Friday, May 24, 2019
Home > Top News > मिलिए इस मिस्टर इंडिया से, अपने छत्तीसगढ़ के, हौसलों से बना लिया………….

मिलिए इस मिस्टर इंडिया से, अपने छत्तीसगढ़ के, हौसलों से बना लिया………….



रायपुर मुनादी ।।

khelkhiladi.in/ से साभार

इंसान हौसले एवं संघर्षो के बिना कुछ भी नहीं है , हौसला एक बीज को वो ताकत देता है जिससे धरती का सीना चीर पेड़ बन सके | ना जाने हौसले एवं संघर्षो पर कितने किताब लिखी गयी होगी ,जिसने भी इन शब्दों को जी लिया वो इतिहास में शामिल हो गया |  जब बात इतिहास से चली है तो हमे एक शेर महशर बदायुनी का याद आता है

कृष्णा साहू भी हौसले एवं संघर्षो की जीती जागती मिसाल है , उन्होंने जो आज हासिल किया है वो किसी किताब की कहानी जैसा है | इनके नाम 1बार Mr. India (1989-90), 8 बार Mr.MP (1988 से 1998) और 7 बार Mr. Chhattisgarh (1987 से 1995) का रिकॉर्ड है |

बॉडीबिल्डिंग के अलवा पॉवरलिफ्टिंग में इनके नाम पदक है , वर्तमान में कृष्णा साहू बी .एस. पी (B.S.P) में  कार्यरत है, यहाँ ये बॉडीबिल्डिंग एवं पोवेर्लिफ्टिंग के कोच है इसके साथ ही स्पोर्ट्स कोऑर्डिनेटर जैसी पदों से भी जुड़े हुए है |

वर्ष 2002 में इन्हें छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से खेलो के सबसे बड़े सम्मान गुण्डाधूर अवार्ड्स से भी नवाज़ा गया | आइये जनाते है कृष्णा साहू की जीवन की कहानी, उनके संघर्ष के दिनों के बारे में |

संघर्षो भरा बचपन

कृष्णा साहू बेहद जिंदादिल और हसमुख इंसान है , लेकिन अपने बचपन के बारे में बताते हुए उनकी आँखे भर जाती है |

वे कहते है – मै अपनी माँ के साथ रायपुर के रेलवे कॉलोनी में रहता था | मेरी माँ ने ही मुझे पाला क्यूंकि हमारे पिता हमारे साथ नहीं रहते है उन्होंने हमे छोड़ दिया था , लेकिन मेरी माँ ने कभी हिम्मत नहीं हारी उसने मुझे पालने के लिए बहुँत मेहनत की | उसका हर वक्त मेरे लिए होता ,क्यूंकि जैसे मौहाल में हम रहते थे किसी भी बच्चे का गलत रास्तो में भटक जाना आसन बात थी |

मुझे आज भी वो दिन याद है जब हमे रेलवे के उस छोटे से घर से निकालने के लिए टीम आती थी | उस दौरान मेरी माँ उसने लडती ,मिन्नतें करती थी |एक बच्चे के लिए ये समझ पाना मुस्किल था लेकिन मैंने मेरी माँ से जो चीज़ सीखी है वो है कभी ना हार मानने का जज्बा |

मुझे बच्चपन से ही खेलो में रूचि थी, इसलिए स्कूल में होने वाले हर खेल में मैं हिस्सा ले लिया करता था | इस दौरान मैडल भी मिल जाया करते थे , इने सभी चीजों ने मुझे खेलो से काफ़ी हद तक जोड़ दिया था |

स्कूल में अक्सर टीचर्स मेरा नाम होने वाले आयोजनों में लिख दिया करते थे,उन्होंने शायद मेरे अंदर खेलो के प्रति प्रेम को देख लिया था और जानते थे की एक दिन मै कुछ बड़ा करूँगा ,इस तरह कक्षा दर कक्षा जूनून बढता गया |

मेरी सफलता के कई हीरो है

एक दिन बजरंग व्यायाम शाळा के एक सीनियर स्टूडेंट ने उन्हें पूछा की क्या तुम व्यायाम शाळा ज्वाइन करना चाहते हो | मेरे लिए ये कोई चमत्कार से कम नहीं था , मैंने तुरंत हाँ कर दी| उन्होंने हमे  व्यायाम शाळा बुलाया और हमे शुरूआती तोर पर शाळा को सुचारू बनाये रखने की जिम्मेदारी दी |कृष्णा साहू कहते है की आपके और हमारे जनरेशन में बड़ा फर्क है लेकिन किसी भी समय में अनुशासन बेहद जरुरी चीज़ है और व्यायाम शाळा में हमने यही सीखा | धीर धीर हम बाकि स्टूडेंट्स की तरह एक्सरसाइज करने लगे |

उस दौरन उनकी मुलाकात व्यायाम शाळा के कुछ सीनियर विजय हिन्दुस्तानी, ठाकुर जी ,एवन कुमार जैन सी हुई | विजय हिन्दुस्तानी को कृष्णा साहू अपना बड़ा भाई,पिता और आदर्श मानते है |

विजय भैया ने मेरी मदद तो की ही मेरे जैसे काफ़ी लोगो की मदद की ,जीवन के हार मोड़ पर वो मेरे लिए खड़े रहे | मै इसलिए कहता हूँ की मेरी सफलता के पीछे कोई एक व्यक्ति नहीं है काफ़ी सारे लोगो का साथ रहा है |इसके साथ ही माननीय श्री भूपेश बघेल जी (जब वे मंत्री नही थे और अब मुख्यमंत्री है) जिन्होंने वर्ष 1995 से अब तक अनेको बार विश्व प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए सहयोग करते रहे हैं ,

खेल विभाग, छत्तीसगढ़-शासन, खेल विभाग-भिलाई इस्पात संयंत्र, तथा रायपुर व भिलाई में मेरे अनेको सीनियर्स, मित्र व साथियो ने सपोर्ट किया है ।


कृष्णा साहू छत्तीसगढ़ के पहले खिलाड़ी है जो 11 वर्षो तक लगातार भारतीय टीम में रहे और भारत के लिए समर्पित रहे |


विजय हिन्दुस्तानी और उनका जूनून

कृष्णा साहू विजय हिन्दुस्तानी के बारे में बताते हुए कहते है – विजय भैया का मेरे जीवन पर बहुत गहरा असर रहा | वो सभी खेलो के प्रति जुनूनी थे, भैया कोई बहुत पैसे वाले नहीं थे लेकिन किसी की मदद करने से पीछे नहीं हटते थे |वे खुद पंजाकुश्ती के राष्ट्रीय खिलाड़ी भी रहे है |

उनके बारे में एक रोचक बात ये है की – उन्होंने भारत में हो रहे 1982 एशियाड को देखने के लिए रायपुर से दिल्ली तक का सफ़र बिना ब्रेक के साइकिल से पूरा किया था |

बॉडीबिल्डिंग  एवं पॉवरलिफ्टिंग साथ साथ

व्यायाम शाळा में कसरत करना और स्कूल जाना साथ साथ चलता रहा | कुछ महीनो की ट्रेनिंग करते हुए इन्होने ने अपनी बॉडी अच्छी कर ली थी इसी समय रायपुर में हो रहे छोटे छोटे बॉडीबिल्डिंग के टूर्नामेंट में वे जाने लगे | 1985 में उन्हें एक बॉडीबिल्डिंग के टूर्नामेंट सफलता हाथ लगी इससे उनका जोश और बढ़ने लगा|

इसके बाद बॉडीबिल्डिंग एवं पॉवरलिफ्टिंग में साथ साथ खेलना शुरू किया , लेकिन खेलो में बने रहने के लिए किसी भी खिलाडी को पैसे की जरुरत होती है | कृष्णा साहू भी इससे अछूते नहीं थे उन्हें पता था की अगर उन्होंने पैसे कामने शुरू नहीं किया तो वे बहुत आगे तक अपने खेल को सपोर्ट नहीं कर पायंगे |

इसी दौरन उन्हें कही से पता चला की भिलाई में स्टील प्लांट में खिलाडियों के लिए कुछ भर्तिया हो रही है | वे तुरंत विजय हिन्दुस्तानी भैया के साथ भिलाई के आ गए और इसके लिए आवेदन किया |

इसके बाद वे स्टील प्लांट में नौकरी की अपनी प्रक्रिया में लगे रहे , वे कहते है की उन दिनों ये पता कर पाना मुश्किल होता था की प्रक्रिया कहा तक पहुंची उस दौर में ना तो मोबाइल फ़ोन होते थे और ना कोई दूसरा साधन | समय बीत रहा था तो मैंने तय किया खेलो में ध्यान जारी रख्नेंगे और साथ में कोई छोटी मोटी नौकरी करते रहेंगे |

कृष्णा साहू मुस्कुराते हुए कहते है की मैंने हर तरह की जगह पर काम किया जहाँ भी मुझे काम मिल जाता , होटल से लेकर किराना दुकान तक में | क्यूंकि मै एक खिलाडी था तो डाइट बहुत जरुरी चीज़ थी सो मैंने ऐसे दुकानों में काम किया जहाँ मुझे खाने को भी मिल जाए |

फिर मैंने और मेरे कुछ साथियों ने साथ में FCIरायपुर में गार्ड की नौकरी कर ली| लेकिन चोट की वजह से एक साल पॉवरलिफ्टिंग को छोड़ना पड़ा पर बॉडीबिल्डिंग जारी रही |

इसी दौरन भिलाई स्टील प्लांट द्वारा आयोजित बॉडीबिल्डिंग प्रतियोगिता आयरनगेम में हिस्सा लेते हुए अपने केटेगरी में पहला स्थान बनाया | एकमात्र भारतीय, बर्मिघम इग्लैंड 1992 में तोड़ा गया रिकार्ड अभी तक किसी ने नही तोड़ पाया

कृष्णा साहू कहते है की मैंने अपने पुरे जीवन में कभी डोप नहीं किया क्यूंकि जूनून ही मेरा डोप था और आज भी मैं सबसे यही कहता हूँ की नेचुरल डाइट बेस्ट है |

पुरे 7 से 8 महीनो के बाद फिर वो खुशखबरी वाला वक्त आया 14 दिसम्बर 1987 जब स्टील प्लांट की नौकरी उन्हें मिली | ये नौकरी इनके लिए काफ़ी मान्ये रखती थी मानो परिंदे को पंख मिल गए हो |

वर्ष 1987 में नौकरी लगवाने वाले स्वर्गीय श्री जीपी शर्मा जी (पूर्व महासचिव, इंटुक बीएसपी, भिलाई) का आभार मानता हूँ, जिनके कारण मेरी दुनिया ही बदल गई


स्टील प्लांट की नौकरी के बाद कृष्णा साहू ने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा जिस सपोर्ट की तलाश उन्हें काफ़ी समय से थी वो पूरी हो गयी | वे अपने खेल में ऐसे रम गए की दिन और रात का होश ही नहीं रहता था |

वर्ष 1987 से 1989 के बीच इन्होने राष्ट्रीय और राज्य के सभी टूर्नामेंट में हिस्सा लिया और काफ़ी पदक भी जीते | लेकिन वर्ष 1989 कुछ खास था कृष्णा साहू ने इस वर्ष Mr.India का ख़िताब अपने नाम किया | खिलाड़ी के रूप मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ व भारत प्रतिनिधित्व करते हुए 15 बार विश्व प्रतियोगिता भाग लिया जिसमे 6 बार पदक जीतने का सौभाग्य मिला |
ऑस्ट्रेलिया से पहलीबार रजत पदक जीतकर लौटने पर रायपुर में स्वागत 1990

इसके बाद 1990 में Strongest man of India का ख़िताब भी इनके नाम है एवं 8 बार Mr.MP (1988 से 1998) और 7 बार Mr. Chhattisgarh (1987 से 1995) का रिकॉर्ड है |

कृष्णा साहू ने 1990 से 2002 तक देश विदेशो में पावर लिफ्टर के तौर पर पदक जीते |

विश्व प्रतियोगिता 12 बार कोच व निर्णायक के रूप प्रतिनिधित्व किया।

वैसे तो कृष्णा साहू का जीवन उपलब्धियों से भरा हुआ है लेकिन किसी भी खिलाडी का सपना होता है की उसे अपने राज्य और देश के सर्वोतम सम्मान से नवाज़ा जाये |

मध्यप्रदेश सरकार व छत्तीसगढ़ सरकार ने खिलाड़ी के रूप में दो सर्वोच्च खेल पुरस्कार वर्ष 1992 बतोर खिलाडी मध्य प्रदेश सरकार की ओर से विकर्म अवार्ड्स और 2002 में भी बतोर खिलाडी छत्तीसगढ़ सरकार ने इन्हें गुंडाधुर अवार्ड्स के लिए चुना | एवं वर्ष 2016 को बतोर रेफ़री इन्हें वीर हनुमान सिंह अवार्ड मिला |

सफलता का श्रेय

अपने जीवन में कृष्णा साहू ने जो कुछ भी पाया उसका श्रेय वो अपने परिजनों एवं मित्रो को देते है , उनकी माता स्वर्गीय धनमती साहू जी और उनकी धर्मपत्नी जानकी साहू का विशेष योगदान रहा है।

युवाओं को सीख

कृष्णा साहू कहते है आप जो भी करते है उसे 100% मन से करे सफलता उन्हें ही मिलती है जो हारते नहीं है |इसके साथ वे कहते है की आप खुद की तुलना किसी ओर के साथ ना करे , जीवन में अगर आगे बढ़ना है तो अपना बेस्ट दीजिये और बाकि उपर वाले पर भरोसा रखिये|

कृष्णा साहू वर्तमान में बी .एस. पी (B.S.P) में  कार्यरत है और बॉडीबिल्डिंग एवं पॉवरलिफ्टिंगके कोच है | इसके साथ ही स्पोर्ट्स एसोसिएशन में निरंतर जुड़े हुए है |


http://www.khelkhiladi.in/

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *