Friday, June 5, 2020
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लॉक डाउन और “मैं” : लॉक डाउन में हताश निराश लोग इस लेख को जरूर पढ़ें ,यकीन मानिए नयी ऊर्जा मिलेगी ,तो क्लिक कीजिए और बढिये ……


जीवन में जब मनुष्य विपरीत परिस्थितियों से गुजरता है तो अक्सर जाने या अनजाने में वह नकारात्मक विचारों के घेरे में फँस-सा जाता है। ऐसे में अक्सर होने वाले , बनने वाले काम भी बाधित होने लगते हैं और मनुष्य अनजाने भय व निराशा के घेरे में घिरता चला जाता है। चाहे कोई भी परिस्थिति हो,अपना मनोबल, हिम्मत, सकारात्मकता बनाए रखें…
“यह सोचने के बजाय कि आप क्या खो रहे हैं, ये सोचने की कोशिश करें कि आपके पास ऐसा क्या है जो बाकी सभी लोग खो रहे रहे हैं।”    ये कहना है डार्विन पी किंसले का। ये बात अक्षरशः सत्य भी है। हमारे पास ऐसा क्या है जो इन परिस्थितियों में बाकी के पास नहीं है, ये देखना चाहिए । तब हम समझ पाएँगे कि हम बाकियों की तुलना में कितने भाग्यशाली हैं। ऐसा करके हम स्वयं में एक सकारात्मकता का संचार-सा होता देखेंगे।
आज जब भारत ही नहीं, पूरा विश्व भी कोरोना वायरस से जूझ रहा है,  ऐसे में अपनों का  और स्वयं का मनोबल बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती के रूप में हमारे सामने है ।  हमने तो घर से बाहर निकलना खोया है दोस्तों के साथ मिलना-जुलना खोया हैअपनी आदतों के वश में रहना खोया हैअपने हिसाब से अपनी दिनचर्या जीना खोया है
ढेर सारी ऐसी बातें खोई हैं हमने पिछले कुछ दिनों में….लेकिन उनकी भी तो सोचें जिन्होंने मुश्किल वक़्त में अपनों का साथ खोया हैजो सेवाकर्मी लोगों की सेवा में दिन रात लगे  हैं,जो पुलिसकर्मी दिन रात कानून-व्यवस्था संभाल रहे हैंअति आवश्यक सेवाओं में कार्यरत सभी लोगों को देखेंउन लोगों का सोचें जिन्हें अपने घर की छत नही मिली इन मुश्किल दिनों मेंवे लोग जो भूखे पेट सो रहे हैंवे लोग जो मजबूर हैं एक वक्त का भी अनाज माँगने कोवे लोग जो जान गंवा रहे हैंवे लोग जिनका दिल हाहाकार कर रहा हैवे लोग जो मीलों पैदल सफर करके भी अपने घर नही पहुँचेवो बेटा जो माँ को मुखाग्नि नहीं दे सका वे लोग जिनकी आँखें बोलती हैं, शब्द मौन हैं
ये तो कुछ ही उदाहरण हैं..ढेरों ऐसे उदाहरण मिल जाएँगे आसपास ही..
मुश्किल वक़्त है, कठिन हालात हैंअपना मनोबल बनाए रखें सकारात्मक रहेंहमारे पास जो कुछ हैउसके बारे में सोचें, बेहतर लगेगा।
सकारात्मकता में भविष्य की अपार संभावनाएं छिपी होती हैं। मनुष्य अगर सकारात्मक सोच रखता है तो वो उन्नति के शिखर की ओर बढ़ता चला जाता है । नकारात्मक लोगों के इर्द-गिर्द तो बस नकारात्मक विचारों का जाल ही दिखाई देता है। खुद पर यकीन बनाए रखें, हौसला रखें और सकारात्मक रहें। आप खुद ही फर्क महसूस करेंगे।

 परिचय –
नाम- श्रीमती आभा बघेल ,जन्मतिथि एवं स्थान-23 मई (धनबाद:झारखंड)- एम.ए.(हिंदी) , एम.ए.(शिक्षा) , एम.ए.(मनोविज्ञान)सम्प्रति- शिक्षिका, राजकुमार कॉलेज,रायपुर ,पता- राजकुमार कॉलेज परिसर, रायपुर, छत्तीसगढ़
ई.मेल.- [email protected]

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