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जमीन, उसका मालिक, खरीददार सब आये विवादों में, अब हुआ नया खुलासा, जिसकी थी जमीन, वह निकला फरार आरोपी, पढ़िये पूरी कहानी

डेस्क मुनादी।। हालांकि जमीन का मामला बड़ा पेचीदा होता है लेकिन जब एक सिरा खुल जाए तो पूरा कपड़ा ही उधड़ जाता है। यही हुआ है श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र जमीन के मामले में। इस मामले का एक विवाद खत्म नहीं होता कि दूसरा खुलासा सामने आ जाता है। गुरुवार को ही अनेक मीडिया हाउस में दो बड़े खुलासे हुए हैं।

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पहला खुलासा यह है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने एक ही दिन दो रजिस्ट्री कराई जिसमें एक भुगतान 18.5 करोड़ तथा दूसरा में 8 करोड़ का भुगतान किया। दूसरी जमीन पहली विवादास्पद जमीन के मूल मालिक से खरीदी गई है।

इस मामले में दूसरा और अहम खुलासा अब यह हुआ है कि जिस हरीश पाठक और कुसुम पाठक की यह जमीन थी, जिसमें 18.5 करोड़ और 8 करोड़ का लेनदेन हुआ उसका मालिक हरीश पाठक और उसकी पत्नी कुसुम पाठक थाने के रिकॉर्ड में फरार आरोपी हैं। यह खुलासा न्यूज़ वेबसाइट न्यूज़ लांड्री ने की है।

राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा कथित तौर पर मोटे पैसे का हेरफेर करके जो ज़मीन खरीदी गई है उसके केंद्र में हरीश पाठक हैं. हरीश पाठक और उनकी पत्नी कुसुम पाठक वो शख्स हैं जिनसे दो करोड़ में जमीन खरीद कर सुल्तान अंसारी और रवि मोहन तिवारी ने दो मिनट के भीतर राम जन्मभूमि ट्रस्ट को 18.5 करोड़ में बेंच दी.

लेकिन इसी हरीश पाठक से एक और जमीन सिर्फ 12 मिनट पहले 8 करोड़ रुपए में खरीदी गई। यह भी उसी ज़मीन का एक हिस्सा है। आखिर ये हरीश पाठक है कौन?

हरीश पाठक के ऊपर साल 2016 से उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में धोखाधड़ी के कई मामले दर्ज हैं। पुलिस इनके घर की कुर्की कर चुकी है, फिलहाल वो इन मामलों में पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक फरार हैं।

सोचने वाली बात यह है कि भगोड़ा और धोखाधड़ी का आरोपी हरीश पाठक राम जन्मभूमि ट्रस्ट को जमीन बेचता है और आराम से फिर फरार हो जाता है। इस मामले में लिखा पढ़ी के लिए बतौर गवाह अयोध्या के मेयर ऋषिकेश उपाध्याय भी शामिल होते हैं। इतना ही नहीं ट्रस्ट के एक सदस्य अयोध्या-फैजाबाद जिले के डीएम भी हैं।

2009 में पाठक दंपति और उनके बेटे द्वारा बनाई गई एक कंपनी साकेत गोट फार्मिंग कंपनी से जुड़ा है. इस मामले में हरीश पाठक को साल 2018 में भगोड़ा घोषित कर दिया गया था. इसके बाद इनके घर की कुर्की भी की गई। 18 मार्च को पाठक दंपत्ति ने अयोध्या के बाग बिजैसी गांव में 1.2 हेक्टेयर जमीन सुल्तान अंसारी और रवि मोहन तिवारी को दो करोड़ रुपये में बेची और 5 मिनट बाद ही उन्होंने उसी जमीन को राम जन्मभूमि ट्रस्ट को 18.5 करोड़ रुपये में बेंच दी थी।

18 मार्च को ही राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा किया गया एक और लेनदेन दब गया। अयोध्या के बाग बिजैसी गांव में 1.038 हेक्टेयर जमीन का एक टुकड़ा सीधे राम जन्मभूमि ट्रस्ट को 716 रुपये प्रति वर्ग फुट के हिसाब से, 8 करोड़ रुपए में बेचा है। जबकि इस इलाके के सर्किल रेट के मुताबिक इस जमीन का मूल्य 4.97 करोड़ रुपये बनता है. ट्रस्ट ने 3.03 करोड़ अतिरिक्ट कीमत अदा कर यह जमीन भी खरीद ली।

जमीन पर टंगी तख्ती

न्यूज़ लांड्री के अनुसार साल 2009 में हरीश पाठक ने अपनी पत्नी कुसुम पाठक, बेटे विकास पाठक, प्रताप नरायण पांडेय, चंद्र प्रकाश दुबे, माधुरी पांडेय और अनंत कुमार तिवारी के साथ मिलकर साकेत गोट फार्मिंग लिमिटेड नाम की कंपनी बनाई थी. यह बकरी पालन से जुड़ा कारोबार था। जिसमें वो लोगों को पांच हज़ार रुपए का बांड बेचते थे. जो बांड खरीदता था उसे 42 महीने बाद आठ हज़ार रुपए या दो बकरी मिलती थीं. इसके लिए बकायदा कई जगहों पर बकरी पालन केंद्र भी स्थापित किए गए थे. लेकिन 42 महीने पूरे होते उससे पहले ही पाठक और उनके साथी लोगों का पैसा लेकर गायब हो गए।

इस धांधली को लेकर साल 2016 में एक एफआईआर 167/16 अयोध्या कैंट थाने में दर्ज हुई,इसके बाद अलग-अलग जिलों में कई और एफआईआर दर्ज निवेशकों द्वारा कराई गई।

सुनील कुमार शुक्ला ने बाराबंकी के हैदरगढ़ थाने में 27 अगस्त, 2020 को पाठक दंपति, उनके बेटे और कंपनी से जुड़े बाकी लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 379, 419, 420, 467, 468 और 471 के तहत एफआईआर दर्ज कराई। इस मामले में पाठक के बेटे विकास पाठक को पुलिस ने जनवरी 2021 में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था जो फिलहाल जमानत पर हैं।

हरीश पाठक और उनकी पत्नी कुसुम पाठक समेत सात लोगों पर साल 2019 में कैंट थाने में 420 का एक और मामला गोंडा के रहने वाले राम सागर ने दर्ज कराया था। एफआईआर संख्या 419/2019 में इनपर आईपीसी की धारा 419, 420, 467, 468, 471, 406 और 379 के तहत मुकदमा दर्ज हुआ।

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