Friday, May 24, 2019
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क्षेत्र में सफेदपोश कोल माफिया हावी ……..आकाओं पर लग रहा संरक्षण देने का आरोप ………….


घरघोड़ा मुनादी।

घरघोड़ा तहसील कोल माफ़ियाओ के चपेट में
घरघोड़ा तमनार के दर्जनों जगह अवैध कोयला उत्खनन धड़ल्ले से जारी प्रशासन पुलिस का भय नाम का चीज नहीं, तस्कर बेख़ौफ़, कोल डिपो ओर फैक्ट्रियों में खप रहा है अवेध कोयला

रायगढ़ जिले के घरघोड़ा, लैलूंगा, तमनार, धरमजयगढ़ के ग्रामीण वनांचल जैसे इलाके से जमकर अवैध कोयला खनन और परिवहन का कारोबार जमकर फलफूल रहा है। पिछले कुछ दिनों में हुई करवाई से जाहिर होता है कि कांग्रेस सरकार के आते ही पुराने कोल माफिया फिर सक्रिय हो गए हैं। दबाव की वजह से ठोस करवाई भी नही हो पा रही है। इसका सीधा प्रमाण पिछले दिनों घरघोड़ा पुलिस की करवाई के बाद साफ हो गया। सफेद पोश कोल माफियाओ के तार कांग्रेस के बड़े नेताओं से जुड़े हुए हैं। यही वजह की करवाई करते ही आकाओ के द्वारा अधिकारियों के मोबाइल की घण्टी घनघनाने लगती है और अधिकारी एन केन प्रकारेण आधी अधूरी करवाई कर छोड़ने को विवश हो जा रहे हैं।
दरअसल कोल माफिया ग्रामीणों को मजदूरी से ज्यादा मिलने का लोभ दिला कर कोयला निकलवाते हैं। दरअसल पूरा क्षेत्र में

कोयले का भंडार है अधिकांश जगहों पर कुछ ही मिट्टी निकालने के बाद ही कोयला निकलना शुरू हो जाता है इससे आसानी से कोयला उपलब्ध हो जाता है।

घरघोड़ा एसडीएम ने लगातार 2 दिनों में बरौद,उरबा, भालुनारा व अन्य जगहों से 60 से अधिक ट्रेलर कोयला जब्ती की कार्यवाही की गई। खास बात यह भी निकल कर सामने आ रही है जप्त किए गए उन कोयलों को कहा डंप किया जा रहा है कोई जानकारी नही है। सूत्र बताते है कि खनिज माफिया लगातार दबाव बना रहे है जिस कारण एसडीएम दबाव में होने से ठोस करवाई नही हो पा रही है। एसडीएम ही नही कोई भी ठोस करवाई की हिम्मत नही जुटा पा रहा है।
घरघोड़ा पुलिस भी पीआई दरहा से जेसीबी, डम्फर और स्कार्पियो में कोयला सहित जप्त किया था। इसके बाद थाना प्रभारी भी दबाव में आ गए थे करवाई के दूसरे दिन ही उनका स्थांतरण हो गया था। और स्कार्पियो को बिना करवाई के भी छोड़ना पड़ा था।
हाल के दिन में बारौद के पास गांव के बाहर 50 टन से अधिक कोयला खोदकर परिवहन के लिए डम्प कर रखे गए कोयले को जप्त किया था।
इसके बाद भी रात के अंधेरे में लगातार अवैध उत्खनन और परिवहन चल रहा है। दरअसल सब सफेद पोश नेताओ में इशारे पर हो रहा है।

यहां यह भी बताना जरुरी है कि अधिकांश कोयला शासकीय जमीन और फारेस्ट की जमीन पर हो रहा हैं। फारेस्ट की जमीन पर से कोयला के कारोबार का पिछले दिनों हुई करवाई से स्पस्ट भी हो चुका है। बताया जा रहा है कि अधिकारी भी नेताओ के दबाव में कुछ इस तरह हैं कि उनकी हिम्मत नही हो पा रही कि जहां जहां से अवैध उत्खनन की खबर है या जहां जहां अवैध उत्खनन हो रहा है वहा खनिज, राजस्व, पुलिस और वन विभाग की एक संयुक्त टीम लगातार करवाई कर सफेद पोश कोल माफियाओ की कमर तोड़ सके लेकिन ऐसा हो नही सकता। बीति रात भी एक टीम द्वारा जेसीबी व अन्य वाहन कोयला निकालते धर दबोचा लेकिन इसका खुलासा होने पहले ही कोल माफ़ियाओ द्वारा अपने आकाओं से सेटिंग करा दी।


जैसे ही प्रदेश में कांग्रेस की सरकार आई वैसे ही क्षेत्र में पुराने कोल माफिया फिर से सक्रिय हो गए हैं और इसमें कांग्रेस के बड़े नेताओं का भी खूब सहयोग मिल रहा है। यह सब पिछले दिनों काले कारोबार पर हाथ डालने का अंजाम क्या हुवा और वह सबके सामने है। ऐसे में यह चर्चा भी खूब है कि कांग्रेस की सरकार आते ही सफेद दामन काले होने लगे हैं और इन पर किसी का जोर नहीं है।
ऐसे में एक सवाल यह भी है कि कांग्रेस के बड़े नेता इस आरोप से अपना दामन कैसे बचाते हैं। क्या यह आरोप लगने से कांग्रेस के बड़े नेता अधिकारियों को कोयले के अवैध कारोबार करने वालो पर करवाई की पूरी छूट दे पाएगी।

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