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Munaadi Breaking:-सिमट रहा है ‘बांकी गजदल’ का ‘कुनबा’ ? इस दल के एक हाथी ने खुद को कर लिया ‘आइसोलेट’, कहीं संभावना इसकी तो नहीं…?

सूरजपुर मुनादी ब्यूरो।।

प्रतापपुर-राजपुर क्षेत्र में भ्रमण करने वाला “बांकी हाथीदल” का ‘कुनबा’ अब सिमट रहा है ? कुछ दिन पहले ही इस दल की तीन हथिनी की मौत सूरजपुर व बलरामपुर वनमंडल में हुई थी, जबकि करंजवार में मृत मिले एक अन्य हाथी के शव को इस दल के होने की संभावना से जोड़कर देखा जा रहा है, अभी यह दल घुई रेंज में पहुंच चुका है। इसी दल का एक और हाथी खुद को दल से ‘आइसोलेट’ करते हुए अकेले ही धरमपुर सर्किल में विचरण कर रहा है, इसके पीछे कारण तो स्पष्ट नहीं है, लेकिन सीएफ वाईल्डलाईफ ने इसे हाथियों का सामान्य व्यवहार बताया है, जबकि दूसरी ओर वाईल्डलाईफ के कई अन्य जानकर इसके पीछे इसके बीमार होने अथवा अन्य कोई दुर्घटना से जोड़कर देख रहे है।

वनमंडल बलरामपुर से सूरजपुर के मध्य विचरण करने वाला बांकी गजदल में हाथियों की संख्या हाल ही में हुई हाथियों के मौत के बाद भी ज्यादा कम नजर आ रही है। मिली जानकारी के अनुसार इस दल में कुछ माह पूर्व तक नर,मादा व बच्चों की संख्या मिलाकर लगभग 17 से 18 हाथियों की होती थी। इस दल में 6 जून से लेकर 11 जून के मध्य यदि 3 हथिनी की मौत को गिना जाए और एक हाथी दल से अलग होकर विचरण भी कर रहा हो तो इसकी मौजूदा संख्या 13-14 के बीच होनी चाहिए थी ? सूत्रों से ही मिली जानकारी के अनुसार वर्तमान में इस दल में नर हाथी 3, हथिनी 2 व बच्चे 6 कुल यह संख्या 11 बताई जाती है। इन आंकड़ों के अनुसार अभी भी 2-3 हाथी की संख्या कम होने की संभावना दिख रही है। इस बीच करंजवार में मृत मिले एक अन्य हाथी के शव को भी बांकी दल के सदस्य के संभावना के तौर पर भी देखा जा रहा है ? इस संबंध में वाईल्डलाईफ सीएफ एसएस कंवर से चर्चा होने पर उन्होनें बताया कि अभी बांकी दल में 12-13 हाथी की सूचना मिल रही है। उन्होंने कहा कि दल के हाथी सदस्य प्रायः दल से अलग होकर छोटे-छोटे दल में विचरण करते है, जिसके कारण बांकी दल की संख्या का सही आंकलन कर पाना मुश्किल है। उन्होनें यह भी बताया की करंजवार में जिस जगह पर हाथी का शव मिला है, वहां पर अन्य कई दल के हाथी विचरण करते हुए पहुंचते है। ऐसे में इसके बारे में कुछ भी कह पाना संभव नहीं है। इसके लिए विभाग जांच में लगा हुआ है।

बांकी दल में हाथियों की संख्या कम होने के साथ इस दल से अलग होकर खुद को ‘आइसोलेट’ करने वाले हाथी को लेकर भी विभाग इसपर निगरानी बनाये हुए है। विभाग इस हाथी के नर होने का दावा करता है, लेकिन इसके दांत नहीं है। ऐसे में विभाग इसे ‘मकना’ बता रहा है। विभाग यह भी दावा कर रहा है कि यह हाथी बांकी दल के अन्य हाथी के साथ में ही विचरण करता था। जब बांकी दल यहां से राजपुर की ओर जा रहा था, उसी दौरान यह हाथी दल से अलग होकर प्रतापपुर रेंज के कक्ष क्रमांक 42 व 43 में ही रह गया था। बाद में दल के गोपालपुर अतौरी क्षेत्र से वापस प्रतापपुर रेंज में आने के बाद यह हाथी गणेशपुर, टुकुडांड़ क्षेत्र मे इस दल से मिल गया था। इसी दौरान इस क्षेत्र में दो व राजपुर में एक हथिनी की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद यह दल घुई क्षेत्र की ओर रवाना हो गया, लेकिन यह हाथी धरमपुर सर्किल में ही रह गया है। सीएफ वाईल्डलाईफ एसएस कंवर ने इसे हाथियों का सामान्य व्यवहार बताया है। इधर वन्यप्राणी के जानकार बताते है कि हाथी का दल से अलग होकर इस प्रकार रहना सामान्य नहीं है। यह हाथी पहले से काफी आक्रामक व्यवहार कर रहा है। ऐसे में ऐसा अनुमान है कि या तो यह हाथी बीमार है क्योंकि कई मर्तबा हाथी बीमार की स्थिति में स्वयं को दल से ‘आइसोलेट’ कर लेते है, या फिर यह किसी घटना से विचलित है। फिलहाल अभी इसकी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

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