Saturday, September 21, 2019
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कहां है अब स्थानीय, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं … जो आदिवासियों के हित में काम करने का करती है दावा

रायगढ़ से शमशाद अहमद की मुनादी।

रायगढ़ जिले के घरघोड़ा, धरमजयगढ़ व तमनार जैसे आदिवासी बाहुल्य अंचल में प्रस्तावित 68 कोयला खदान जिसमे 356 गांव उजड़ जाएग्ने जिसकी शुरुआत तमनार के गारे पेलमा सेक्टर 2 मेसर्स महालैंको अडानी के लिए जन सुनवाई 27 जून 2019 को हो रही है। जिसमे 9 ग्राम पंचायत और 13 गांव उजड़ने के कागार पर हैं।


यहां पर स्थानीय संस्थाए 300 से ज्यादा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थाए जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मदद लेकर आदिवासियों में विकास एवं अधिकार को लेकर काम करने का दावा करती रही हैं। अब जब आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में कोयला खनन के लिए जन सुनवाई होने जा रही है और प्रभावित क्षेत्र के आदिवासी अपने अस्तित्व को बचाने की जद्दोजहद कर रहे है और कोल् ब्लॉक के लिए जमीन नही देने की जिद पर अड़े है और वही दूसरी ओर समूचा सरकारी तंत्र अडानी के लिए रास्ता खोलने में जुटा हुवा है। और प्रभावित तमाम तरह की जद्दोजहद कर अपने अस्तित्व को बचाने की गुहार लगा रहे है ऐसी स्थिति में अब वो राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय स्तर की सामाजिक संस्थाए जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक मदद लेकर जिसमे मुख्य रूप से एमनेस्टी, एकता परिषद, पीयूसीएल, छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन जैसे संस्थाओं ने इन आदिवासियों की मदद और जल जगंल जमीन और उनके अधिकारों की रक्षा करने का दम्भ भरने वाली किसी राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय संस्थाए दिखाई नही दे रही है। जो पिछले कुछ सालों तक लगातार यहां आकर उनकी सुरक्षा उनके विकास और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए खूब हल्ला कर रही थी।

रायगढ़ जिले के घरघोड़ा तमनार और धरमजयगढ़ में एक साल पहले तक जिले के आदिवासियों के विकास, अधिकार एव जल जंगल जमीन बचाने का दावा करते रहे। जैसे ही यहां महाजेंको अडानी की कोल ब्लॉक के जनसुनवाई की सुगबुगाहट शुरू हुई वैसे ही ये सब राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय संस्थाए गायब हो गई। आज जब उनके सहयोग की जरूरत है तब आज वह सब राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय संस्थाए गायब है।


जब छत्तीसगढ़ बना था तब रायगढ़ जिले में 41 प्रतिशत सुरक्षित वन थे लेकिन उद्योगों का विकास करते करते स्थिति ये आ गई है कि जिले में महज 31 प्रतिशत वन ही शेष बचे है अब जब 68 कोल ब्लॉक प्रस्तावित है जिसमे से एक कि जन सुनवाई कर दिया जाएगा। महाजेंको अडानी के लिए होने वाली कोल ब्लॉक की जन सुनवाई पूरी हो जाने के बाद 2580 हेक्टयर उजड़ जाएगा जिसमे कृषि और वन भूमि दोनों शामिल है।


इसके बाद शायद फिर वही राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सामाजिक संस्थाए यहां आएंगी और आदिवासियों की जली हुई राख पर शोध करेंगी की इस तरह उनकी परम्परा रही ऐसा उनका खान पान रहा इसे उनकी संस्कृति रही हमे इसे संरक्षित करने की जरूरत है कह कर फिर खूब हो हल्ला कर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मदद लेकर आदिवासियों की मदद और उनकी आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक मुद्दों पर अध्ययन करने आएंगे।

ये बाते प्रभावित क्षेत्र के लोगों का कहना है आदिवासी हितों की बात करने और अधिकारों की रक्षा की बात करने वाले सामाजिक संस्थाए उनकी विषम परिस्थिति में ये सब गायब हो गई है आज उनमे से किसी भी संस्था का कोई अता पता नही है जबकि उनके वायदों के अनुसार आज उन सामाजिक संस्थाओं का यहां होना जरूरी है ऐसे सामाजिक संस्थाओं के प्रति ग्रामीणों में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला यहां प्रभावित ग्रामीणों ने कहा कि इन सबने मिलकर उनका उपयोग किया और एन मौके पर गायब हो गए।

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2 thoughts on “कहां है अब स्थानीय, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं … जो आदिवासियों के हित में काम करने का करती है दावा

  1. हम काम नही करते सो तो ठीक है ! कम से कम मेरा बनाया मैप को स्थान दिया उसके लिये तहे दिल से शुक्रिया ।

  2. कोन्हो सन्स्था ला काबर उटकना।सरकार चलोइया ममन ला चाहिये कि ए सब हिचकोला ला आडर कर के बन्द करवाय।ते हर भला ठीक ए।हमर खेत मन उद्योगमय होगिस ,हर साल के हामर नुकसान होत हे ओला काबर कोई नी पोलियाय।

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