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जशपुर में coronavirus को अब ये भी मजाक समझने लगे ….इनके मजाक से कइयों की जान सांसत में ! पढ़िये पूरी रिपोर्ट और जानिए लापरवाह सिस्टम का एक और सच

जशपुर मुनादी।

सरकारी लापरवाहियों की भी हद है, कुछ ऐसी लापरवाहियां जिले के स्वास्थ्यविभाग के द्वारा की जा रही है, जिससे वहां काम कर रहे कर्मियों की जान तो अटकी ही है, संबंधित ग्राम तक में संक्रमण फैलाने का भी खतरा इसमे दिखाई देता है।

दरअसल कल लोदाम के हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर घोलेंग से एक स्वास्थ्यकर्मी कोरोना पॉजिटिव आया था, पर विभाग की लापरवाहियां हद है न ही अब तक इस हेल्थ वेलनेस सेंटर को सील किया गया है, न ही सहकर्मियों को आईशोलेशन में ही भेजा गया है। बल्कि नित्य की तरह ही इस वेलनेस सेंटर का संचालन किया जा रहा है। हम आपको बता दें कि घोलेंग का वेलनेस सेंटर रांची के हाइवे पर स्थित है, जो जिला मुख्यालय के जिला अस्पताल से बमुश्किल ही 9-10 किलोमीटर की दूरी पर है, उधर लोदाम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की दूरी भी इसी रोड में है और लगभग उसकी दूरी 9-10 किलोमीटर ही है।

बताया जाता है कि कल इस हैल्थवेलनेस सेंटर से पाया गया मरीज कोरोना सैंपल लेने के कार्य मे लगाया गया था, उसके साथ ही दो और सहकर्मी भी उसके साथ इस सेंटर में सहयोगी का कार्य कर रहे थे, पर स्वास्थ्य विभाग के द्वारा न तो इस सेंटर को ही सील किया गया है, और न ही सहयोगियों तक को आईशोलेशन के लिए भेजा गया है। फिलहाल विभाग की हठधर्मिता देख गांव वाले अचंभित तो हैं ही वहीं आक्रोशित भी दिखाई दे रहे हैं। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि स्वास्थ्यकर्मी के साथ गांव के 3 लोग एक ही दिन में पॉजिटिव पाये गए हैं, वहीं ग्रामीणों ने यह भी बताया कि पहले स्वास्थ्यकर्मी खुद का टेस्ट किया, जिसमे रिपोर्ट पॉजिटिव आई, उसके पीछे पीछे 12 ग्रामीणों का टेस्ट किया गया जिसमें से 3 पॉजिटिव पाए गए।

वहीं ग्रामीणों के द्वारा यह भी बताया गया कि जो लोग यह जान रहे है कि यहां कर्मी कोरोना पॉजिटिव मिला है वे या तो जिला अस्पताल, या लोदाम के केंद्र की ओर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जा रहे हैं। वहीं ग्रामीणों ने यह भी बताया कि जो लोग अनजाने में यहां कुछ समस्या के लिए चले जा रहे हैं, यह जानकर की यहां कर्मी ही पॉजिटिव पाया गया है मन मे हड़कम्प और दहशत में आ जा रहे है, कि कहीं संक्रमण के चपेट में न आ जाएं। हालांकि एंटीजन टेस्ट में सहयोगी कर्मी और अन्य नेगेटिव पाये गए हैं पर आरटीपीसीआर रिपोर्ट अब तक नही आई है। इन परिस्थितियों में यहां के सहयोगी कर्मियों को आईशोलेशन में भेजना चाहिए, पर बहरहाल इतना ही कहा जा सकता है कि न तो स्वास्थ्य विभाग को अपने कर्मियों के जान कि फिक्र है, और न ही ऐसी लापरवाहियों की परिणीतियो में गांव में फैल सकने वाले संक्रमण का।

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