Saturday, July 20, 2019
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यहां के मिड डे मिल का मेनू जरा हटके है, इस स्कूल में आलू और ……………….

जशपुर मुनादी।।

जशपुर के स्कूलों में शासन की महत्त्वाकांक्षि योजना मिड डे मिल संचालित हैं। सभी स्कूल में शासन की तरफ से एक चार्ट लगा हुआ है। अगर आप स्कूल जाते हैं तो सीधे आपकी चार्ट पर नजर जाएगी और चार्ट वाकई जबर्दस्त है देखकर आपको लगेगा वाकई योजना जबर्दस्त है। आदिवासी बहुल जशपुर में योजना की अपनी सार्थकता भी है, जशपुर गरीब तबके और पिछड़े क्षेत्र के बच्चे इन सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं, और गरीबी की वजह से पालक भी शायद अपने बच्चों को इस तरह का भोजन उपलब्ध नहीं करा पाते हैं।जाहिर योजना का जो स्वरूप है उसकी सार्थकता है।

पिछले दिनों मुनादी को एक फ़ोन आया आवाज शाला में पढ़ने वाली किसी बच्ची की थी,भैया आप कुछ कीजिये न हम लोग को स्कूल खुलने के बाद से ही रोज आलू और सोयाबीन बड़ी की सब्जी ही दी जा रही है।अब खाने का मन भी नही करता है। लेकिन भूख लगती है तो खाना पड़ता है,घर मे मम्मी पापा थोड़ा बहुत जो बना रहता है देकर खेतों में चले जाते हैं, जाहिर है भरोसा पालकों का भी शासन की योजना पर है। हमने भी बच्ची को आश्वासन दिया हम आएंगे बेटा इस संबंध में जरूर कुछ करेंगे।

हम दो दिनों बाद आज बगीचा नगरीय क्षेत्र में स्थित उस माध्यमिक कन्या शाला बगीचा में पहुंचे जहां की शाला में पढने वाली बच्ची ने फ़ोन किया था। स्कूल घुसते ही मिड डे मील( मध्यान्ह भोजन) योजना का चार्ट मिला।उसी बगल से रसोई थी, बच्चे लाइन में लगे थे और भोजन ले लेकर अपनी क्लास की ओर जा रहे थे।सब्जी पर हमने नजर डाली आलू और सोयाबीन बड़ी हमने भी आंखों से देखा, कुछ अंश मटर मिलाया गया था।फिर हमने एक क्लास में खाते हुए बच्चे से पूछा उसने साफ किया कि सप्ताह में स्कूल के 6 दिन में से 4 दिन आलू सोयाबीन बड़ी ही मिल रही है।बचे दो दिनों में आलू सोयाबीन बड़ी के साथ चना तो किसी दिन मटर मिला दिया जाता है।

जाहिर है मीनू चार्ट में हमने देखा। चार्ट में स्पष्ट था चावल के साथ पंचरत्न दाल और हरी सब्जी। मगर न ही बच्चों को पंचरत्न दाल मिल रहा है ना ही हरी सब्जी। इसके अलावा भी चार्ट में लिखा है उपलब्धता के आधार पर मौसमी फल, गुड़, चना भी गुरुवार के दिन दिया जाना है।पर जो मिल रहा है स्पष्ट होता है कि समूह के नाम पर व्यापार कर रहे माफियाओं के हलक नीचे उतरकर बच्चों का हक हजम हो जा रहा है। दरअसल इस समय ऐसे समूह सरकारी योजनाओ से जुड़ गए हैं जो कागजो पर समूह दिखता है पर हैंडलर के रूप में इन मासूम बच्चों को निवाला छीनने वाले एक दो माफिया अधिकांश समूहों के पीछे है।

वहीं इस योजना और इस स्कूल की मध्यान्ह भोजन योजना पर जब हमने बगीचा के बीईओ मनी राम यादव से बात की तो उनका साफ कहना था कि शासन से समूहों को पर्याप्त राशि मीनू आधारित बच्चो के भोजन के लिए दी जाती है।अगर कोई समूह इस तरह संचालन कर रहा है तो गलत है, जांच कर कार्यवाही करेंगे।

पर बीईओ साहब कितना कार्यवाही कर पाएंगे, क्योंकि लोगों की माने तो पिछले समय ऐसे ही बच्चों का निवाला छीनने वाले एक माफिया पर कार्यवाही की थी, उस माफिया की राजनीतिक पहुंच ने उन्हें कुर्सी से ही पटक दिया था। बहरहाल जो भी हो पर मासूम बच्चों की ये आवाज की मुनादी हम कर रहे हैं देखते हैं इसका असर कितना होता है।

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