Saturday, September 21, 2019
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पत्थलगड़ी को लेकर मामले में नया मोड़, मामला संयुक्त राष्ट्र संघ तक पहुंचा ……………… जानिए क्या है पूरा मामला

Munaadi News

 

कोरबा मुनादी ।।

आवेदन

पत्थरगड़ी को लेकर मामले में नया मोड़ आ गया है इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति, राज्यपाल, पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक, एसपी व कलेक्टर सहित महासचिव संयुक्त राष्ट्र संघ न्यूयार्क अमेरिका को पत्र लिखकर भारतीय संविधान के अनुच्छेद व अनुसूचि का उल्लेख करते हुए पत्थरगड़ी या शिलालेख स्थापित किया गया था जिसे भाजपा द्वारा निकाले गए सद्भावना यात्रा एवं असामाजिक तत्वों द्वारा षडयंत्र पूर्वक प्रशासन का अनुचित उपयोग करते हुए आदिवासियों के विकास एवं हितों पर कुठाराघात कर पत्थलगड़ी या शिलालेख को तोड़ दिया गया जो राजद्रोह की श्रेणी में आता है साथ ही एक्ट्रो सिटी एक्ट सहित अन्य अपराधों की श्रेणी में आता है। इसलिए इस मामले में शिलालेख तोडऩे वालों पर राजद्रोह सहित अन्य धाराओं में अपराध दर्ज किया जाए साथ ही गिरफ्तार किए गए सामाजिक कार्यकर्ताओं हर्मन किण्डो्र, जोसेफ तिग्गा, फुलजेंस तिर्की को तत्काल नि:शर्त रिहा किया जाने की मांग की गई है।

विदित हो कि जशपुर के ग्राम बच्छरांव एवं अन्य स्थानों पर संवैधानिक जागरूकता  लाने भारतीय संविधान के अनुच्छेद व अनुसूचि का उल्लेख करते हुए जानकारी कानूनी व्यवस्था के तहत पत्थरगड़ी या शिलालेख लगाया गया था। जिसे शिलालेख के माध्यम से भारतीय संविधान का प्रचार प्रसार करने की मंशा सहित शासन की संवैधानिक एवं कानूनी व्यवस्था के तहत कुछ अंशों का उल्लेख किया गया था जो शासन के कार्यों का अंग है एवं भारतीय संविधान के किसी भाग या अनुच्छेदों को शिलालेख पर सद्भावना पूर्वक अकित किया जाना किसी भी तरह से अपराध की श्रेणी में नहीं आता है। 

इस मामले में राजनैतिक तूल पकडऩे व कुछ आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करने के बाद मामले में नया मोड़ आ गया है। अब इस मामले को उच्च स्तर पर उठाते हुए संयुक्त राष्ट्र संघ तक मुद्दा उठाया जा रहा है। राष्ट्रपति सहित तमाम उच्च स्तर पर पत्र लिखकर इस मामले में गिरफ्तार किए गए सामाजिक कार्यकर्ताओं को नि:शर्त रिहा करने व भाजपा कार्यकर्ताओं व अन्य असामाजिक तत्वों पर राजद्रोह व अन्य धाराओं में अपराध पंजीबद्ध करने की मांग की गई है।

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2 thoughts on “पत्थलगड़ी को लेकर मामले में नया मोड़, मामला संयुक्त राष्ट्र संघ तक पहुंचा ……………… जानिए क्या है पूरा मामला

  1. आदिवासियों की हजारों वर्ष पुरानी रूढ़िवादी ‘पत्थलगड़ी’ पारम्परिक व्यवस्था को भारतीय संविधान का संरक्षण प्राप्त है, इसलिए ‘पत्थलगड़ी’ का विरोध करने वाले स्वयं संविधान विरोधी हैं और उनपर ही ‘देशद्रोह’ का मामला बनता है।

    आदिवासी तो संविधान का अनुपालन कर रहे हैं, वे देशद्रोही कैसे हो सकते हैं ?

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