Sunday, August 18, 2019
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धरती पर भगवान कहलाने वाले डॉक्टर्स अब सेवा नहीं मेवा के लिए इस प्रोफेसन में आते हैं …..गरीब महिला जिसे है ये गम्भीर बीमारी…तड़पते हुए मरने

कैंसर पीड़ित महिला को डाल दिया अस्पताल के फर्श पर जिला चिकित्सालय में नहीं सुधर रही व्यवस्था स्वास्थ्य मंत्री के संभाग में स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल

कोरिया से अनूप बड़ेरिया की मुनादी।

धरती पर भगवान का दर्जा प्राप्त डॉक्टर्स एक समय मे वाकई सेवा भावी हुवा करते थे और यही वजह है कि इन्हें धरती पर भगवान का दर्जा प्राप्त था लेकिन समय के साथ अब दौर भी बदल गया धरती के भगवान कहलाने वाले डॉक्टर्स अब पूरी तरह प्रोफेशनल हो गए हैं मानवता सेवा भावना अब कही दूर जा चुकी है। यही वजह है कि एक कैंसर पीड़िता गरीब महिला जिसे कम से कम शासन की योजना हो न हो एक डॉक्टर में सेवा भाव का भाव भी नही मिल पा रहा है। ये दर्द उस गरीब बेसहारा महिला का है जो तिल तिल कर मरने को मजबूर है। कई बार स्थानियो लोगो ने इस महिला को अस्पताल पहुंचाया लेकिन डॉक्टर हैं कि दर्द को समझने तैयार नही है।

जिला चिकित्सालय बैकुंठपुर में स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने की बजाय और बिगड़ती जा रही है। यहां के मेडिकल स्टाफ को किसी भी प्रकार का भय नहीं रह गया है। सबसे बड़ी विडंबना तो यह है कि राज्य के कद्दावर स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव के संभाग में ही स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति बदहाल हो गयी है।

जिला चिकित्सालय में डस्टबिन में गिरने से नवजात की मौत , बेड में पड़े मरीज के शरीर में रेंगती चीटियां, 11 माह के मासूम बच्चे की बांह में नस की बजाय स्कीन में निडिल लगाना या फिर कांग्रेसी कार्यकर्ता के बीमार पिता को वीआईपी वार्ड नहीं दे सकते कह कर बैरंग लौटाने की घटना हो। इसके बाद भी आला अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों का कोई भी निर्देश इस जिला चिकित्सालय में मुकम्मल होता नही दिख रहा है।

ताजा प्रकरण में शुक्रवार को वनांचल क्षेत्र जनकपुर के बहरासी के निकट धोबीताल निवासी कैंसर पीड़ित रामबाई को उसके पति सूरजपाल अपने भतीजे के साथ एक बार फिर बैकुंठपुर जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया व भिक्षा मांगने कमाने शहर की ओर निकल गया। उल्लेखनीय है कि दोनों पति पत्नी काफी गरीब है और भीख मांग कर अपना गुजारा करते हैं । लेकिन महिला को बेड न देकर अस्पताल की फर्श पर ही डाल कर उसका इलाज किया जा रहा है। इतना ही नही उसे खाना खिलाने वाला भी कोई नही है, वह लेटे-लेटे ही जैसे-तैसे अपने हाथ से बमुश्किल खा पा रही है। इस सम्बंध में मेडिकल स्टाफ द्वारा किसी प्रकार का उस अकेली महिला के साथ सहयोग नही किया जा रहा है। जब इसकी जानकारी गौ रक्षक अनुराग दुबे और प्रभाकर सिंह को हुई तो वह अपने सहयोगियों के साथ पहुंच कर महिला की सुध ली ।
आपको बता दें कि उक्त कैंसर पीड़ित महिला को एक माह पहले भी उसके पति ने भर्ती कराया था जहां महिला को रायपुर रेफर करने की बजाय उसके घर वापस भेज दिया गया था । गौ सेवक अन्नू दुबे को जब इसकी जानकारी मिली थी तो वह महिला से मिलने उसके घर गया और उसे कपड़े, पैसे इत्यादि का सहयोग भी किया था।
जिला चिकित्सालय के संबंध में लगातार मीडिया में खबरें चलने के बावजूद प्रशासन द्वारा इस संबंध में कोई पहल न करना वाकई काफी चिंतनीय है।

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