Press "Enter" to skip to content

इस बहुचर्चित बड़े घोटाले की छोटी डायरी गुम, जिसमें छुपी थी VIP नामों की गुत्थी, क्या इसी ने “चाउर वाले बाबा” की छिनी गद्दी?…जानिए पूरा मामला

बिलासपुर मुनादी।। छ्त्तीसगढ़ के बड़े घोटाले की छोटी डायरी गुम हो गई है। यह वही लाल डायरी है जो पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के बहुत काम आई थी। इस लाल डायरी में कई VIP लोगों के कथित रूप से नाम लिखे गए थे । अब कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई है कि यह डायरी गुम हो गई है।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस पी सेम कोशी की स्पेशल डिविजन बेंच में शुक्रवार को नान मामले में दायर जनहित याचिकाओं के सुनवाई के दौरान इस बात का खुलासा हुआ। बताया गया कि तत्कालीन भाजपा शासन में इसके लिए एसीबी ने कार्रवाई भी की मगर बड़े लोगों को छोड़ दिया गया। अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने मांग की कि इसकी जांच कोर्ट या SIT की निगरानी में हो।

डायरी में छुपे थे कई राज

बताया जा रहा है कि इस लाल डायरी में नान घोटाले से जुड़े कई सबूत थे, जिसमें कई नाम भी दर्ज थे लेकिन अब वह डायरी ही गायब हो गई है। नान घोटाले के बारे में बताया जाता है कि हजारों करोड़ घोटाले का यह मामला है और सत्ता परिवर्तन के बाद इसपर लगातार कार्रवाई भी हुई, लेकिन अचानक यह महत्वपूर्ण डायरी कैसे गायब हो गई ?

सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानी पीडीएस में इस कथित घोटाले की जाँच 2015 से ही एंटी करप्शन ब्यूरो कर रहा है और उसने कई कर्मचारियों और अधिकारियों के ख़िलाफ़ मुकदमा भी दर्ज कराया है, लेकिन जाँच की रफ्तार बेहद धीमी रही । हाँ, इस मामले में राजनीति खूब हुई और कांग्रेस ने भाजपा की रमन सिंह सरकार के खिलाफ इसे प्रमुख हथियार ज़रूर बनाया था।

यह भी पढ़ें : विप्र फाउंडेशन के कार्यक्रम में शामिल हुए ये पूर्व मंत्री, जानिए किन विषयों पर हुई चर्चा… पढ़िए पूरी खबर

पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री बाकायदा जनसभाओं में इस बात का जिक्र करते थे कि लाल डायरी में लिखा गया CM मैडम कौन है ? यही नहीं सत्ता मिलते ही इसके लिए SIT का गठन भी किया गया लेकिन यह कानूनी दांव पेंच में फंसकर रह गया। बहरहाल अगले शुक्रवार को फिर इसपर बहस की जाएगी।

क्या है “नान घोटाला”

राज्य में करोड़ों रुपये के इस कथित नागरिक आपूर्ति निगम घोटाले को राशन घोटाला या नान घोटाले के रूप में भी जाना जाता है। मार्च 2015 में नागरिक वितरण प्रणाली में भारी गड़बड़ी होने का पता चला था। इस स्कीम के तहत छत्तीसगढ़ सरकार गरीबों को एक रुपये किलो के हिसाब से चावल बांटती है ।

दरअसल, राज्य की आर्थिक अपराध शाखा यानी ईओडब्ल्यू और भ्रष्टाचार निवारक ब्यूरो की टीमों ने फरवरी 2015 में नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के ठिकानों पर छापेमारी कर साढ़े तीन करोड़ रुपये कैश बरामद करने का दावा किया था और मामले से जुड़े कई अहम दस्तावेज जब्त किए थे ।

जरूर पढ़ें : कोरोना वैक्सीन को लेकर कांग्रेस का भाजपा पर तंज, कहा – साय, कौशिक पहले लगवाएं कोरोन का टीका, भाजपा नेताओं …पढ़िए पूरी खबर

छापेमारी में रायपुर के नान मुख्यालय की जांच के दौरान कथित तौर पर एक डायरी मिली । जाँच अधिकारियों का कहना है कि इसमें कमीशन लेने वालों के नाम दर्ज हैं । इस डायरी में एक पूर्व मंत्री सहित रमन सिंह की निवर्तमान सरकार में मंत्री रहे दो व्यक्तियों के नामों का उल्लेख भी है । साथ ही कई अधिकारियों और दो अन्य नेताओं से करोड़ों रुपये के लेन-देन का जिक्र है । डायरी में अधिकतर नाम ‘कोड वर्ड’ में लिखे गए हैं ।

Munaadi Ad Munaadi Ad Munaadi Chhattisgarh Govt Ad

Be First to Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *