Saturday, September 21, 2019
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न्यायालय ने पूछा-जशपुर में कितने ईंट भट्ठे हैं और इन्हें बन्द करने के लिए अबतक क्या किया?जलसंकट के मानले में जिले के इन अधिकारियों को …जानिए क्या है पूरा मामला


जशपुर मुनादी।।
 अवैध इंट भठ्ठों के संचालन और पर्यावरण पर इसके दुष्प्रभाव सहित पर्यावरण संरक्षण व जल संकट को लेकर समाजिक कार्यकर्ता द्वारा प्रस्तुत याचिका में विशेष न्यायालय ने गंभीरता दिखाई है। मामले में गंभीर न्यायालय के द्वारा सख्ती दिखाते हुए कार्यवाही की स्थिति सहित कई महत्वपूर्ण जानकारी विभागों से मांगी गई। वहीं न्यायालय ने लापरवाही पर भी नाराजगी दिखाई। सामाजिक कार्यकर्ता राम प्रकाश पांडे के द्वारा मानवाधिकार उलंघन को लेकर विशेष न्यायालय मानवाधिकार रजनीश श्रीवास्तव के समक्ष मानवाधिकार अधिनियम धारा 30 के तहत याचिका प्रस्तुत की गई थी। समाजिक कार्यकर्ता श्री पांडे ने ईट भठ्ठों के अवैध संचालन के परिणामस्रूप धुंए व पेड़ों के कटने से पर्यावरण को क्षति पहुंचना बताया था। साथ ही पेयजल संकट को लेकर शासन, प्रशासन की उदासीतना पर भी याचिका प्रस्तुत की गई थी। दोनों मामलों में न्यायालय की गंभीरता और सख्ती देखने को मिली है। मामले में सुनवाई करते हुए विशेष न्यायालय ने संबंधित विभाग से ईंट भठ्ठों पर की गई कार्यवाही को लेकर जानकारी मांगी गई। न्यायालय ने अनावेदकगण से पूछा है कि क्या यह मामला पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा है। न्यायालय ने पूछा है कि कितने ईंट भट्टों का इस प्रकार संचालन हो रहा है और इससे पर्यावरण को किसी प्रकार क्षति पहुंच रही है। न्यायालय ने कहा है कि स्वाभाविक तौर पर इसकी जानकारी अनावेदकगण को ही हो सकती है। यह अधिक उचित होगा कि उक्त नजरिए से मामले को अपने स्तर पर परखें और जिम्मेदारी के  निर्वहन हेतु आवश्यक कदम उठाना आरंभ कर दें। ज्ञापन जारी करते हुए दो प्रश्नों पर न्यायालय के द्वारा जवाब मांगा गया है। न्यायालय का पहला प्रश्न आवेदकेां से यह है कि क्या जशपुर जिले में अवैध ईंट भट्ठे संचालित हो रहे हैं। यदि अवैध ईंट भठ्ठों का संचालन  हो रहा है तो कब से और किन क्षेत्रों में हो रहा है, इनकी संख्या कितनी है।  दूसरे प्रश्न में विशेष न्यायालय ने विभागों से जवाब मांगते हुए पूछा है कि क्या इन भठ्ठों से पर्यावरण को क्षति पहुंच रही है, यदि हां तो इन भठ्ठों को बंद करने हेतु अबतक क्या कार्यवाही की गई। दोनों प्रश्नों का उत्तर यह कहते हुए मांगा गया है कि क्या मामला आपत्ति स्वरूप का है।  शीघ्र और आवश्यक रूप से जवाब प्रस्तुत करने न्यायालय द्वारा आदेश जारी करते हुए अगली सुनवाई की तिथि 25 मई नियत की गई है। मामले में न्यायालय ने यह भी आपत्ति की है कि नोटिस मिलने के बाद भी अनावेदक क्रमांक एक सचिव वन विभाग आौर दो कलेक्टर जशपुर की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ है। ईंट भट्टों के मामले में अनावेदक क्रमांक तीन  डीएपुओ वन विभाग व  चार खनिज अधिकारी न्यायालय में पेश हुए हैं। जल संकट वाले क्षेत्र चिन्हित होंमानवाधिकार से जुटे दूसरी याचिका जल संकट को लेकर है, जिसमें भी विशेष न्यायालय द्वारा कड़ा रूख अपनाया गया है। जशपुर जिले में जल संकट को लेकर प्रस्तुत याचिका में अनावेदक सचिव लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, कलेक्टर जशपुर, कार्यपालन यंत्री पीएचई व मुख्य नगरपालिका अधिकारी जशपुर शामिल हैं। मामले में सचिव की ओर से लोक अभियोजक  व नगरपालिका की ओर से भी अधिवक्ता उपस्थित रहे। जल संकट पर प्रस्तुत याचिका में न्यायालय ने आदेश जारी करते हुए अनावेदकगणें से कहा है कि जिले में प्रभावित क्षेत्रों का चिन्हांकन करें। यह जानकारी संकलित करें, जहां पानी का घेर संकट है। इसके साथ ही जल संकट वाले क्षेत्र में किए जा रहे उपाए की जानकारी प्रस्तुत करने न्यायालय द्वारा आदेशित किया गया। न्यायालय ने आवेदक समाजिक कार्यकर्ता रामप्रकाश पांडे से कहा है कि पानी के संबंध और कोई भी जानकारी या तथ्य हो तो न्यायालय में प्रस्तुत कर सकते हैं। जल संकट और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े इन दोनों मामलों को लेकर जिले में खूब चर्चा हो रही है। उम्मीद की जा रही है थ्क मामले के विशेष न्यायालय में जाने व न्यायालय के द्वारा गंभीरतापूर्वक सुनवाई से इस दिशा में बेहतर कार्य हो सकता है और जल संकट सहित वनों की खराब स्थिति पर सार्थक पहल हो सकता है।

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