Thursday, October 1, 2020
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हमारा गर्व:आज के जागरूक व संवेदनशील युवा


एक विचार

‘आजकल के बच्चे संवेदनाशून्य हो गए हैं’-
ये बात कई लोगों से सुनी है मैंने। व्यक्तिगत तौर पर मैं इससे सहमत नहीं हूँ, ना ही कभी थी।
बात लगभग दो साल पहले की है । मेरे सामने दो घटनाएँ ऐसी हुईं, जिन्हें देखकर मेरा विश्वास और भी दृढ़ हो गया।

मैं बाज़ार से लौट रही थी । शाम हो चुकी थी , करीबन 6.30 का वक़्त रहा होगा। सड़क पर एक जगह भीड़ देखकर आभास हुआ कि शायद कोई दुर्घटना हुई है । पास जाकर देखने पर पता चला कि एक गर्भवती गाय की सुरक्षा करते हुए कुछ युवक खड़े थे,सड़क पर तेज़ी से आती जाती गाड़ियों से गौ माता की रक्षा करते युवक। शायद गाय का प्रसवकाल नज़दीक था। पूरे दिल से गौ माता की सेवा करते उन युवकों को देखकर सुकून का अहसास हुआ । काफी लोग थे, मेरी वहॉं ज़रूरत नहीं थी । मैं आगे बढ़ गई ।थोड़ी दूर आगे बढ़ी ही थी कि एक जोरदार आवाज़ आई।आवाज़ सुनते ही समझ आ गया कि कोई गाड़ी कहीं टकराई है । थोड़ी-ही दूर पर एक चौराहे पर सिटी बस की चपेट में आए एक बुजुर्ग की मदद को कुछ नौजवान हाथ आगे बढ़े, वो भी चंद सेकंड में ही। आमतौर पर देखा जाता है कि ऐसे वक्त में दोषारोपण तुरंत शुरू हो जाता है । पर उन युवकों में से एक ने तुरंत उस बुज़ुर्ग का स्कूटर ठीक से खड़ा करके सड़क के एक किनारे खड़ा कर दिया तो दूसरे ने उन्हें सहारा देकर उठाया । ईश्वर का शुक्र था कि उन्हें मामूली-सी ही चोटें आई थीं। मैं उनके पास पहुँचती इसके पहले ही वे खुद को संभालते हुए और ये कहते हुए आगे बढ़ गए थे कि गलती मेरी ही थी बेटा, मैंने अचानक गाड़ी मोड़ दी । उन्होंने उन युवकों को धन्यवाद दिया और चले गए ।

दोनों घटनाएँ कुछ ही समय के अंतराल में हुईं। दोनों घटनाओं में कुछ समानताएँ दिखीं। घटनास्थल पर कई लोग मौजूद थे , पर मदद के लिए उठे हाथ नवयुवकों के थे। बाकी लोग तो जैसे मूक दर्शक बने घटनाओं का जायज़ा ले रहे थे, बातें कर रहे थे । ये कहने में मुझे संकोच भी नहीं हो रहा कि कुछ लोग इन दृश्यों को तस्वीरों में कैद करने में मग्न थे । शायद उनके लिए किसी की मदद करने से ज्यादा जरूरी उन लम्हों को तस्वीरों में कैद करना था । इसमें बच्चे भी शामिल थे और अधेड़ उम्र के लोग भी।

इन दोनों घटनाओं में मदद के लिए बढ़े हाथ चंद युवाओं के ही तो थे । और कौन मदद के लिए आगे आया ? ऐसे कई उदाहरण नज़र दौड़ाने पर आसपास ही देखने को मिल जाएँगे । फिर क्यों लोग कहते हैं कि आज की युवा पीढ़ी संवेदना शून्य होती जा रही है ? मुझे तो ऐसा कदापि नहीं लगता । आपका क्या विचार है ?

  • आभा बघेल

  • रायपुर, छत्तीसगढ़

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