Monday, October 14, 2019
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सीताफल और ड्रैगन फ्रूट भाए विदेशियों को, अंतरराष्ट्रीय क्रेता विक्रेता संघ में आये 16 देशों के उद्यमी

दुर्ग मुनादी।।

ग्रीस के उद्यमियों ने ड्रैगन फ्रूट में और सऊदी के उद्यमियों ने सीताफल में दिखाई रुचि

450 एकड़ में फैले विशाल फार्महाउस में जैविक पद्धति से हो रही खेती देखकर 16 देशों के उद्यमी हुए गदगद, कहा जैसा सोचा था उससे बेहतर पाया, अब तकनीकी दल आएगा और होगी आगे की डीलिंग

अंतरराष्ट्रीय क्रेता विक्रेता सम्मेलन के लिए राजधानी आया विदेशी उद्यमियों का दल आज फील्ड विजिट के लिए धमधा ब्लॉक के धौराभाठा पहुंचा। वहां उन्होंने 450 एकड़ में फैले फलों के फार्म हाउस देखे जहां जैविक तरीके से खेती हो रही है। यहां उन्हें 18 वैरायटी के फलों की खेती दिखाई गई। यहां उन्होंने मध्य भारत में सीताफल के सबसे विस्तृत 150 एकड़ में फैला फार्म हाउस देखा यहां बालानगर प्रजाति का सीताफल उपजाया जा रहा है जो सबसे बड़े आकार का होता है। सऊदी के दल के लोग इससे विशेष रूप से उत्साहित हुए और उन्होंने कहा कि इसके क्रय के लिए वे तकनीकी दल को भेजेंगे ताकि आगे की संभावनाओं पर विचार किया जा सके। उल्लेखनीय है कि इस वैरायटी में पल्प 80 फीसदी तक होता है। उन्होंने यहां सीताफल प्रोसेसिंग प्लांट भी देखा। ग्रीस के उद्यमियों ने ड्रैगन फ्रूट के संबंध में विस्तार से चर्चा की और आगे बातचीत के लिए तकनीकी दल को भेजने की बात कही। इस फार्म हाउस के संचालक और जेएस ग्रुप के एमडी श्री अनिल शर्मा ने दल को बताया कि उनके यहां 150 गिर प्रजाति की गाये हैं उनके गोबर का उपयोग जैविक खाद के रूप में होता है। जैविक खाद का पूरी तरह प्रयोग होने से मार्केट में इसकी अच्छी मांग है।
दल ने यहां रोबोटिक तरीके से हो


रही खेती भी देखी। यहां इजराइल का सिस्टम काम कर रहा है और पानी जैविक खाद आदि की जरूरत मशीन से तय कर ली जाती है। दल के सदस्य इसे देखकर काफी खुश हुए। उन्होंने कहा कि कल के सत्र के पश्चात आज फील्ड में हो रही गतिविधियों का अवलोकन कर बहुत अच्छा लगा। उन्होंने जैविक खेती कर रहे उद्यमियों को बधाई दी। पूर्वी देशों से आये दल के सदस्य सीतफल की बड़े पैमाने पर हो रही जैविक खेती से विशेष रूप से प्रभावित हुए। श्री शर्मा ने उन्हें बताया कि प्रदेश में कांकेर सीताफल के बड़े उत्पादक जिले के रूप में उभरा है। इस प्रोसेसिंग प्लांट का लाभ उन्हें भी मिल रहा है क्योंकि यहां माइनस 20 डिग्री सेल्सियस में पल्प 1 साल तक सुरक्षित रह सकता है। फ़ूड प्रोसेसिंग की अच्छी सुविधा से फल उत्पादक इस दिशा में अधिक झुके हैं।

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