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Munaadi Breaking – कोयला खनन ने तमनार विकासखंड के आदिवासियों में बढ़ाया सांस संबंधी समस्या, ICMR की स्टडी रिपोर्ट में हुआ खुलासा, पढ़िये पूरी खबर

रायगढ़ मुनादी।।

हालांकि खनिज और उद्योगों के बारे में यह कहा जाता है कि ये किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के मेरुदंड हैं लेकिन यदि इनके लिए कोई विशेष नीतियां न हों तो ये विकास के बजाय विनाश का पर्याय बन जाती है। 80 के दशक से औद्योगीक विकास और 90 के दशक से कोयला उत्पादन में अग्रणी रायगढ़ जिले पर विकास का यह पहिया भारी पड़ रहा है, खासकर यहां के आदिवासी समुदायों पर। यह बात Indian council of medical research (ICMR) के एक स्टडी रिपोर्ट में कही गयी है।

यह स्टडी रिपोर्ट केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के निर्देश पर National institute of tribal health (NIRTH) के द्वारा ICMR के सहयोग से की गई है। इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि यहां के वायु प्रदूषण ज्यादा होने से भी तमनार क्षेत्र के आदिवासी समुदायों को कई बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। स्टडी रिपोर्ट में कहा गया है कि माइनिंग के नजदीक राह रहे आदिवासी जनसंख्या को Acute respiratory infection (ARI) जैसी समस्यायों का सामना करना पड़ रहा है। खनन के कारण रोड एक्सीडेंट में वृद्धि, कुपोषण, अन्य स्वास्थ्यगत समस्याओं का भी उन्हें सामना करना पड़ रहा है।

इस क्षेत्र के 5 प्रतिशत लोगों में सांस संबंधी बीमारियों का होना पाया गया जो बहुत ज्यादा है। इसके लिए यहां के प्रदूषण और poor air quality index को जिम्मेदार बताया गया है। हालांकि स्टडी में तह भी कहा गया है कि इसके लिए एक और स्टडी की जरूरत है जिसमें ज्यादा बिंदुओं को स्टडी के लिए रखा जा सके। ताकि इस समस्या के और पहलुओं का पता चल सके। हो सकता है इतनी बड़ी संख्या में फेफड़े का संक्रमण, जो बहुत जल्दी यहां के लोगों में होने की बात कही गई है इससे आगे चलकर उन्हें बड़ी स्वास्थ्यगत परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

इस स्टडी में तमनार विकासखंड के 1733 वयस्क और बच्चों को शामिल किया गया था। जिनकी नाड़ी, ब्लड प्रेशर, शुगर, वजन और लंबाई की जांच की गई थी। 42 प्रतिशत प्रीस्कूल बच्चे अंडर वेट पाए गए, 8.8 प्रतिशत पुरुष और 6.6 प्रतिशत महिलाओं में Chronic energy deficiency सांस संबंधी तकलीफ के कारण पाई गई। 4 प्रतिशत लोगों इन फंगल इन्फेक्शन पाया गया।

यह स्टडी ICMR के Non communicable diseases विभाग के सुयश श्रीवास्तव और तपन चकमा के द्वारा की गई है। इसके बारे में The Hindu ने विस्तृत रिपोर्ट भी प्रकाशित की है।

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