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इस वजह से मरवाही सीट काँग्रेस के लिए बन गयी है!पर्चा के बाद यहाँ शुरु हुई ये चर्चा ! लेकिन फिर भी काँग्रेस का.……पढिये पूरी रिपोर्ट

मरवाही मुनादी विशेष

अतुल त्रिपाठी

मरवाही में अजित जोगी के निधन के बाद मरवाही विधानसभा सीट ख़ाली हुई है जहां आज उपचुनाव है जहां कांग्रेस और भाजपा के बीच मुकाबला है सत्तासीन होने के कारण इस सीट में होने वाले उपचुनाव में कांग्रेस की साख दाँव पर है और चुनाव भी रोचक है …… वजह है यह सीट पिछले 20 सालों से जोगी परिवार के खाते में ही रही है पूर्व मुख्यमंत्री अजित जोगी के निधन के बाद एक बार फ़िर लोग ये मान रहे थे कि इस बार के उपचुनाव में भी मरवाही सीट जोगी कांग्रेस को ही मिलेगी वजह यह मानी जा रही थी कि जोगी जी के निधन के बाद होने वाले उपचुनाव में सहानुभूति के दम पर बहुत कम मतों से पर जीत जोगी कांग्रेस की ही होगी लेकिन जोगी परिवार की जाति के मुद्दे ने आड़े आकर होने वाले चुनावी समर को बिगाड़ कर रख दिया ।
हुआ ऐसा कि जाति मामले में फंसे जोगी परिवार से कोई भी चुनाव लड़ने के काबिल नहीं रहा और तीसरा जोगी काँग्रेस के प्रत्याशी का नामांकन ही, ‘बी’ फॉर्म नहीं मिलने के कारण रद्द हो गय इस वजह से जोगी कांग्रेस चुनाव मैदान से बाहर हो गया । तो मरवाही की त्रिकोणी जंग अब सीधे कांग्रेस और बीजेपी की हो गई । क्योंकि त्रिकोणीय जंग इसलिए हो गया है क्योंकि अमित जोगी ने अपने 2 विधायकों के समर्थन से भाजपा को समर्थन का एलान कर दिया है जिससे मुकाबला रोचक हो गया है चुनाव लड़ने में असफल, जोगी काँग्रेस ने बीजेपी के प्रत्याशी को समर्थन देने का मन बना लेने के बाद इससे जोगी काँग्रेस में ही घमासान मचा गया और उनके दो गुट बन गये हैं ।
जोगी कांग्रेस के 5 विधायकों में से बचे 4 विधायकों में धर्मजीत सिंह और डॉ. रेणु जोगी बीजेपी को समर्थन देने और दो विधायक देवव्रत सिंह-प्रमोद शर्मा काँग्रेस का साथ दे रहे हैं । वहीं जोगी कांग्रेस द्वारा बांटे जाने वाले संवेदना पर्चे भी चुनाव में क्या रंग लाएगी यह भी देखने वाली बात होगी जो घर घर बंट रहा है जिससे जोगी कांग्रेस वोट की अपील पर्चे से कर रही है
सोचने वाली बात है कि जोगी कांग्रेस अभी तक के चुनावों में रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज करती आई है तो उनके कम से कम आधे या एक चौथाई मतदाता तो आज भी उनको समर्थन दे सकते हैं ? यह सवाल जन्मा हुआ है दूसरी ओर बीजेपी का भी कुछ वोट बैंक मरवाही में है ही ।
पूर्व कांग्रेसी विधायक रामदयाल उइके, काँग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए हैं जो वहां से भी चुनाव लड़ चुके हैं जिनके साथ पूरा बीजेपी अमला मरवाही में ताल ठोक रहा है । मतलब साफ इसका चुनाव में कुछ असर तो पड़ेगा ही ?
अब चुनौती काँग्रेस को ज़्यादा दिखाई देने लगी है ये अलग बात है कि जानकारी अनुसार अमित जोगी के व्यवहार से मरवाही की जनता असन्तुष्ट है जिसका फायदा सत्तासीन कांग्रेस को मिलते दिखाई पड़ रहा है । वहीं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के साथ पूरा मंत्रिमंडल, विधायक,, सांसद प्रदेश पदाधिकारी संगठन मिल कर दिनरात एक किये हुए हैं । फिर सत्तारूढ़ पार्टी का भी असर कितना मतदाताओं पर पड़ता है ये देखने वाली बात है ।
बहरहाल अभी तो यह लग ही रहा है कि यह सीट कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधी टक्कर है जिसमें जोगी कांग्रेस भाजपा को समर्थन दे रही है बावजूद कांग्रेस की स्तिथि मजबूत है पर अंतिम परिणाम दस नवंबर को ही पता चलेगा जो देखने वाली बात होगी

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