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जब विदेशी मदरटंग को हां तो अपनी मातृभाषा से क्यों हिचकते हैं हम भारतीय?

नज़रिया || यह बात तो जगजाहिर है कि आज पूरी दुनिया में इंग्लिश का बोलबाला है। जब कहीं भी हम इंटरव्यू देने जाते हैं तो सबसे पहले कमरे में अंदर जाने के लिए पूछना पड़ता है, May I come in. अंदर बैठते ही हम फिर उन्हें गुड मॉर्निंग या गुड इवनिंग Greet करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है इंग्लिश इतनी जरूरी क्यों हो गई। क्या ये वाकई इतनी महत्वपूर्ण है या फिर हमने इसे बना दिया है।

इतना ही नहीं टैक्नीक के इस युग में अगर किसी को यह भाषा नहीं आती है तो वह खुद को औरों से कम आंकने लग जाता है। हिंदी मीडियम के बच्चे अक्सर यह कहते हुए पाए जाते हैं मुझे सब कुछ आता है, लेकिन मैं बस इंग्लिश बोल नहीं पाता, इसलिए पीछे रह जाता हूं। यहां तक ही आलम तो यह है कि कई इंग्लिश मीडियम स्कूलों में हिंदी पढ़ाने के लिए भी अंग्रेजी बैकग्राउंड से पासआउट टीचर्स को तवज्जो दी जाती है।

बातचीत की भाषा भी इंग्लिश क्यों?

यहां तक कि किसी विभाग में वैकेन्सी निकले या फिर कोई प्राइवेट सेक्टर किसी को हायर किया जाए, जिसकी इंग्लिश कम्यूनिकेशन स्कील अच्छी होती है। उसे ही प्रायोरिटी दी जाती रही है। हालांकि कुछ एक सेक्टर्स को छोड़कर अमूमन कथित तौर पर अंग्रेजी को ही भाषाओं का राजा माना जाता है।

हमारे देश में कई बच्चे ऐसे हैं, जो हर क्षेत्र में बेहतर हैं, लेकिन सिर्फ इंग्लिश नहीं आने की वजह से उनका कॉन्फिडेंस औरों से घट जाता है। आखिर ये परिवेश किसने तैयार किया है, जिसमें आज हमारा पूरा समाज ढ़लता जा रहा है। क्या सिर्फ इंग्लिश लैंग्वेज ही हमें दूसरे से बेहतर बनाती है? क्या अंग्रेजी बोल पाने वाला शख्स ही जीवन में तरक्की कर सकता है? बिल्कुल नहीं, क्योंकि अगर ऐसा तो इंग्लिश आज हमारी राजभाषा होती।

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अब आप सोच रहे होंगे कि मैं भाषाओं के बारे में इतनी बाते क्यों कर रही हूं। इसकी वजह साफ है आज मातृभाषा दिवस है, यानी इंटनेशनल मदरटंग डे!

क्या होती है मातृभाषा (mother tongue of india)

अगर इसे सरल तौर पर समझना है तो हम एक छोटे बच्चे का उदाहरण लेते हैं। जो अपने मम्मी-पापा से उनकी अपनी भाषा में बात करता है, जो उसके माता-पिता उसे सिखाते हैं। बच्चा जिस परिवेश में देश में पैदा होता है, वह वहीं की मातृभाषा सिखता है, लेकिन बढ़ती उम्र के साथ ही वह सामाजिक तौर-तरीकों में ढ़लता जाता है और उसके लिए अंग्रेजी महत्वपूर्ण हो जाती है। ऐसे में धीरे-धीरे करके वह अपनी मातृभाषा को भूल जाता है और उसकी अवहेलना करना शुरू कर देता है।

  • विश्व भर में 21 फरवरी को “अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस” मनाया जाता है।
  • इस दिन को मनाने का उद्देश्य दुनिया भर में अपनी भाषा-संस्कृति (Language culture) के प्रति लोगों में रुझान पैदा करना और जागरुकता फैलाना है।
  • साल 1999 में मातृभाषा दिवस मनाने की घोषणा यूनेस्को (UNESCO) द्वारा की गई थी।
  • वहीं साल 2000 में पहली बार इस दिन को “अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस” के रूप में मनाया गया था।

इस दिन को मनाने के पीछे है बड़ी वजह

मैं आपको बता दूं कि साल 1952 में ढाका यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा अपनी मातृभाषा का अस्तित्व बनाए रखने के लिए 21 फरवरी को एक आंदोलन किया गया था। इसमें शहीद हुए युवाओं की स्मृति में ही यूनेस्को ने पहली बार वर्ष 1999 में 21 फरवरी को मातृभाषा दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी।

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इसका मतलब साफ है कि पूरा विश्व आज अपनी मातृभाषा के सपोर्ट में है। यही वजह है कि जिन देशों में अंग्रेजी ही मातृभाषा है, वो इसे पूरे विश्व में फैलाना चाहते हैं। जिसके चलते दुनियाभर में इंग्लिश की वैल्यू इतनी ज्यादा हो गई है। लेकिन मातृभाषा तो हर देश की कोई भी हो सकती है। अगर भारत की बात करें तो 1961 की जनगणना के अनुसार, भारत में 1652 भाषाएं बोली जाती हैं।

भाषा को लेकर गांधी जी के विचार

गांधी जी के विचारों पर भी अगर गौर करें तो वह हमेशा यही कहते थे हजारों व्यक्तियों को अंग्रेजी सिखलाना उन्हें गुलाम बनाना है। गांधी जी विदेशी मीडियम का कठोर रूप से विरोध करते थे। उनका मानना था कि विदेशी माध्यम बच्चों पर अनावश्यक दबाव डालने, रटने और नकल करने की प्रवृत्ति को प्रोत्साहित करता है तथा उनमें मौलिकता का अभाव पैदा करता है। यह देश के बच्चों को अपने ही घर में विदेशी बना देता है।

वैसे तो भारत में कई मातृभाषाएं हैं, लेकिन अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो देश की 77 फीसदी आबादी हिंदी समझती है, बोलती है।

है भव्य भारत की हमारी मातृभूमि हरी भरी ।

हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा और लिपि है नागरी ।।

मैथिलीशरण गुप्त…

ये तो रही ऑफलाइन भाषा की बात, लेकिन अगर बात ऑनलाइन भाषा की करें, तो भारत में इन दिनों इंटरनेट पर भी रीजनल लैंग्वेज में कंटेंट की डिमांड की तेजी से बढ़ी है। गूगल इंडिया के प्रवक्ता के मुताबिक जून 2016 में हिंदी गूगल सर्च को अंग्रेजी से हिंदी में बदलने की प्रक्रिया लांच होने के बाद हिंदी सर्च क्वेरीज में 10 गुना बढ़ोतरी हुई है।

जानिए क्या कहते हैं आंकड़े

  • आंकड़ों की मानें तो देश भर में 20 फ़ीसदी सर्च क्वेरी हिंदी भाषा में ही होते हैं।
  • इतना ही नहीं गूगल असिस्टेंट पर भी हिंदी भाषा काफी आगे है।
  • इसका मतलब साफ है कि दुनिया भर में अंग्रेजी के बाद गूगल असिस्टेंट पर सबसे ज्यादा किसी लैंग्वेज का यूज होता है, तो वह है हिंदी भाषा।
  • भारत देश में लगभग 54 फीसद लोग हिंदी भाषा में ही वीडियो देखना पसंद करते हैं और देखते भी हैं।
  • जबकि इंग्लिश लैंग्वेज में वीडियो देखने वालों की संख्या केवल 16 फीसदी ही है।
  • तब कहीं जाकर दूसरी लोकल भाषाओं के वीडियो का नंबर आता है यह बात यूट्यूब की एक रिपोर्ट में सामने आई है।

इंटरनेट पर भी होती है हिंदी में सर्फिंग

वहीं मोबाइल मार्केट मार्केटिंग इको सिस्टम रिपोर्ट 2020 के मुताबिक इंटरनेट सर्च पर 25 फीसद हिस्सेदारी वॉइस सर्च की है यानी कि 25 फ़ीसदी लोग वॉइस के जरिए कंटेंट खोजते हैं वॉइस असिस्टेंट अमेजॉन एलेक्सा और गूगल असिस्टेंट भी हिंदी भाषा को ही सपोर्ट करता है। मतलब साफ है कि वह इसके जरिए सर्च करने वाले अधिकतर लोग हिंदी भाषी ही हैं।

ये सब आंकड़े बताने का मेरा सिर्फ एक ही मकसद है कि अगर आपको इंग्लिश आती है तो फिर सोने पर सुहागा, लेकिन अगर आप इंग्लिश नहीं आती और आपको इसकी वजह से संकोच महसूस होता है तो आप गलत हैं। आप ही सोचिए भले ही लोग अपना इ़स्टैंडर्स बड़ा दिखाने के लिए आपसे अंग्रेजी के दो शब्द बोलते हैं, लेकिन गूगल में जाकर वो भी हिंदी में ही वीडियो देखते हैं। हिंदी गाने सुनते हैं । यहां तक की कई बार हिंदी में ही कटेंट भी सर्च करते हैं। जितना इंग्लिश पोर्टल पर लोग नहीं जाते उससे ज्यादा हिंदी पोर्टल खोले और पढ़े जाते हैं।

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यहां पर बात हिंदी को बढ़ावा देने की नहीं है। बात सिर्फ इतनी सी है कि आपको जो भाषा आती है आप उसमें एक्सपर्ट बनिए क्योंकि अब हिंदी तो विदेशी लोग भी सिखने लगे हैं, तो आपको इसे बोलने में जरा भी संकोच नहीं होना चाहिए। आपनी मातृभाषा केवल घर तक ही सीमित ना हो। इसका दायरा बहुत बड़ा है, इसे बाहरी और ऑफिशियल लैंग्वेज के तौर पर भी इस्तेमाल करना चाहिए।

क्योंकि हिंदी हैं हम और वतन है हिंदोस्तां हमारा…

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