Press "Enter" to skip to content

दर-दर भटकते पंडो समुदाय के लोग, प्रशसन की जटिल निति के भंवर में फंसे विशेष पिछड़ी जन जाति समुदाय, पंचायत सचिव सहित स्थानीय प्रशासन भी उदासीन


Munaadi Chhattisgarh Govt Ad

धरमजयगढ़ मुनादी असलम खान

आज के वैज्ञानिक युग में जहाँ लोग चाँद पर पहुँच गए है , वहीँ दूसरी ओर देश को डिजिटल इंडिया बनाने की कवायद जोरों पर है ऐसे में किसी समुदाय को महज अपनी पहचान के लिए जद्दोजहद करनी पड़ी तो बड़ी ही विडम्बना की बात है ।

यहाँ  हम बात कर रहे हैं धरमजयगढ़ विकासखंड क्षेत्र के धरमपुर ग्राम में बसे पंडो समुदाय की जो आज की स्थिति में विलुप्ति की कगार पर खड़े है ,विशेष पिछङी जनजाति पंडो समुदाय जो अपनी पहचान के लिए सरकारी कार्यालयों का चक्कर काट रहे है ,और अधिकारी कर्मचारी हैं की उदासीन बने बैठे है ।

पूरा मामला धरमजयगढ़ क्षेत्र के धरमपुर ग्राम का है जहाँ बसे विशेष पिछङी जनजाति के 15 पंडो परिवार पिछले करीब 3 साल से अपनी जाति का प्रमाण खोज रहे है ।
जिसके लिए लगातर धरमजयगढ़ तहसील और जनपद पंचायत कार्यालय के चक्कर काट रहे है, उनका कहना है जाति प्रमाण के बिना न ही शासकीय योजनाओ का लाभ मिल पा रहा है और न ही हमारे बच्चे आगे पड़ पा रहे हैं हमें हर तरह की परेशानी उठानी पड़ रही है.इन वन वासियों से  प्रशासन 1984 के बाद का दस्तावेज मांग रही है जो सहज नहीं है ऐसे में शासन प्रशासन के जटिल नियम क़ानून के भंवर में फंस कर ये पहले भी विकास के मामले में जीरो थे और आज भी जीरो पर ही खड़े है। उनसे कभी पंचायत सचिव से प्रस्ताव लाने की बात कही जाती है ,तो कभी और अन्य दस्तावेज की मांग की जा रही है ,और पंचायत सचिव धनेश्वर सिदार द्वारा प्रस्ताव बनाने में घुमाया जा रहा है कुल मिलाकर सचिव की उदासीनता के शिकार है ऐसे में यहाँ यह कहना अतिशयोक्ति न होगा कि सम्बंधित स्थानीय अधिकारी कर्मचारियों को भी शायद इनकी परेशानी से कोई वास्ता नहीं है.इन मायनो में विशेष पिछड़ी जनजाति को सरकार द्वारा विकास की मुख्य धारा से जोड़ने की बात करना बेमानी ही होगी.

Munaadi Ad

Be First to Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *