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‘एक-एक दाना तो दूर, बारदाना के लिए तरस रहे किसान’…..अब ये बहाना बनाकर सरकार ने धान खरीदने से किया ……….पढ़ें पूरी खबर

रायगढ़ मुनादी।।धान बेचने को लेकर प्रदेश के किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। सरकार ने धान खरीदी का डेड लाइन 31 जनवरी तक दिया है, लेकिन बारदाना न होने के कारण किसान अपना धान नहीं बेच पा रहे हैं। हालात यह है कि बाजार से भी बारदाना गायब है। जैसे-जैसे धान बेचने का दिन नजदीक आ रहा है, किसानों की बेचैनी बढ़ रही है। उधर, इस मामले पर राजनीति भी शुरू है। बारदाना की कमी के लिए राज्य सरकार केंद्र को जिम्मेदार बता रही है और केंद्र की भाजपा राज्य सरकार को।

इस साल किसानों को जितना परेशान होना पड़ रहा है, इससे पहले शायद ही कभी वे इस तरह परेशान हुए हों। पूरे प्रदेश की हालात यही है। किसानों की समस्या से जनप्रतिनिधियों को भी अब ज्यादा सरोकार नहीं रहा है। खरीदी के लिए महज कुछ ही दिन शेष रह गए हैं। अबतक हज़ारों किसान हैं जो अबतक धान नहीं बेच सके हैं। समिति प्रबंधक किसानों से बारदाने की मांग कर रहे हैं। बारदानों के अभाव में बिक्री नहींं हो रही है। दूसरी ओर किसान मार्केट से 30 से 35 रुपए में बारदाने खरीद रहे हैं। जबकि मंडियों में इस बारदाने की कीमत सिर्फ 15 रुपये मिल रही है। किसान मंडियों में हैरान परेशान दिखे।

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मंडी में धान बेचने आये किसान टेकलाल नायक ने मुनादी को बताया कि लटपट बारदाने का जुगाड़ हुआ है, अभी भी घर में धान पड़े हैं, जो बारदाने के अभाव में नहीं बिक पा रहे हैं। नकुल साव ने बताया कि हम तो धन बेचने को लेकर बहुत उत्सुक थे और भविष्य के तमाम हिसाब भी लगा लिए थे लेकिन बारदाने की समस्या सामने आ खड़ी हुई। यदि धान नहीं बिका तो कई काम रुक जाएंगे। यही बात हरीश चौहान ने भी बताई। उनका भी यही कहना था कि उन्होंने आने वाले साल भर का एस्टीमेट बना लिया था, अब सरकार बारदाने का बहाना लेकर धान नहीं खरीद रही है, क्या करें।

बारदाना की कमी होने के कारण समिति प्रबंधकों ने भी धान खरीदी करने से हाथ खड़े कर दिए है। बीते तीन सप्ताह से कई केंद्रों में बारदाना की किल्लत चल रही है जिसकी वजह से धान खरीदी बुरी तरह प्रभावित हो रही है। कई केंद्र पर नाममात्र ही खरीदी हो रही है। समितियों के लिए अधिकारी भी बारदानों की व्यवस्था करने में असफल हो रहे हैं। कुल मिलाकर इस साल किसान भारी संकट में हैं। लिहाजा वे सरकार से व्यवस्था में सुधार की फरियाद लगा रहे हैं।

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इस मामले में हालांकि सरकार बार-बार बारदाने का इंतजाम कर लेने का दावा कर रही है लेकिन वास्तविकता यह है कि यह इंतजाम पर्याप्त नहीं है और किसानों की परेशानियां ज्यों का त्यों मुंह बाए खड़ा है। किसान इसके लिए राज्य सरकार से ही उम्मीद लगा रहे हैं। उनका कहना है कि या तो 31 जनवरी तक कि धान खरीदी की समय सीमा बढ़ाई जाय या बारदाने का जल्द इंतजाम किया जाए।

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