Saturday, May 30, 2020
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भगवान से निस्वार्थ प्रेम करना ही भक्ति है— श्रीश्वरी देवी …प्रभु की भक्ति मे सर्वोत्तम माधुर्यभाव भक्ती है

कल अंतिम दिवस पर होगी फूलों की होली व महाआरती

राबर्टसन मुनादी। तारेन्द्र डनसेना।

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प्रभु की भक्ति मे सर्वोत्तम माधुर्यभाव भक्ती है, जिसे हर मनुष्य को करना चाहिए |
             चपले (खरसिया ) में 24 अप्रैल से 8 मई तक दिव्य दार्शनिक प्रवचन एवं मधुर संकीर्तन का आयोजन किया गया है | जो प्रतिदिन सायं 5:30 बजे से 7:30 बजे तक का समय रखा गया है | इस दिव्य दार्शनिक प्रवचन को जगतगुरू 1008 कृपालु जी महाराज की परम प्रिय प्रचारिका वृन्दावन वासिनी परम पूज्य सुश्री श्रीश्वरी देवी जी के मुखारबिंद से वर्णन किया जा रहा है | दिव्य प्रवचन के 14 वां दिवस में दीदी जी ने भक्ति के भावों का वर्णन करते हुए कहा कि, ये चार प्रकार से किया जा सकता है | 
             जिसमें प्रथम दास्यभाव अर्थात प्रभु को अपना स्वामी मानते हुए सेवक की तरह मन में भाव रखकर कर सकते हैं | दूसरा सख्यभाव से अर्थात हम प्रभु जी को अपने बाल सखा का भाव मन में रखते हुए मान सकते हैं | तीसरा वात्सल्यभाव अर्थात प्रभु को हम अपने पुत्र प्रेम की भाव रखते हुए भक्ति कर सकते हैं | इन सभी भावों से सबसे श्रेष्ठ है माधुर्यभाव अर्थात प्रियतम के प्रेम की तरह भाव के साथ भक्ति कर सकते हैं | और माधुर्यभाव की ही भक्ती हर मनुष्य को करना चाहिए, क्योकिं इसमें आठ भक्ति की प्राप्ति होती है | इन सभी भावों की भक्ती का अनेकों उदाहरण देकर भगवान श्री कृष्ण की अनंत भक्ति करने की बात कही गई | क्योकिं कृष्ण अवतार में ही अन्य अवतार से चार गुण अधिक के साथ अर्थात 64 गुणों से स्वयं भगवान अवतरित हुए थे | कल 15 दिवसीय दिव्य दार्शनिक प्रवचन के अंतिम दिवस पर साधना व रूपध्यान कैसे करें पर प्रवचन के माध्यम से बताया जाएगा | और महाआरती के साथ साथ फूलों की होली खेलने का कार्यक्रम रखा गया है | इस दिव्य प्रवचन के कल अंतिम दिवस पर आयोजक परिवार की ओर से श्यामा श्याम की अद्भुत सरलतम भक्ति की मार्ग जानने के लिए सभी को अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होने का निवेदन किया गया है |

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