Saturday, December 7, 2019
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एक तेरे हक की बात है कि……तुम मतलबी हो गए!! ….ऐसा क्यों कहा जा पढें पूरी …..ऐसी बात है

बदलते दौर में अब बहोत कुछ बदल गया है आबो हवा से लेकर वो हंसी ठिठोली भी गुम होते जा रहे है आज भी भाग दौड़ के दौर हरियाली गुम होते जा रही है हर कोई अपने मतलब से गुजर रहा है। यानि अब दुनिया भी बहोत मतलबी हो गई है कवि ने इशारों ही इशारों में तमाम उन बातों को पंक्तिबद्ध किया है कवि की इस कविता में कई बातों का गहरा राज नजर आता है। इस कविता के लेखक है मुनादी डॉट कॉम से जुड़े हुए है। पढिये इनकी कविता को जिसे आप जिस अंदाज में समझना चाहे समझ सकते हैं।

एक तेरे हक की बात है कि,
मोहब्बत की पैठ पर तुम मस्कुराते बहुत हो।
रही बात आशिकी की तो समझ लो,
अब दुनिया कहती है कि तुम मतलबी हो गए।।।

कभी इबादतों में गुजर गया जो दौर,
उस दौर के साखों पर पत्ते खिलखिलाते बहुत हैं।
मगर उन खिलखिलाहट का करें क्या हुजूर,
लोग कहते हैं कि वो साख ही अब मतलबी हो गए।।

जमाने के तंज अपने अपने ही सही,
कसीदों में कुछ नाम तो होगा ही।
लिख टांक कर जो छोड़ दिया हमने,
वो स्याही ही अब सूखते ही कहते हैं कि हम तो अब उस महजबीं के हो गए।।

न दौर गुजरा न रंज अपना,
मगर नामो के आगे मुकर्रर कुछ और ही था।
अब जानो उन नामो की हैसियत क्या रही,
नामो की शख़्शियत ही अब तो मतलबी हो गए।।।

                                

लेखक

“गौरव सिन्हा” मुनादी डॉट कॉम

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