिंह जूदेव ने भी यह कहा था कि भाजपा छत्तीसगढ़ियों की पार्टी नहीं है, लेकिन प्रदेश में पार्टी कमजोर होने की बात वे नकारते रहे थे। यही नहीं समय-समय पर आदिवासी मुख्यमंत्री बनाने की मुहिम चलाने वाले आदिवासी भाजपा नेताओं ने अपने नेतृत्व की थोड़ी बहुत आलोचना तो की लेकिन इस स्तर तक कोई बयानबाजी नहीं की।
वायरल अखबार की कटिंग में कहा गया है कि भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवम भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने यह बयान पार्टी की बैठक में दिया है। डॉ रमन सिंह ने कहा कि इस बार भाजपा कांग्रेस की सीधी टक्कर है और भाजपा को सरकार बनाने के लिए 51 % वोट चाहिए अन्यथा सरकार नहीं बनने वाली। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले तीन बार से भाजपा ने इस लिए जीत दर्ज की क्योंकि छोटे राजनीतिक दलों के कारण वोट का बंटवारा होता था और भाजपा जीत जातो थी लेकिन अभी के परिस्थिति में ये छोटे दल अपनी प्रासंगिकता खो चुके हैं।
अब सवाल यह उठता है कि आखिर डॉ रमन सिंह ने ऐसा बयान क्यों दिया। अक्सर राजनीतिक दल अपनी हार सुनिश्चित जानते हुए भी अपनी और अपने पार्टी की जीत का दावा तो करते ही हैं लेकिन एकदम से यह कह देना की पार्टी की स्थिति खराब है यह उनकी पार्टी के लोगों के लिए भी बड़ी दुविधादायक बना दी है। पार्टी के बड़े नेता डॉ रमन सिंह के इस बयान के सवाल पर बगलें झांकने पर विवश हो गए हैं।
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डॉ रमन सिंह के इस बयान पर उनके विरोधियों का दबी जुबान से कहना है कि चूंकि राष्ट्रीय नेतृत्व उन्हें किनारे लगाने में लगा है ऐसे में उनका यह बयान अपनी पार्टी में ही खो चुकी अपनी आभा को वापस पाने की ओर कदम है जबकि कुछ लोग उनके बयान को शाश्वत सत्य बात रहे हैं। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि डॉ रमन का आंकलन एकदम सही है हालांकि राजनीति में इस तरह से बयान देना उचित नहीं माना जाता।
सबको पता है कि डॉ रमन सिंह को तीन बार सत्ता में वापस लाने में किन लोगों की भूमिका रही। चौथी बार जब ऐसे लोग लगभग उनके साथ खड़े दिखने लगे तो उनकी करारी हार हो गई। यहां यह याद दिलाना जरूर है कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस 15 साल भले सत्ता में न आ पाई हो लेकिन उसकी सीट कभी उतनी कम भी नहीं रही जितनी आज भाजपा की है। प्रदेश इन कांग्रेस की सीटें हमेशा 35 से ज्यादा रही है। इसलिए भी डॉ रमन की बात सच के समीप लगती है।
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इसके अलावा भूपेश सरकार ने धान की कीमत 2500₹ करके किसानों को, पुराना पेंशन लागू करके कर्मचारियों को एवम बोरे बासी जैसी मुहिम से आम नागरिकों पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। हालांकि राजनीति हमेशा विकल्पहीनता की कृत्रिम अवधारणा को ध्वस्त करती है लेकिन मुख्य विपक्षी भाजपा के पास भूपेश बघेल का फिलहाल कोई जवाब नहीं दिखाई देता। इसलिए लगता है डॉ रमन ने तथ्यात्मक आंकलन करके ही यह बयान दिया होगा चाहे इसके पीछे उनका कुछ और भी उद्द्येश्य भले रहा हो।