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निजी अस्पताल ने कोरोना मरीज से मांगे 14 लाख, मौत के बाद भी नहीं दिया शव, बेटी ने लगाई सोशल मीडिया पर गुहार, फिर एक वकील ने दिखाई सजगता, अब हाई कोर्ट ने मांगा जवाब, पढ़िए पूरी खबर

डेस्क मुनादी।।

जब कोरोना के एक बुजुर्ग मरीज की मौत एक निजी अस्पताल में हो गई तो उसकी बेटी उसका शव लेने गई लेकिन अस्पताल ने उसे यह कहकर शव देने से इनकार कर दिया कि उसने बिल का पूरा पैसा पेड नहीं किया है। निजी अस्पताल प्रबंधन ने उसके पिता के मौत के पहले उसे 14 लाख का बिल थमा दिया था हालांकि महिला ने 11 लाख अस्पताल प्रबंधन को जमा कर दिए थे।

इसके बाद पीड़ित महिला ने सोशल मीडिया में अपने कहानी वायरल कर दिया और यह वीडियो इलाहाबाद हाई कोर्ट के वकील सुधीर चौधरी के हाथ लग गया जिसे उन्होंने हाई कोर्ट को मेल के द्वारा भेज दिया, जिसपर कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन को नोटिस भेजा है।

माननीय उच्चन्यायालय इलाहाबाद ने कानपुर नगर के रिजेंसी हॉस्पिटल में 25 दिन रहने के बाद कोबिड19 पीड़ित बुजर्ग की मौत पर 14 लाख 50 हजार के बिल बनने पर पीड़ित परिवार के 11 लाख रुपये जमा होने के बावजूद डेड बॉडी न दिए जाने के मामले में मा.न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा व मा. न्यायमूर्ति अजित कुमार जी की पीठ ने कानपुर जिला प्रशासन से रिपोर्ट मांगा है और अपर महाधिवक्ता से रिपोर्ट के बारे में अवगत कराने को कहा है। जिसकी अगली सुनवाई 7 सितंबर है।

वकील सुधीर चौधरी

इस मामले में हाइकोर्ट के अधिवक्ता सुनील चौधरी ने 27 अगस्त को इलाहाबाद उच्चन्यायालय के माननीय मुख्य न्यायमूर्ति गोबिंद माथुर को मेल के द्वारा पत्र के साथ पीड़ित परिवार की ओर से मीडिया को दिए गए बयान की वीडियो क्लिप भेज कर अवगत कराएं जाने पर ,न्यायालय ने जनहित याचिका कायम कर संज्ञान लिया है।

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