Monday, November 18, 2019
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स्व. यशवंत षडंगी “अधिवक्ता” की द्वितीय पुण्यस्मृति पर विशेष …..परपीड़ा की अनुभूति करने वाला बेमिसाल व्यक्तित्व…..

स्व. यशवंत षडंगी (अधिवक्ता )की द्वितीय पुण्यस्मृति पर विशेष:- 18 अक्टूबर

(04 जुलाई 1952—18अक्टूबर 2017)

“परपीड़ा की अनुभूति करने वाला बेमिसाल व्यक्तित्व यशवंत षडंगी”- बासुदेव शर्मा एडवोकेट

रायगढ़ रियासत में राजपुरोहित षडंगी परिवार में जन्में यशवंत की जीवन गाथा को एकसूत्र में पिरोये जाने के प्रयास को गागर में सागर भरने जैसा कृत्य है। वकालत को क्षितिज में ले जाने का हुनर पिताश्री श्री विपिन बिहारी षडंगी (अधिवक्ता )विरासत में मिला तो मातृश्री श्रीमती सुभाषिनी से परिवारिक एकजुटता, सामंजस्य और वाककला कि बहुआयामी शैली पायी।कहना न होगा कि चार बहनों और तीन भाइयों वाले परिवार में ज्येष्ठ भ्राता होने से पिता के असामयिक निधन उपरांत सन 1980 से परिवार के कर्ता धर्ता, मुखिया होकर बखूबी कर्तव्य और दायित्वों का निर्वहन किया।

तीन बहनों और दोनों भाईयों क्रमशः सव.गोपाल एवं श्री देवेश का विवाह किया।गोपाल भारतीय स्टेट बैंक में सेवारत था जिसके असामयिक निधन उपरांत बहु और पुत्री निक्की को भी संभाला।वर्ष 1985 में यशवंत का विवाह रायगढ़ के संभ्रांत प्रतिष्ठित त्रिपाठी परिवार में जन्मी सुश्री कमल प्रभा के साथ हुआ।दोनों के दाम्पत्य संबंधों से सुपुत्री प्रीति का वर्ष 1987 में जन्म हुआ।जो प्रतिष्ठित डेंटिस्ट डॉक्टर है।

स्थानीय किरोड़ीमल शासकीय नटवर बहुउद्देश्यीय विद्यालय रायगढ़ से मेट्रिक करने के उपरांत किरोड़ीमल शासकीय कला एवं विज्ञान महाविद्यालय रायगढ़ से बीएससी की उपाधि और फिर स्वामी बालकृष्ण पूरी विधि महाविद्यालय रायगढ़ से ही विधि में स्नातक किया।परिवार में शिक्षा का माहौल चहुंओर व्याप्त रहा।बाल्यकाल से ही यशवंत को स्व. भवानी शंकर षडंगी के व्यक्तित्व ने बेहद प्रभावित किया।शिक्षा के साथ साथ क्रिकेट, टेबल टेनिस और शतरंज के खेल में रूचि रखते थे।

वर्ष 1976 में अधिवक्ता के रूप में पंजीयन उपरांत सन 1977से जिला अधिवक्ता संघ रायगढ़ की सदस्यता के साथ जिला न्यायालय रायगढ़ से वकालत के पेशे को आरंभ किया जो बदस्तूर जीवन पर्यन्त जारी रहा।
यशवंत षडंगी ने वकालत के पेशे को वास्तविक गरिमा देने में कोई कसर बाकी न रख छोड़ी।और नगर एवं जिले के वित्तीय संस्थानों, भारतीय स्टेट बैंक, सेंट्रल बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, इलाहाबाद बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक सहित अनेकों कंपनियों तथा प्राइवेट कामर्शियल बैंक की ओर से प्रकरणों में पैरवी की। इसी प्रकार भारतीय खाद्यनिगम, भारत संचार निगम लिमिटेड, ओरिएंटल जनरल इंश्योरेंस कंपनी के अलावा नगर पालिक निगम रायगढ़ तथा जिले की अन्य नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के लिए भी पैरवीकार रहे।वर्ष 1993 से लगातार 1998 की अवधि में शासकीय अभिभाषक का दायित्व निर्वहन किया।

स्व.यशवंत षडंगी ने वकालत के पेशे और अपने व्यक्तित्व को कभी भी राजनैतिक सीमाओं में अवरुद्ध नहीं होने दिया।और यही वजह है कि उनकी छवि जनसरोकारी अधिवक्ता के रूप में बनी रही।यही सर्वविदित प्रचलित रहा कि अनेकों परस्पर विरोधी लोग जो आपस में बातें नहीं करते थे परंतु ऐसे विरोधी पक्ष जब यशवंत से रूबरू होते तो दोनों ही उनकी समझाइश और सलाह को बेहिचक स्वीकार कर लेते थे।और ऐसा प्रयास इसलिए करते थे जिससे विवाद न बढ़े और न्यायालय की दहलीज पर न पहुंचे।उनके ज्यादातर मुवक्किल अपने पारिवारीक सदस्यों में समझते थे।प्रायः सभी आयोजनों, समारोह, गोष्ठियों में पूरी संजीदगी के साथ सम्मिलित रहते थे, और समाज से जुड़े रहते थे।

‘स्वदेशे पूज्यते राजा, विद्वान सर्वते पूज्यते ‘ की लोकोक्ति यशवंत की कथनी करनी यथा मंशा -वाचा-कर्मणा के चलते सभी दिशाओं और बुलंदियों पर कुछ इस तरह दृष्टिगोचर हुई कि सरस्वती शिशु मंदिर शिक्षण संस्था, स्वामी बालकृष्ण पूरी विधि महाविद्यालय, श्री जगन्नाथ मंदिर ट्रस्ट, श्री चंद्रहासिनी देवी मंदिर ट्रस्ट चंद्रपुर, उत्कल समाज सेवा संस्कृति, सव.भवानी शंकर षडंगी विद्यालय रायगढ़ में प्रभावशाली दायित्व निर्वहन किया।

ह्यूमन राइट्स ऑर्गेनोइजेशन की ओर से स्थानीय बुजी भवन में आयोजित कार्यशाला में विशिष्ट अतिथि की आसंदी से मानवाधिकारों के लिए कानून में व्याप्त विसंगतियों को दूर करने तथा आम आदमी की सुरक्षा और भविष्य के लिए बेवाक सलाह देने से नहीँ चूकते थे।

अति व्यस्तम दिनचर्या के बावजूद प्रातः कालीन भ्रमण और योग उनका प्रमुख शौक रहा।बरसात में भी भले ही छाता लेकर चलना पड़े मॉर्निंग वॉक पर निकल पड़ते थे।
मानवतावादी, सहयोगात्मक दृष्टिकोण और पर -पीड़ा की अनुभूति उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषता थी।तत्काल सहानुभूति कह सकते हैं।एक समय मरहूम शेख सफदर हुसैन (अधिवक्ता ) के ज्येष्ठ पुत्र रहबर हुसैन को उपचार के दौरान रक्त की आवश्यकता थी और खबर पा कर चूंकि समान ब्लड ग्रुप रहा इसीलिए यशवंत ने तत्काल पहुंच कर रक्तदान किया। दिनाँक 10 फरवरी 1992 की रात्रि में जब अधिवक्ता शेख सफदर हुसैन का इंतकाल हो गया तो पूरी अधिवक्ता बिरादरी और आस-पास के लोगों को टेलीफोन करके निधन का समाचार दिया।यशवंत षडंगी के बिरले व्यक्तित्व को इस संदर्भ में भी देखा जा सकता है कि जिला अधिवक्ता संघ के निर्वाचन हेतु मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पद पर जूनियर थे और उसके सहयोगकर्ता में कार्य करने के लिए उन्होंने जूनियर -सीनियर को बाधक नहीं बनने दिया।

अन्य धर्मावलंबियों के कार्यक्रमों समारोह में भी पूरी शिद्दत के साथ पहुंचते थे। सव.यशवंत षडंगी के सहयोगी साथी अधिवक्ताओं में अमरनाथ झा,राकेश धर बड़गियाँ,अरुण आठले, कु.के खान,सुभाष बेरीवाल, सुभाष नंदे,बी एल गुप्ता, सभी के द्वारा यशवंत षडंगी के नरम तरल स्वभाव अर्थपूर्ण मुस्कान और बिरादराना को रेखांकित किया।

सव. यशवंत षडंगी के जूनियर अधिवक्ताओं में संतोष मिश्रा किशोर थवाईत,मोतीलाल पटेल,के शब्दों में यशवंत षडंगी का सादगी पूर्ण व्यवहार, ऑफिस का संचालन और फाइलिंग ब्रीफिंग तथा मुवक्किलों से निर्देशों को सर्वाधिक अहमियत देते थे।सहयोगी जूनियर और प्रशिक्षु अधिवक्ताओं के लिए पथ प्रदर्शक रहे हैं। जूनियर अधिवक्ताओं की व्यक्तिगत जरूरतों, समस्याओं को जानने समझने और हल करने में कभी पीछे नहीं रहते थे।और जूनियर की समस्याओं को उसी अनुभूति से ग्राह्य करते थे जिस प्रकार वे अपने मुवक्किलों के लिए समग्र प्रयास करते थे।

ईश्वर ऐसे दिवंगत की आत्मा को चिरशांति और परिजनों को संबल प्रदान करे। उनकी द्वितीय पुण्य तिथि पर शत शत नमन।

बासुदेव शर्मा अधिवक्ता
रायगढ़ छत्तीसगढ़।
मोबाइल-+919406218607

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