Wednesday, November 13, 2019
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डाक विभाग के इस कर्मचारी को सच बोलने की मिली ऐसी सजा…. सालों से जूझ रहा है लेकिन …..पढ़िये पूरी स्टोरी

संजय सारथी की मुनादी।।

डाक विभाग में पदस्थ कर्मचारी कई सालों से सच बोलने की सजा भुगत रहा है।करे कौन,भरे कौन के तर्ज पर गलती किसी और ने की और अधिकारी इसे वेतन नही देने की सजा दे रहे हैं।अपने अधिकारियों से कई सालों से यह कर्मचारी न्याय की गुहार लगा रहा है लेकिन इसकी सुनने वाला कोई नही…….

पढ़िये पूरी कहानी……..

डाक विभाग में पदस्त श्याम दास महंत सच्चाई बात को रखने के कारण इनही के ऊपर आरोप लगाकर पदस्त नही किया जा रहा है

धरमजयगढ़ विकासखंड के ग्राम बोजिया नवापारा छाल में सन् 26 दिसंबर 1987 को श्याम दास ग्रामीण डाकविभाग में पदस्त थे, 28 दिसंबर 2010 से नवापारा शाखा डाक घर मे दिलचंद नायक की पदोन्नति होने से डाकघर में कार्य अधिक हो गया जिसके कारण श्याम दास को नवापारा छाल में अटैच में पदस्त किया गया। उसी बीच 2010 से 2014 के बीच मे बी.पी.एम. मकरधज पटेल को दोहरा भत्ता एवं एरियर्स मिला, श्याम दास की नियुक्ति आदेश को माना जाता तो मकरध्वज के वेतन रिकवरी में कटौती होती लेकिन कटौती को बचाने के लिए उपनिरीक्षक सी.एल. पटेल द्वारा श्याम दास की नियुक्ति तारिक में बदलाव करके 17 जनवरी 2015 कर दिया गया। मामला यह था कि खाताधारक देवनाथ पटेल ने शाखा डाकघर नवापारा में एस.बी. खाता खोला था, जिसका खाता नो. 362451 एवं नया खाता नो. 8381940845 है, जिसकी 4 मार्च 2016 को अचानक मृत्यु हो गयी जमा पैसा को बी.पी.एम. मकरध्वज पटेल के द्वारा जाली हस्ताक्षर कर बिना नामिनी का दिनांक 11 मार्च 2016 को 30,000 रुपये विथड्राल किया, व दिनांक 15 मार्च 2016 को 24,500 रुपये दोबारा विथड्राल किया, गांव के लोकल नागरिक होने पर श्याम दास द्वारा इस बात का उजागर कर अपने सक्षम अधिकारियों को शिकायत करने की बात कहने लगे, तो इन पर ही डयूटी न करने का आरोप लगाकर आरोपपत्र जारी कर अम्बिकापुर पेशी करवा दिया गया। कार्य पर पुनः पदस्त के लिए डाक विभाग के ओवर सियर मोहन विश्वास द्वारा कार्य पर लगवा दूंगा कहकर 10,000 रुपये की घुस मांगी गई, पैसा ना देने पर इनके ओवर सियर मोहन विश्वास, बी.पी.एम. मकरध्वज पटेल, उपनिरीक्षक सी. एल. पटेल द्वारा मिली भगत कर इनको आज तक पदस्त नही किया जा रहा है। इस बार की जानकारी जब इन्होंने अपने डाकसंभाग के अधीक्षक श्री पण्डा को दी पर उनकी अचानक मृत्यु होने के कारण इनकी फ़ाइल वही रुक गयी और आज तक कोई फैसला नही आ पाया। 1 जून 2015 से आज तक इनको वेतन नही मिलने के कारण बच्चों की पढ़ाई लिखाई से लेकर पारिवारिक जीवन मे परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मामले को गंभीरता से लेते हुए स्थानीय प्रशासन को मामले की जांच पड़ताल कर उचित कार्यवाही करते हुए इन्हें पुनः पदस्त किया जाना चाहिए ताकि इनके पारिवारिक जीवन का भरण-पोषण हो सके।

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