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आईपीएस GP सिंह पर अब ED में मामला दर्ज, आय से अधिक संपत्ति के मामले में नोटिस जारी, छापे में हुआ था अवैध संपत्ति का खुलासा, पढ़िये पूरी खबर

रायपुर मुनादी।। प्रवर्तन निदेशालय ने आईपीएस अफसर और छत्तीसगढ़ पुलिस के निलंबित एडीजीपी गुरजिंदर पाल सिंह के खिलाफ पीएमएलए एक्ट 2002 के तहत आय से अधिक संपत्ति मामले में केस दर्ज किया है। उल्लेखनीय है कि निलंबित एडीजीपी को निदेशालय ने इस बाबत पहले नोटिस भी जारी किया।

बता दे कि सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद आईपीएस अधिकारी सिंह 1 सितंबर को ईओडब्ल्यू की पूछताछ के लिए जारी नोटिस के बाद उनके सवालों के जवाब देने के लिए अपने अधिवक्ता के साथ खुद हाजिर हुए थे।

इससे पहले निलंबित आईपीएस जीपी सिंह को सुप्रीम कोर्ट ने 26 अगस्त को राहत देते हुए गिरफ्तारी पर रोक लगाने का आदेश दिया था। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने जीपी सिंह को जांच में सहयोग करने का निर्देश भी दिया था।

राजद्रोह के आरोप के बाद पुलिस ने जीपी सिंह को थाने में आने के लिए दो बार नोटिस जारी किया गया था लेकिन वो नहीं पहुंचे जिसके बाद पुलिस ने सिंह को फरार घोषित करने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

पुलिस ने देशद्रोह का मामला दर्ज करने के एक दिन बाद निलंबित एडीजीपी सिंह ने उच्च न्यायालय का रुख करते हुए प्रदेश सरकार द्वारा ‘पक्षपातपूर्ण कार्रवाई’ पर अंतरिम राहत और इस मामले की सीबीआई जांच की भी मांग की थी।

छत्तीसगढ़ पुलिस ने निलंबित एडीजीपी सिंह के खिलाफ राजद्रोह का केस दर्ज किया था। एसीबी के छापे के दौरान एडीजी के सरकारी बंगले से कुछ चिट्ठियां और पेन ड्राइव मिली थीं। उनकी जांच के बाद सिटी कोतवाली में राजद्रोह की धारा 124 और धारा 153 में एफआईआर दर्ज की थी। राज्य में राजद्रोह का यह पहला मामला बताया जा रहा है।

पुलिस के अनुसार छापेमारी के दौरान जो चिट्ठियां और दस्तावेज मिले हैं, उनमें ऐसी बातें लिखी थी जो सरकार के खिलाफ साजिश की तरफ सीधा इशारा करती हैं। पत्र के अलावा डायरी के कुछ पन्ने ऐसे थे जिनमें कुछ लोगों को लेकर गंभीर आपत्तिजनक टिप्पणियां थी जिन्हें पुलिस ने माना कि इनसे समाज में वैमनस्यता फैलाने का प्रयास भी किया गया है।

एसीबी ने 1 जुलाई को एडीजी जीपी सिंह के पुलिस लाइन स्थित सरकारी बंगले सहित एक दर्जन से ज्यादा ठिकानों पर छापेमारी की थी। लगभग 64 घंटे तक लगातार चली जांच के दौरान एसीबी की टीम को उनकी 10 करोड़ अनुपातहीन संपत्ति का पता चला था। डायरी के पन्नों और पेन ड्राइव से निकाले गए दस्तावेजों से सरकारी विरोधी गतिविधियों के संकेत मिले थे। एसीबी ने डायरी के पन्ने और पेन ड्राइव से निकाले गए दस्तावेजों का ब्योरा पुलिस को सौंप दिया था फिर पुलिस ने इन्हें साक्ष्य मानते हुए जीपी सिंह के खिलाफ राजद्रोह का केस दर्ज किया था।

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