Saturday, December 7, 2019
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सीरते तैय्यबा में हर मुश्किलों का है…… सीरते मुस्तफा आलमी बोहरान का वाहिद हल ….मोहम्मद मुस्तफा सअव किसी एक के लिए बल्कि रहमतल लिल्आलमिन बन कर दुनिया में ……

रायगढ़ मुनादी।

शहर के मदुबन पारा में देश के जाने माने मुस्लिम शिक्षा विदो की उपस्थिति में आयोजित कार्यक्रम में ओलमाओ ने मुस्लिमो को इस्लाम के अनुसार दुनिया मे रहने की हिदायत दी गई। और बताया कि आज मुसलमान अपने आप को मुसलमान तो कहता है लेकिन सीरते मुस्तफा पर चलने से गुरेज करता है। सीरते मुस्तफा पर नही चलने की वजह से आज दुनिया के लोग नाना प्रकार के संकटों से घिरे हुए हैं। आज जरुरत है तो सिर्फ इस बात की कि सीरते मुस्तफा पर चलते हुए हम कुरान और हदीस के अनुसार दुनिया मे चले तो ओलमाओ ने चैलेंज किया कि फिर दुनिया मे अमन ओ चैन लाने से कोई रोक नहीं सकता है।

देश के जाने माने मुस्लिम धर्म गुरु जनाब शाह अम्मार अहमदी अहमद उर्फ नैय्यर मिया सहित देश के मुस्लिम शिक्षा के केंद्र बिंदु रुदौली शरीफ के स्कालर शिक्षक मौलाना अमजद मिस्बाही और मौलाना इमामुद्दीन मिस्बाही पहुंचे थे। एक कार्यक्रम जिसका मौजू था सीरते मुस्तफा आलमी बोहरान का वाहिद हल यानि तमाम परेशानियों और संकट का हल पैग़म्बरे इस्लाम यानि सीरते मुस्तफा के नक्शे कदम पर चल कर किया जा सकता है। आज तमाम मुसलमान सीरते मुस्तफा से दूर होता जा रहा है दुनिया के तमाम बुराइयों में जकड़ा हुआ है आपस मे बैर नाइत्तफाकी भर चुकी है। सुन्नी शिया वहाबी के चक्कलस में पड़े हुए हैं और खुद को सुन्नी मुसलमान कहते हैं और इस्लाम के पैरोकार कहते हैं और तमाम बुराइयों में जकड़े हुए हैं। यही वजह है कि तमाम दुनिया के लोग संकट में हैं। इसका मुख्य वजह ये है कि लोग अपने पैगम्बर के बताए रास्ते से हट चुके है और दुनिया भर की संकटों में मुब्तिला हो चुके हैं।


पैगम्बरे इस्लाम किसी एक के लिए बल्कि रहमतल लिल्आलमिन बन कर आए और कुरान किसी एक के लिए नही बल्कि पूरे आलम की किताब है। मुस्लिम शिक्षा के मरकज बने केंद्र बिंदु रुदौली शरीफ से आये ओल माओं ने मोहम्मद मुस्तफा सअव के जीवन पर जीने के सलीके से लेकर नबूवत के पहले और नबूवत के बाद कि उनके दुनिया मे सन्देश को बताया। किस तरह से हर जगह झुककर और पूरी नम्रता के साथ पेश आते थे जहां जिसके पहले आकर फैसला करने की कबीलों के बीच बात आती तो लोग उस जगह पहले पहुंचकर अपने आप को पाने की होड़ होती जब लोग वहां पहुंचते तो वहां मोहम्मद मुस्तफा सअव को बैठा पाते और उनके फैसले को मानने को सहज तैयार हो जाते। उन्होंने दुनिया में इंसानियत का संदेश दिया और कुरान में भी यही संदेश है। दुनिया की ऐसी कोई संकट या परेशानी ऐसी नहीं जिसका हल मोहम्मद मुस्तफा सअव की हदीस और कुरान में नही हैं। इस पर चलने वाला ही एक सच्चा इंसान हो सकता है और एक सच्चा और सही मुसलमान हो सकता है। यहां हम बात बात पर तलवार निकाल ले रहे है छोटी छोटी बातों पर भाई भाई का और पड़ोसी पड़ोसी और रिश्तेदार रिश्तेदार का, दोस्त – दोस्त का दुश्मन हो जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुसलमान आज दुनिया मे यह बताने में नाकाम हो रहा है कि मोहम्मद मुस्तफा सअव किसी एक के लिए नही बल्कि पूरे आलम के रहनुमा है और कुरान किसी एक का नाम बल्कि पूरी दुनिया का है और सिराते मुस्तफा में सारी दुनिया दारी की मुश्किलों का हल है लेकिन दुखद हम इसे अपनाने को तैयार नही है। इशारों ही इशारों में पीरे तरीकत शाह अम्मार अहमदी अहमद ने इशारों ही इशारों में यहां मुसलमानों पर नाराजगी व्यक्त किया।

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