Munaadi exclusive - 36 कांग्रेस विधायकों की टिकट खतरे में ? दूसरे सर्वे रिपोर्ट के बाद लटक रही तलवार, सरकार और संगठन ने अब शुरू किया........... पढ़िए पूरी खबर

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February 10, 2023



Munaadi exclusive - 36 कांग्रेस विधायकों की टिकट खतरे में ? दूसरे सर्वे रिपोर्ट के बाद लटक रही तलवार, सरकार और संगठन ने अब शुरू किया........... पढ़िए पूरी खबर

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रायपुर मुनादी।। यूं तो अभी तक छत्तीसगढ़ में सत्ताधारी कांग्रेस चुनाव मोड में नहीं दिखाई दे रही है लेकिन सूत्रों के अनुसार यह शांति तूफान आने से पहले का सन्नाटा जैसा है क्योंकि आने वाले दिनों में एक रिपोर्ट पार्टी में सन्नाटे को चीरने वाली है। मतलब धीरे से तूफान की आहट सुनाई दे रही है।


बताया जाता है कि अभी जल्द ही प्रदेश की एक एजेंसी ने अपना रिपोर्ट सरकार को दिया है जिसमें प्रदेश के 36 विधायकों के बारे में नकारात्मक मार्किंग की गई है। मतलब इन 36 विधायकों को अगर टिकट दिया गया तो सरकार पर यह फैसला भारी पड़ सकता है। जनता में इन विधायकों की क्रेडिबिलिटी बहुत ही नेगेटिव है। ऐसे में इनपर फिर से दांव लगाना सरकार को भारी पड़ सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इनपर दांव लगाना खतरे से खाली नहीं है। इसे पहले भी सरकार ने एक सर्वे करवाया था और नेगेटिव मार्किंग वाले विधायकों को अपनी स्थिति में सुधार लाने की ताकीद की गई थी। उस समय भी यह कहा गया था कि स्थिति नहीं सुधरी तो टिकट कट सकती है।


कहा जा रहा है कि इस रिपोर्ट  में पुराने के अलाव भी कुछ विधायकों के नाम जुड़ गए हैं। इसके आधार पर यदि निर्णय लिया गया तो कम से कम इन 36 विधायकों की टिकट कटनी तय है। हालांकि संगठन से जुड़े नेताओं का प्रत्यक्ष तौर पर यह कहना है कि कांग्रेस में कभी सिटिंग एमएलए की टिकट नहीं काटी जाती। कांग्रेस में यह परंपरा नहीं है लेकिन दबी जुबान से नेता यह स्वीकार भी करते हैं कि यदि दुबारा सत्ता में आना है तो साहसिक निर्णय संगठन और सरकार को लेने पड़ेंगे। इसके बगैर बात नहीं बनने वाली है। हालांकि कई जगह पार्टी में काफी अंतर्विरोध भी है लेकिन पार्टी का मानना है कि यदि साहसिक निर्णय आना शुरू हो गया तो यह अंतर्विरोध अपने आप समाप्त हो जायेगा। लोग संगठन के काम में मन लगाएंगे और चुनाव में पार्टी को इसका लाभ मिलेगा।


प्रदेश के सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी  प्रदेश में पुनः सत्तासीन होने के लिए फूंक फूंक कर कदम रख रही है। किसी भी विषय पर तत्काल निर्णय लेने के अलावा बड़े फैसले करने तक, सभी कदम उठाने के बारे में अपनी तैयारी शुरू कर चुकी है। ऊपर से जितनी शांत कांग्रेस दिख रही है उतनी है नहीं। चुनाव से संबंधित तैयारियां इसने शुरू कर दी है। बूथ से लेकर विधानसभा तक में सर्वे के काम चल रहे हैं। जीतने वाले संभावित उम्मीदवारों को टटोला जा रहा है, बहानेबाजी और बयानबाजी पर सरकार और संगठन की पैनी नजर है। संगठन के एक - एक कामों पर नजर रखने के लिए टीम बनी हुई है। 


पिछले दिनों बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने के लिया कहा गया था। उसमे जिम्मेदार कार्यकर्ताओं की लिस्ट मांगी गई थी। कई जगह से संगठन को फर्जी जानकारी भेज दी गई थी जो तुरंत पकड़ में आ गई और संगठन के स्थानीय मुखिया को तत्काल सूचित कर उन्हें कहा गया कि अब फर्जीवाड़ा नहीं चलने वाला। इसके बाद से संगठन सचेत हो गई। एक कांग्रेस के नेता ने बताया कि छत्तीसगढ़ में संगठन अब पुराने ढर्रे पर नहीं चलेगी, अब पुराने मिथक और परंपराएं टूटेंगी। 


पार्टी का सकारात्मक पक्ष

कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि सरकार के खिलाफ प्रदेश में फिलहाल कोई माहौल नहीं है। सरकार पर कोई बड़ा आरोप नहीं लगा है । किसानों के लिए, मजदूरों के लिए, भूमिहीन किसानों के लिए सरकार ने कल्याणकारी योजनाएं जो शुरू की है वह सरकार के पक्ष में है। और माना जा रहा है कि यह तबका इनके साथ खड़ा है। आरक्षण का फैसला और छत्तीसगढ़ियावाद सबसे मजबूत पक्ष है और इसका तोड़ फिलहाल विपक्षी भाजपा के पास नहीं है। ये दो ऐसे मुद्दे हैं जो कई मुद्दों पर भारी पड़ सकते हैं बशर्ते कांग्रेस चुनावों में इन्हें इन कैश कर सके।


नकारात्मक पक्ष

सरकार धार्मिक मोर्चे पर भाजपा के आरोपों का जवाब नहीं दे पाती है न ही धार्मिक उन्माद पैदा करने की कोशिशों पर लगाम नहीं लगा पाई है। NSA लागू करने के बावजूद जगह -जगह हो रहे धार्मिक पंचायतों और धर्मांतरण संबंधी आंदोलनों पर रोक नहीं लग पा रही है। स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार के आरोप अधिकारियों पर लगते है लेकिन उसपर सरकार चुप है। अधिकारियों पर लगाम नहीं है जिससे कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं में भी असंतोष है। इसके अलावा सरकार के कामों को जनता तक पहुंचने के लिए न तो संगठन काम कर रही है न ही सरकार में बैठे लोग। कई हितग्राहियों को यह भी पता नहीं होता कि जिस योजना का लाभ उन्हें मिला है वह राज्य सरकार का है या केंद्र सरकार का। स्थानीय स्तर पर पार्टी गुटों में बंटी हुई है जिसका नुकसान पार्टी को चुनाव में हो सकता है। 


पार्टी के सूत्रों का कहना है कि यदि इस रिपोर्ट पर बिना किसी दबाव के अमल कर लिया जाए, और सिर्फ जितने वाले कैंडिडेट को ही टिकट देने का मानक तय कर दिया जाय तो समस्या नहीं होगी और कार्यकर्ता इस बात को समझ भी जायेंगे। लेकिन यदि 36 विधायकों की टिकट एक साथ कटेगी तो पार्टी में उबाल आना भी तय है। हालांकि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस 15 साल विपक्ष में रहने के बाद भी कभी कमजोर नहीं रही ऐसे में यह माना जा रहा है कि यदि पार्टी समय रहते सही निर्णय लेती रही तो इसे ज्यादा नुकसान होने के बजाय कांग्रेस को लाभ ही मिलने की ज्यादा संभावना है।


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