Sunday, July 21, 2019
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कलेक्टर के जांच के रडार में जशपुर के चर्च भी शामिल? जानकारों ने किया बड़ा खुलासा, पढ़िए पूरी खबर

जशपुर मुनादी ।।

मंगलवार को जशपुर कलेक्टर द्वारा आदिवासियों की जमीन संरक्षित करने दिए गए एक जांच के आदेश के बाद जिले में हड़कम्प मच गया है।वर्षो से आदिवासियों की जमीन पर कुंडली मारकर बैठे पूंजीपतियों से आदिवासियों की जमीन मुक्त कराने के लिए मंगलवार को कलेक्टर ने अपने अधिकारियों को एक निर्देश जारी कर जिले में जनजातीय समुदाय की जमीन को संरक्षित करने शासन द्वारा निर्धारित धारा 170 (ख)के कड़ाई से पालन करने कराने को कहा है । कलेक्टर के इस आदेश के बाद जिले के जनजातीय वर्ग के लिए कार्य कर रहे समाजिक कार्यकर्ताओं की ओर से प्रतिक्रिया आनी शुरू हो गयी है।

जनजातीय सुरक्षा मंच के नेता व अधिवक्ता रामप्रकाश पांडेय ने कलेक्टर के इस आदेश का स्वागत करते हुए कहा है कि जनजातीय समुदाय की जमीन को संरक्षित करने का एकमात्र उपाय है धारा 170 (ख)का कड़ाई से पालन कराना और कलेक्टर ने इसे गम्भीरता से लिया है यह जिले के जनजातीय वर्ग के लिए हर्ष का विषय है। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि इसमें केवल व्यक्ति नही कई संस्थाए भी चपेट में आ सकती हैं जो आदिवासियों की जमीन पर संस्था संचालित कर रहे हैं ।उनका इशारा चर्च की तरफ था ।उन्होंने कहा कि जिले के करीब ढाई सौ चर्च के विरुद्ध 170 ख का मामला पूर्व में चल चुका है और कई मामलों पर बाकायदे सुनवाई भी हुई है लेकिन बाद में धीरे धीरे यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया लेकिन अब जब जिला प्रशासन ने जांच के आदेश जारी किए हैं तो निश्चित ही परिणाम इसके बेहतर आएंगे।

ये है कलेक्टर का आदेश …..पढ़िए पूरी विज्ञप्ति

कलेक्टर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर ने जशपुर जिले में बीते 5 सालों में आदिवासी वर्ग के लोगों द्वारा अपने ही समुदाय के लोगों को बेची गई भूमि की मौके पर जाकर गहन जांच पड़ताल के निर्देश राजस्व अधिकारियों को दिए है। आज यहां कलेक्टोरेट सभा कक्ष में आयोजित समय-सीमा की बैठक में कलेक्टर ने कहा कि जिले में आदिवासियों की भूमि की खरीदी बिक्री के मामले में गड़बड़ी की शिकायतें मिल रही है। आदिवासी किसान की भूमि को आदिवासी के नाम पर ही खरीदे और बेचे जाने के पीछे की वास्तविक स्थिति क्या है, इसकी जांच जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को ऐसे मामलों की जांच कर रिपोर्ट देने को कहा है।*

कलेक्टर ने बैठक में स्पष्ट रूप से कहा कि आदिवासियों की जमीन की अफरा-तफरी के मामले में किसी को किसी भी तरह की रियायत नहीं दी जाएगी, चाहे वह कितना ही रसूखदार क्यों न हो। उन्होंने कहा कि यदि किसी आदिवासी की जमीन को किसी आदिवासी ने खरीदा हो और उसका उपभोग अन्य वर्ग का व्यक्ति कर रहा हो तो यह निश्चित ही गलत और चिन्तनीय है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में तत्काल धारा 170 (ख) का मामला कायम किया जाना चाहिए। ज्ञातव्य है कि जिले में आदिवासियों की जमीन की खरीदी-बिक्री आदिवासी के नाम पर ही होती है, लेकिन ऐसे मामलों में भूमि क्रय करने वाला कोई अन्य सक्षम व्यक्ति होता है, जो रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उस भूमि का उपभोग करता है। ऐसे सक्षम व्यक्ति, आदिवासियों की जमीन को हथियाने के लिए अपने किसी परिचित गरीब आदिवासी व्यक्ति को सामने करके उसके नाम पर जमीन खरीद कर उसका उपयोग स्वंय करते है। अपने इस अवैधानिक कारनामे पर पर्दा डालने के उद्देश्य से वह बाकायदा किराया नामा का दिखावटी अनुबंध बनाकर अपने पास रख लेता हैं। कलेक्टर ने अधिकारियों को ऐसे मामलों में स्व विवेक से 170(ख) का प्रकरण कायम कर मुल स्वामी को भूमि लौटाने की कार्रवाई के निर्देश दिए है।

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