Saturday, September 21, 2019
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खनन प्रभावित क्षेत्र में वनाधिकार पट्टा …. 2 ही सिर्फ क्यों ? साढ़े 6 सौ पेटी में है बन्द उसे कब खोलेंगे पूछ रहे ….

Munaadi News

खनन प्रभावित क्षेत्र के आदिवासियों को वनाधिकार पट्टा दिए जाने की मांग

रायगढ़ मुनादी।

रायगढ़ जिले के तमनार कोयलांचल क्षेत्र में लगभग साढ़े 6 सौ वनाधिकार पट्टा वितरण करवाई की फाइल को सौ ताले के अंदर बंद करके रखा गया है। खास तौर पर कोयला खनन प्रस्तावित प्रभावित क्षेत्र का यहां प्रभावित वनाधिकार पट्टा प्राप्त करने के लिए लंबे समय से जद्दोजहद कर रहे हैं लेकिन नही मिल रहा है इसी बीच एक आशा की किरण भी दिखाई दी है।

इसी बीच पता चला है कि खनन प्रभावित क्षेत्र के सालों से लंबित पड़े वनाधिकार पट्टों में से 2 को दिया गया है। जबकि लोगो को ये जानकारी है कि पट्टा देने से जिला प्रशासन और वन विभाग द्वारा साफ तौर पर मना कर दिया है। और नही दिया जा रहा है उस क्षेत्र के दो ग्रामीणों को वनाधिकार पट्टा दिया गया है यह जानकारी बाहर आने के बाद सैकड़ो हजारों की संख्या में लंबित वनाधिकार पट्टा हितग्राही अचंभित हो गए लेकिन अब इससे उनमे एक आस जग उठी है।

तमनार ब्लॉक के खनन प्रस्तावित क्षेत्र में दो लोगो को वनाधिकार पट्टा दिया गया है जबकि इसकी जानकारी ही किसी को नही मिली यहां तक कि उस संगठन को भी जरा सा भनक लगने दिया गया जो सालो से इनके लिए काम कर रही हैं। दो में से एक को 50 डिसमिल का और एक को 2 एकड़ का पट्टा दिये की जानकारी इस क्षेत्र में लंबे समय खनन प्रभावित क्षेत्र में काम करने वाली सामाजिक कार्यकर्ता को इसकी भनक तब लगी तब यह खबर बाहर आई। खान खनन क्षेत्र में देश विदेश स्तर पर आयोजित कार्यशालाओं और आयोजित कार्यक्रमों में आंकड़ों और तथ्यों के साथ रख चुकि हैं और अब इस पूरे मामले को लेकर हाइ कोर्ट जाने की तैयारी कर रही हैं।

पिछले दो कलेक्टरों के कार्यकाल में खनन प्रभावित क्षेत्रों के 396 प्रकरणों को पेटी में बंद कर रखा है और कई ऐसे भी हितग्राही है जिनके आवेदन लिया तक नहीं गया है।
ऐसे में इससे जुड़े सामाजिक संगठन अब कोर्ट में जाने की तैयारी में जुटे हैं। सामाजिक संगठन का साफ कहना है कि जो वास्तविक में काबिज हैं उन्हें वन अधिकार पट्टा अधिनियम के तहत प्रदाय कर दिया जाना चाहिए था लेकिन जानबूझ कर प्रकरण को दबाया गया।
आपको बता दें कि तमनार ब्लॉक में लगभग साढ़े 6 सौ और रायगढ़ जिले में लगभग 6 हजार से अधिक वनाधिकार पट्टा प्रकरण लंबित है।
इससे जुड़े सामाजिक संगठन का कहना है कि राजनीतिक दलों को चाहिए कि वे अपने घोषणा पत्र में ये शामिल क्यों नहीं करते कि खनन प्रभावित क्षेत्र के वनाधिकार पट्टा हितग्राहियो को पट्टा दिलाया जाएगा।

क्षेत्र में गुजरात इलेक्ट्रिकल्स कारपोरेशन और महाराष्ट्र कॉर्पोरेशन के कोल् ब्लॉक प्रस्तावित है और यही वजह है कि जिला प्रशासन जानबूझ कर फ़ाइल दबा कर रखी है और महज खाना पूर्ति करते हुए दो खनन कोयला खनन प्रभावित होने वाले दो किसान को वनाधिकार पट्टा दिया गया कब और कैसे दिया गया सिर्फ दोनों हितग्राहियों को छोड़ कर किसी को पता नही चला। सामाजिक संगठन की सविता रथ द्वारा सीधे तौर पर भेदभाव करने का आरोप लगाया है और अब कोर्ट में जाने की बात कही गई है।

वही राजेश त्रिपाठी सामाजिक कार्यकर्ता ने बताया कि मिलन सिदार को 2 एकड़ का पट्टा मिला है जिस पर वो बोर करवा कर धान फसल और सब्जी उत्पादन कर अच्छी आय अर्जित कर रहा है यदि इसी तरह सभी को मिल जाये तो ये पिछड़े आदिवासी भी समाज की मुख्य धारा से जुड़ सकते हैं।

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