Thursday, October 17, 2019
Home > Raigarh > जल संसाधन विभाग के उप अभियंता के पदोन्नति प्रकरण में अवमानना … मामले की सुनवाई में हाई कोर्ट की फटकार

जल संसाधन विभाग के उप अभियंता के पदोन्नति प्रकरण में अवमानना … मामले की सुनवाई में हाई कोर्ट की फटकार

बिलासपुर मुनादी।

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में पदस्थ एक उप अभियंता के पदोन्नति के मामले को लगातार कोई न कोई अड़चन लगाकर वंचित रखने के मामले और कोर्ट के आदेश पर अवमानना के मामले में हुई सुनवाई के दौरान मंत्रालय में पदस्थ एक अधिकारी को न्यायालय के द्वारा जमकर फटकार लगाया गया और इस मामले में न्यायालय को गुमराह करने की बात कही गई।

दरअसल पूरा मामला जल संसाधन विभाग के मंत्रालय पद्स्थ अनुभाग अधिकारी श्री त्रिपाठी के कारनामों के कारण वर्ष 2008 से यू के श्रीवास्तव की स्नातक उप अभियंता से सहायक अभियंता में रोकी गई पदोन्नति मामले के अवमानना प्रकरण में विभाग द्वारा आदेश के पालन नही किये जाने पर विगत 9 जुलाई की सुनवाई में, विभाग के गलत जवाब पर न्यायाधीश द्वारा हाई कोर्ट में सरकारी व्कील को फटकार लगाई तथा सरकारी वकील ने विभाग के प्रस्तुत जवाब में अनापत्ति प्रमाण पत्र से संबंधित जानकारी से अपनी अनभिज्ञता होने का हवाला दिया तब जाकर विद्वान न्यायाधीश ने उन्हें 24 जुलाई को सही पालन प्रतिवेदन के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया है।

      

विभाग के जवाब में श्रीवास्तव के द्वारा उच्च शिक्षा के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र नही होने का उल्लेख किया है जो सही नही था। इसके विरोध में श्रीवास्तव द्वारा सेवा पुस्तिका में अनापत्ति प्रमाण पत्र दर्ज होने का प्रमाण देते हुए न्यायाधीश से गलत जानकारी देने का प्रकरण दर्ज करने का अनुरोध किया गया।
इस पर संज्ञान लेकर न्यायधीश द्वारा ऐसे व्यक्तिगत दुर्भावनावश पालन नही किये जाने का मामला मानकर फटकार लगाई । विभाग द्वारा सुधार नही किये जाने पर श्री चंपावत, सचिव् जल संसाधन पर अवमानना की कार्यवाही होना तय है । इस प्रकरण को समाचार पत्र ने ” जल संसाधन विभाग द्वारा उच्च न्यायालय को गुमराह” किये जाने का समाचार भी प्रकाशित किया था और कोर्ट की संज्ञान में भी था ,जो कोर्ट की टिप्पणी से सही साबित हुआ ।

अब देखना है कि न्यायालय के फटकार में बाद इन अधिकारियों को सद्बुद्धि आती है या नही। इस मामले में बताया जा रहा है कि न्यायालय ने दस्तावेजो के अवलोकन के बाद पाया गया है कि इस मामले में अधिकारी जानबूझ कर गलत तथ्य पेश कर न्यायालय को गुमराह करने और अवमानना किया गया है न्यायालय से इस मामले में करवाई हो सकती है।

munaadi ad

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *