Thursday, October 17, 2019
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डीएफओ को हटाने वन कर्मियों का आंदोलन अब सड़क पर, 7 किलोमीटर की पैदल रैली निकाल कर कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

कोरिया से अनूप बड़ेरिया की मुनादी

कोरिया जिले के बैकुंठपुर वन मंडल अधिकारी को हटाने के लिए उनके ही विभाग वन कर्मचारी लामबंद होकर अपने आंदोलन को अब सड़क पर ले आए हैं । 1 जुलाई से चल रहे हड़ताल के बाद अब गुरुवार को कोरिया जिले के अलावा सरगुजा जिले से भी आए वन कर्मचारियों ने इस मुहिम में साथ दिया और प्रेमाबाग से जिला कलेक्टर कार्यालय तक लगभग 7 किलोमीटर पैदल रैली निकालकर डीएफओ को हटाने के लिए कोरिया कलेक्टर को ज्ञापन सौपा।

उल्लेखनीय है कि पदभार ग्रहण करने के साथ ही पत्रकारों को अनपढ़ करार देते हुए इससे सम्बंधित पत्र जिला जनसंपर्क कार्यालय में भेजना, सोनहत रेंज के वाहन चालक को बिना वजह हटाना, अपने खुद के वाहन चालक के साथ अमर्यादित भाषा मे गाली-गलौज (जिसका आडियो भी वायरल हुआ था) कर उसे कार्य से हटाना जैसे सेंस लेस कार्य यह डीएफओ कर चुके हैं।

इतना ही नही वाहन चालकों को हटाने के खिलाफ जब जून माह में छग वन कर्मचारी संघ कोरिया ने एक बैठक आयोजित तो साहब को यह नागवार गुजरा और उन्होंने फिर अफसरशाही या कहे हिटलरशाही दिखाते हुए संघ के जिलाध्यक्ष पवन रूपौलिहा को ही सस्पेंड कर दिया।

डीएफओ की कार्यशैली से परेशान होकर वन कर्मियों ने पहले विरोध प्रदर्शन बांह में काली पट्टी लगाकर कार्य कर किया। इसके बाद अब वन कर्मी 1 जुलाई सोमवार से डीएफओ के खिलाफ मोर्चा खोलकर आर या पार की लड़ाई लड़ने से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए है

रैली के माध्यम से सड़क पर आए आंदोलनकारियों का कहना है कि ऐसे निरंकुश व असंवेदनहीन अधिकारी को तत्काल कोरिया वनमण्डल से पृथक कर कर्मचारियों को भयमुक्त करें और ऐसे तानाशाह अधिकारी को तत्काल प्रभाव से हटाकर मुख्यालय में संलग्न किया जावे। छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ का कहना है की मनीष कश्यप ने तीन चार माह पूर्व से ही कार्यभार संभाला है और तब से ही अधिनस्थ कर्मचारियों को परेशान व प्रताड़ित करना प्रारंभ कर दिया है।

मीटिंग में डीएफओ द्वारा सरे आम कहा जाता है कि सभी कर्मचारियों का भविष्य बर्बाद कर देंगे और ऐसा कर भी रहे है। अनावश्यक प्रताड़ित करने के उद्देश्य से अनेक कर्मचारियों को नोटिस जारी करना, आचार संहिता अवधि में विधि विरूद्ध अनेक कर्मचारियों के स्थानांतरण करना, बार – बार मैदानी कर्मचारियों के मुख्यालय बुला जांच कर परेशान करना, बर्खास्तगी की धमकी देना, दैनिक वेतन भोगी गरीब व्यक्ति कर्मचारी को अकारण ही कार्य से पृथक करना जैसे कृत्यों के साथ ही अधीनस्थों के साथ असंयमित एवं अमर्यादित भाषा का प्रयोग करना इनकी आदत बन गई है।

इस दौरान पवन रुपौलिहा अध्यक्ष , राजवाडे,सचिव संतोष मिश्रा,महेंद्र राम,बलराज पैकरा,शेख अब्दुल्ला,राम खेलावन पटेल,विनय सिंह, सुजीत लहरे,राजेश पैकरा,राजेंद्र सिंह,सुनील कुमार क्षत्रिय,कृपाशंकर सिंह,विनय पैकरा,दीप चन्द्र किस्पोट्टा,रजनीश शुक्ला,नरेंद्र सिंह,मनोज सेन,विजय पाल,शिशुपाल वर्मा,संगीता राजवाडे,गीता फुलसर,श्रद्घा रानी पैकरा, कृष्णकला ,सबीना दास,पवन कुमारी,संगीता,गोमती सिंह,अरविंद सोनी,मनीष दुबे,खेलसाय व शशि जॉन मिन्ज हड़ताल मे उपस्थित रहे।

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