Sunday, August 18, 2019
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स्वतंत्रता संग्राम सेनानी दयाराम ठेठवार की अनछुए पहलू …..जानिए उनके बारे …अंतिम छड़ो में क्या कहा …किस बात की जताई चिंता …

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी दयाराम ठेठवार की अनछुए पहलू गणेश कछवाहा की कलम से ….

रायगढ़ मुनादी।

ठेठ अर्थात सीधी सच्ची बात कहने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी दयाराम ठेठवार गुलामी, शोषण, दमन, अत्याचार तथा राजनैतिक, सामाजिक, आर्थिक व्यवस्था की विसंगतियों के साथ साथ अंधाधुंध औद्योगिकीकरण, जल,जंगल जमीन की लूट, प्रदूषण के खिलाफ संघर्ष और रायगढ़ की जीवन दायनी केलो नदी को बचाने की लड़ाई लड़ते लड़ते अन्ततः 97 वर्ष की आयु पूर्ण कर दिनांक 28 जुलाई 2019 को तिरंगे को अपने सीने में लपेट कर हमेशा के लिये भारत माँ से विदा ले लिए। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अमर रहे, भारत माता की जय , जय हिंद, इंक़लाब ज़िंदाबाद,के स्वर जीवन की अंतिम यात्रा में गली मोहल्लों से लेकर मुक्ति धाम तक गुंजित होता रहा।

दयाराम ठेठवार के जीवन वृत को ठेठ भाषा में सीधे सीधे रेखांकित करना सरल नहीं है। 97 वर्षों की जीवन यात्रा काफी संघर्ष , चुनौतीपूर्ण, सुख-दुख, अच्छे-बुरे, कठिन-सरल, सुगम-सहज अनुभवों के साथ गौरवशाली रहा है।

आज़ादी का जुनून
प्राथमिक शिक्षा शासकीय भूपदेव प्राथमिक विद्यालय शाला माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा नटवर हाईस्कूल रायगढ़ से प्राप्त की।
उम्र लगभग20-21वर्ष, सन 1943आजादी के दीवाने अन्य प्रांतों तथा शहरों में हल्लाबोल रहे थे। अखबारों में भी समाचार पढऩे को मिलता था। इनमें भी ललक होती थी पर साधन नहीं मिलता था। जूटमिल के कामगारों ने ही सहयोग करने का वचन दिया। सब कागज के तिरंगा बनाकर रेलवे क्रासिंग में इकट्ठे हो गए ।पोलिस का जत्था वहां पहुंच कर हटाने लग गया। बहुत से लड़के डर के मारे भाग गए। गुरुजी ने भी चमकी धमकी दिया और झंडे ले लिये, हम घर वापसआ गए। पश्चात बच्चों ने एक जुलूस चालीस पचास की तादाद में निकाले वह भी
पुलिस की डर से तितर-बितर हो गये। तीन लोग बच गए। स्व. ब्रजभूषण शर्मा,जनकराम और दयाराम ठेठवार।इन्हें पुलिस थाना में बिठाया गया और अच्छी खैर खबर ली गई, परंतु
व यह कार्य करते ही रहे।
दयाराम ठेठवार जी बताते हैं कि अचानक सन् 1944 में हमारी भेंट स्व. वी.बी. गिरी जो पूर्व राष्ट्रपति थे उनसे हुई वे मेरे
भूमिगत के समय हमारे पड़ोस में कांग्रेसी कार्यकर्ता स्व. श्री सिद्धेश्वर गुरू के मकान में ठहरे थे उनसे भेंट हुई फिर तो तांता ही लग गया प्रसन्न पंडा, गोविंद मिश्र, मथुरा प्रसाद दुबे, स्व. छेदीलाल बैरिस्टर, स्व. मगनलाल बागड़ी, स्व. श्यामनारायण कश्मीरी आदि । और हमारा हौसला बढ़ते ही गया। सबसे बड़ा सहयोग हमें हमारे हेडमास्टर स्व. पी.आर. सालपेकर से मिला। पुलिस वाले स्कूल से हमेशा दिन में दो तीन बार बुलाकर ले जाते थे।एक दिन हेडमास्टर ने हमें बुलाया सच-सच कहने को कहा, सच्ची चीज हम खुलकर बता दिये। उन्होंने हमें कहा “भारत माता के लिए जो करते हो वही करते जाओ , कोई गलत काम नहीं करना। तुम लोगों को मैं संभाल लूंगा । इस दरम्यान करो या मरो का परचे तथा अन्य परचे हमें सुबह डाक से और रात्रि साढ़े छै: बजे मेल से मिलते थे। उसे बड़ी हिफाजत से हम बांट देते थे। जो रियासती लोगों में जाने आने लगी थी हम अखबारों में स्याही के मार्के की जगहों में रात को चिपका देते थे और मजा लेने को सुबह घूमते थे, हमें बड़ा शकुन मिलता था। दिवान,कप्तान व अधिकारी सब के खिलाफ राजा, अंग्रेज के खिलाफ पढ़कर लोग बड़े प्रसन्न होते थे।
गांव-गांव जाकर अंग्रेज व राजा के खिलाफ आजादी की बात कहकर लोगों को आकर्षित करते गए। किसी गांव में हमें कष्ट नहीं मिला। कुछ दिनों केबाद गांवों में रियासती राजाओं ने एलान करवाना शुरु कर दिया कि बाहरी आदमी को जगह जो भी देगा उसकी जमीन जब्त कर ली जावेगी। गांवों में राजनैतिक चेतना तो थी नहीं, गांव वाले हमें खाना खिलाकर विदा कर देते थे। हम चिन्हित हो गए थे, हमारे नाम से वारंट जारी हो गया था।रायगढ़ से भागकर सारंगढ़ के सरिया, बरमकेला क्षेत्र में आसानी से प्रवेश मिलता था। अंतत: स्वराज मिला, भूमिगत रहने से जो कष्ट मिला था वह मिट गया ।

रियासत के विलीनीकरण में प्रमुख भूमिका
इसके पश्चात हमें जोरशोर से रियासत विलीनीकरण आंदोलन राजाओं ,रियासतों के खिलाफ करना पड़ा स्वर्गीय वल्लभ भाई पटेल पूर्व केन्द्रीय मंत्री के आह्वान पर सक्ती रियासत में हम पड़ाव डाले और गांव-गांव घूमकर लोगों को समझाने का क्रम चलता रहा। सक्ती से सारंगढ़, रायगढ़ तथा धरमजयगढ़ में कार्यक्रम प्रारंभ करते हुए हम इसमें भी सफल हुए।
राजा सारंगढ़ के चमड़े का हंटर, वह पहले एक, दो हंटरलगाकर बाद में बात करते थे। भूमिगत रहने से बहुत ही कष्ट मिला ।
15 दिसम्बर 1947 को नागपुर में छत्तीसगढ़ के 14 रियासतों का सरदार वल्लभभाई पटेल के समक्ष विलीनीकरण के दस्तावेज में हस्ताक्षर हुए।इस तरह हम दोहरी गुलामी से आजाद हुए देशी राज्य खत्म हुए पर हमें हमारी जनता को कोई फायदा नहीं मिला।

आज़ादी के दीवानों में पंडित किशोरी मोहन त्रिपाठी,सिद्धेश्वर गुरु,ब्रजभूषण शर्मा, मामा बनारसी, तोड़ाराम जोगी,बन्दे अली फातमी,बारेंद्रनाथ बनर्जी, जननायक रामकुमार अग्रवाल,हरिश्चन्द्र अग्रवाल,नटवर बेहरा, रामकिशन लुटेरिया,पूर्ण चंद्र गुप्ता और दयाराम ठेठवार, लोगों के लिये दिलों में आदर्श और प्रेरणा स्त्रोत स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की प्रथम पंक्ति की सूची में थे।

बाल सखा जननायक रामकुमार अग्रवाल का साथ-
दयाराम ठेठवार अपने बाल सखा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जननायक रामकुमार अग्रवाल का काफी आदर करते थे उतना ही स्नेह और सम्मान रामकुमार अग्रवाल भी उनका करते थे।समाजवादियों की अपनी एक बड़ी टीम बन गई थी।रामकुमार अग्रवाल प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से विधायक चुने गए।दयाराम ठेठवार ने आजीवन उनका साथ दिया। उनके साथ मिलकर छोटे बड़े बहुत से आंदोलन किये।जिसमें भूमिहीन आदिवासियों की जमीन वापस दिलाने काआंदोलन।किसानों, मज़दूरों,के खिलाफ कालाक़ानून, बेरोजगारों,छात्रों,आम नागरिकों पर किये जा रहे अत्याचार,अन्याय,दमन व शोषण के खिलाफ संघर्षों की एक लंबी श्रृंखला है।
उल्लेखनीय है कि सन 1942 में रवींद्र पुस्तकालय की स्थापना किये जो स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों एवं प्रबुद्धजनों के मिलने जुलने ज्ञान विज्ञान की जानकारियां तथा तत्कालीन सूचनाओं और प्रचार प्रसार का मुख्य केंद्र था।
15 अगस्त 12018 को रायगढ़ सुभाष चौक पर अमर शहीद सुभाष चन्द्र बोस की प्रतिमा का अनावरण स्वतंत्रता संग्राम सेनानी दयाराम ठेठवार के करकमलों द्वारा किया गया।

पृथक छत्तीसगढ़ राज्य आंदोलन के अग्रणी नेता

पृथक छत्तीसगढ़ राज्य आंदोलन के अग्रणी नेतृत्वकारी पुरोधाओं में प्रमुख थे।गांव गांव पद यात्रा ,सभा, प्रदर्शन,प्रचार प्रसार लोगों को जागृत एव एकजुट करने हेतु पूरे छत्तीसगढ़ की यात्रा ,भूखे प्यासे निरंतर आंदोलनों में शरीक होना आम जीवन चर्या बन गई थी। एक जुनून सवार था वे कहते थे “पृथक राज्य बनने से छत्तीसगढ़ का समृद्ध व खुशहाल होगा। छत्तीसगढ़ वासियो विशेष कर आदिवासियों को उनका अधिकार मिलेगा और जीवन स्तर ऊंचा होगा।” आंदोलन ने रंग दिखाया और 01 नवम्बर 2000 को पृथक छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना की गई।
लेकिनउन्होंने अपने अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि “यह दुर्भाग्य जनक रहा कि छत्तीसगढ़ की समृद्धि और खुशहाली का सपना अभी तक अधूरा ही रहा।”

जिला बचाओ संघर्ष मोर्चा के आजीवन अध्यक्ष –
बल सखा जन नायक रामकुमार अग्रवाल के नेतृत्व में अंधाधुंध औद्योगिकीकरण,जल,जंगल ज़मीन की खुली लूट,कानून ,नियम,प्रशासनिक व्यवस्था का सरे आम उल्लंघन, अत्याचार,दमन,शोषण,,जलस्त्रोतों के संरक्षण एवं पर्यावरण प्रदूषण के खिलाफ जन संघर्ष को आगे बढ़ाते हुए “जिला बचाओ संघर्ष मोर्चा रायगढ़” की स्थापना की गई।संस्थापक सदस्य जननायक रामकुमार अग्रवाल रहे। 28 मार्च 2010 को उनके निधन के बाद स्वतंत्रता संग्राम सेनानी दयाराम ठेठवार मोर्चा के अध्यक्ष बने और जीवन पर्यन्त मोर्चा के अध्यक्ष रहे।बढ़ते खतरनाक प्रदूषण, मृतप्राय होती केलो के , औद्योगिक परस्त सरकार की नीतियों, केलोडेम का नामकरण जननायक रामकुमार के नाम पर न होने, जननायक रामकुमार अग्रवाल की प्रतिमा स्थापना में हो रही विलम्ब पर काफी दुखी व चिंतित रहते थे।

पापा” (दयाराम ठेठवार ) नहीं रहे
ठेठवार जी के स्वास्थ्य लाभ की कामना हेतु उनके मीशा बंदी के साथी एवं मोर्चा के सचिव बासुदेव शर्मा और मैं (गणेश कछवाहा) 23 जुलाई 2019 को संध्या लगभग 06.00बजे उनके निवास पर उनसे मिलने गये।उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ‘बासु’ रायगढ़ को बचा लो, केलो नदी को बचाओ, लोगों को समझाओ केलो आरती से नहीं केलो को औद्योगिक और नगरीय अपशिष्ट से सीवरेज वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाकर बचाना होगा।रायगढ़ प्रदूषण मुक्त कब होगा?रामकुमार अग्रवाल की प्रतिमा को शीघ्र स्थापित कराओ ।अब मैं जाना चाहता हूं।और जीने की इच्छा नहीं है। मुझे मोर्चा के अध्यक्ष पद से मुक्त करो और उन्होंने अपनी अंतिम ( शव )यात्रा का रूट चार्ट तैयार कर बताया मुझे इस इस मार्ग,गली से ले जाना । यह सुनते ही उनकी सुपुत्री शीमती सरिता ने उनके पास जाकर उनके कान में जोर देकर कहा पापा ऐसी बातें नहीं करते। ऐसा मत कहा करो। शुभ शुभ बात किया करो।और पांच दिन बाद 28 जुलाई 2019 को उनकी सुपुत्री सरिता का फोन आया पापा हमें छोड़कर चले गए।पापा नहीं रहे।

जिला बचाओ संघर्ष मोर्चा ने किया प्रस्ताव पारित
जिला बचाओ संघर्ष मोर्चा ने प्रस्ताव पारित कर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी दयाराम ठेठवार के सपनो को पूरा करने के लिए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री माननीय भूपेश बघेल एवं जिला कलेक्टर से मांग की है कि-“रायगढ़ जिले को प्रदूषण मुक्त कर हराभरा ग्रीन व स्वच्छ जिला बनाया जायेकेलो नदी की रक्षा की जाय ड्रेनेज सीवरेज वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना की जाए , प्राचीनतम सबसे बड़े बाघ तालाब का संरक्षण,संवर्धन एवं सौंदर्यीकरण जिया जाएस्वतंत्रता संग्राम सेनानी जननायक रामकुमार अग्रवाल की प्रतिमा जो शासन द्वारा स्वीकृत एव बनकर तैयार है उसे जन नायक रामकुमार चौक केवड़ा बाड़ी रायगढ़ में अविलम्ब स्थापित किया जाएयही स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. दयाराम ठेठवार के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी

मोर्चा की विनम्र अपील
जिला बचाओ संघर्ष मोर्चा ने सभी संगठनों एवं आम प्रबुद्ध नागरिकों से विनम्र अपील की है कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. दयाराम ठेठवार जी की स्मृति में ज्यादा से ज्यादा पौधारोपण करें। रायगढ़ को हराभरा स्वच्छ सुंदर व प्रदूषण मुक्त जिला बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देकर स्व. दयाराम ठेठवार जी के सपनों को साकार कर उनकी आत्मा को शान्ति प्रदान करें।मोर्चा ने उपभोक्ता फोरम न्यायालय परिसर में माननीय न्यायाधीश श्री एम डी जगदल्ला के हाथों पौधारोपण कर इस पवित्र अभियान की शुरुआत की है।बरभाठा प्राथमिक शाला में भी फलदार व छायादार पौधों का रोपण किया गया है। इस श्रृंखला में भवानी विद्यालय चांदमारी तथा तमनार ग्राम बिजना में भी पौधारोपण किया जाएगा।

लेखक –

गणेश कछवाहा
रायगढ़ छत्तीसगढ़
मो.9425572284

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