Thursday, April 25, 2019
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कोरबा लोकसभा चुनाव कोरिया भाजपा के लिए अग्नि परीक्षा इनके अलावा नही बचा कोई …….

जिला पंचायत सदस्य देवेंद्र तिवारी के अलावा अब नहीं बचा है कोई बड़ा निर्वाचित जनप्रतिनिधि

अनूप बड़ेरिया की समीक्षा।

लगभग 3 माह पूर्व संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को पूरे जिले में बुरी तरह से मुंह की खानी पड़ी थी। जहां पिछले दो पंचवर्षीय पूरा कोरिया जिला भाजपामय था, वहीं एक झटके में पूरे जिले से भाजपा का सूपड़ा साफ हो गया और भारतीय जनता पार्टी कोरिया जिले की तीनों विधानसभा सीट हार गयी।
दरअसल भाजपा के हार की इबारत स्थानीय चुनाव के नतीजों से ही लिखनी आरंभ हो गई थी । लेकिन भाजपा के हुक्मरान इन छोटी हारों से बड़ी हार की आहट को समझ नहीं सके। इसके पीछे सत्ता की चमक या सत्ता के दम्भ की सुनहरी पट्टी इन बड़े नेताओं की आंखों में लगी होना भी एक कारण हो सकती है। छोटी हार कब बड़ी हार में तब्दील हो गई इसका अंदाजा भाजपा के नेताओं को 11 दिसंबर 18 को ही पता चला।

ग्राम पंचायत ,जनपद पंचायत ,जिला पंचायत के बाद नगरी निकाय चुनावों में पूरे कोरिया जिले में भाजपा को करारी शिकस्त मिली। लगातार हार के बावजूद भाजपा संगठन या विधायक-मंत्री जैसे बड़े भाजपा नेताओं ने भी इसे गंभीरता से नहीं लिया और छोटी सी फ़ांस ने धीरे -धीरे कब गम्भीर घाव का रूप धारण कर लिया यह भाजपा नेताओं को पता ही नही चला। फिर फाइनल नतीजा गैंगरीन की तरह हुआ कि एक हिस्से को पूरी तरह काट कर अलग ही करना पड़ गया। यदि सत्ता का दंभ छोड़ कर विधायक, संसदीय सचिव या मंत्री जमीनी स्तर पर काम करते या कार्यकर्ताओं को रिचार्ज करते तो शायद गैंगरीन जैसी स्थिति नहीं आती और जिले में भाजपा की कुछ लाज रह जाती।

भाजपा के इस स्थिति में आने का जिम्मेदार पूरी तरह संगठन को भी ठहराना सही नहीं होगा। दरअसल तीनों विधायकों ने अपने कद के आगे संगठन को इतना बौना कर दिया था कि हर निर्णय विधायक आवास से होने लगे थे। पूरे 5 साल पार्टी संगठन का काम केवल जिला कार्यालय में बैठक का कोरम पूरा करने में ही रह गया।

कोरिया जिले में बुरी तरीके से लगातार हार के बाद अब भारतीय जनता पार्टी के सामने लोकसभा चुनाव में अपनी प्रतिष्ठा बचाने का आखिरी मौका है। भाजपा के नेताओं व संगठन को अब पूरी जी जान लगाकर यह चुनाव करो या मरो की स्थिति पर लड़ना पड़ेगा। लोकसभा चुनाव हारने की दशा में भाजपा के पास फिर कोई बड़ा चेहरा निर्वाचित जनप्रतिनिधि के रूप में नहीं रह जाएगा।

   

जिला पंचायत के सदस्य देवेंद्र तिवारी वर्तमान में एकमात्र जनाधार वाला ऐसा बड़ा चेहरा बचा है जो बड़े पद पर निर्वाचित जनप्रतिनिधि के रूप में मैदान में टिका हुआ है। संभवत इस वर्ष के अंत में जिला पंचायत का चुनाव भी होना है।

कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है। कोरबा का लोकसभा चुनाव भाजपा की साख का सवाल बन चुका है।

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