Sunday, July 5, 2020
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CCF के आदेश पर होगा कितना अमल, न तुम जाने न हम, अब क्या होगा आगे

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रायगढ़ मुनादी।

 

 

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बीते माह बंगुरसिया बिट में कूप जलने के मामले में जिस तरह से अधिकारी कर्मचारियो द्वारा मामले में पूरी तरह से लीपापोती की गई और करोडो की क्षति को महज हजारो में दिखाने का प्रयास किया गया जिसमें बड़े व जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई करने के बजाये निचले स्तर के कर्मचारियो पर कार्रवाई की गाज गिराई गई। इस मामले को सेव फारेस्ट समिति द्वारा गंभीरता से लिया और इसकी शिकायत मुख्य वन संरक्षक को किया गया।
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि अधिकारी कर्मचारी अपने बिट क्षेत्र का न तो भृमण करते है और न ही आबंटित आवास में रहते है। जब बड़े अधिकारी मुख्यालय से गायब रहते है तो एसे में निचले स्तर के कर्मचारी भी कहा मानने वाले है।
दर असल वन महकमा के निचले स्तर के बिट गार्ड व अन्य कर्मचारी आबंटित आवास में नहीं रहते है यह कई बार खुलासा हो चूका है जिसका खामियाजा वन व वन्य जीओ पर पड़ता है कर्मचारियो के फील्ड में न होने से वनों की अन्धधुन्ध कटाई व वन्य जीव का शिकार कोई नई बात नहीं है।
फिलहाल सेव फारेस्ट समिति की शिकायत पर मुख्य बन संरक्षक द्वारा जांच के आदेश दिया गया है। अब देखना ये होगा की ccf के जांच के आदेश को किस तरह से अधिकारी लेते है।
कूप जलने से बड़े पैमाने पर क्षति हुई क्षति को कम बताने के लिए अवैद्ध कटिंग की गई। अधिकारी को बचाने नीचे के कर्मचारी को निलंबित किया गया। बिट मुख्यालय में न रहने वाले कर्मचारियो पर कभी कार्रवाई नहीं हुई क्योकि बड़े अधिकारी स्वम् सप्ताह में बमुश्किल 4 दिन ही मुख्यालय में रहते है और इन 4 दिनों में दफ्तर में बैठकर कामकाज निपटाया जाता है।
बड़े अधिकारी कभी जंगल का भृमण कर ये नहीं देख ते है कि कितने कर्मचारी अपने बिट क्षेत्र के फील्ड में है या नहीं। यह कभी नहीं देखा जाता है।
फिलहाल जांच के आदेश को किस तरह देखते है और जांच किस करवट बैठता है यह आने वाले दिनों में पता चल जायेगा।

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