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कानून बनने के बाद भी नही हो रहा पालन, स्कूलों के मनमानी के विरुद्ध पालक पहुंचे हाईकोर्ट, राज्य शासन, स्कूली शिक्षा विभाग ………… पढ़िए पूरी खबर

बिलासपुर मुनादी।।

सरकारी नियम और कानूनों को प्रदेश के निजी स्कूल मानने को तैयार ही नहीं। प्रदेश सरकार द्वारा फीस विनियमन अधिनियम लागू करने के बाद भी स्कूलों द्वारा अपनी मर्जी से फीस लेने लेने के आरोप लगातार लगाए जा रहे हैं। निजी स्कूलों के मनमानी को अब हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। इस सम्बंध में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने राज्य शासन, स्कूल शिक्षा विभाग व स्कूलों को नोटिस जारी किया है।

दुर्ग डीपीएस पालक एसोसिएशन ने अपने वकील सुमेश बजाज के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि राज्य सरकार द्वारा फीस विनियमन अधिनियम लागू करने के बाद भी स्कूल अपनी मर्जी से ही फीस ले रहे हैं। अधिनियम में यह कहा गया है कि राज्य, जिला व स्कूल स्तर कमेटी बनेंगी जिसमें अभिभावक को शामिल कर कमेटियां बनाई जाएगी और वही स्कूल द्वारा लिए जाने वाले फीस का निर्धारण करेगी। उनके द्वारा निर्धारित फीस ही स्कूल ले सकेंगे।

लेकिन बिना फीस निर्धारण के ही स्कूल अभी फीस ले रहे हैं। याचिका में बताया गया है कि हाईकोर्ट के पूर्व में सिर्फ ट्यूशन फीस लेने के आदेश का भी पालन नहीं हो रहा, स्कूल पूरा फीस पैकेज ले रहे। याचिका में कहा गया है कि फीस लेने का विरोध नहीं है, पर फीस उसी अनुसार ली जाए जितनी पढ़ाई कराई जा रही है। याचिका में मांग की गई है कि अधिनियम के तहत बनी कमेटी द्वारा फीस निर्धारण के बाद ही स्कूल फीस ली जाए या हाईकोर्ट फीस तय कर दे। तब तक बच्चों से फीस वसूली स्थगित रखी जाए। कोर्ट ने मामले में 2 सप्ताह बाद अगली सुनवाई तय की है।

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