Monday, October 14, 2019
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बालिका शिक्षा के लिए मिशाल बना प्रीमेट्रिक कन्या छात्रावास, शिकायतों की जगह मिशाल …….बनी दूसरे छात्रावासों के लिए


महासमुंद मुनादी।

महासमुंद जिले का आदिम जाति कल्याण विभाग का एक छात्रावास जहां शिकायते नही बल्कि मिशाल बनकर सामने आई है। जहां एक तरफ छात्रावासों से समस्यायों की तमाम तरह की शिकायतें होती है लेकीन बलौदा आजाक छात्रावास इसमें बीलकुल अलग है। और यह छात्रावास दूसरे छात्रावास के लिए रोल मॉडल बन रहा है।

बलौदा छात्रावास की बेहतर व्यवस्था के चलते दूर-दूर से बच्चे उस छात्रावास में दाखिला लेकर अपना भविष्य गढ़ रहे हैं। सरायपाली ब्लॉक के बलौदा मे संचालित प्री मैट्रिक अनुसूचित जाति कन्या छात्रावास इसका उदाहरण बन गया है छात्रावास अधीक्षका की बेहतर व्यवस्था और कार्यशैली जहां बच्चों को छात्रावास में रहने के लिए आकर्षित कर रहा है वही व्यवस्था को लेकर पालक भी अब छात्रावास के तारीफ करते थक नहीं रहे हैं। आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा संचालित प्रीमेट्रिक कन्या छात्रावास बलौदा इन दिनों बेहतर व्यवस्था का मिसाल बना हुआ है।


शासन द्वारा बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य को लेकर आदिम जाति कल्याण विभाग के माध्यम से दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में बालिकाओं के लिए छात्रावास की व्यवस्था कराई जा रही है ऐसे छात्रावासों में रहकर दूरस्थ ग्रामीण इलाकों के बालिकाएं अपना भविष्य तैयार कर रही हैं महासमुंद जिले के सराईपाली ब्लाक अंतर्गत सुदूरवर्ती क्षेत्र में स्थित बलौदा ग्राम में संचालित प्री मैट्रिक अनुसूचित जाति कन्या छात्रावास ऐसे ही बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए बेहतर व्यवस्था देकर बालिकाओं के भविष्य गढ़ने में लगा हुआ है छात्रावास की व्यवस्था और छात्रावास में रहने वाले बच्चों की देखभाल जिस तरह से की जा रही है वह काबिले तारीफ है । वहीं दूसरी ओर अन्य छात्रावासों के लिए यहां की व्यवस्था उदाहरण बन गया है । छात्रावास के तमाम बच्चों को जहां पौष्टिक भोजन प्रदान किया जा रहा है वहीं दूसरी ओर सभी बच्चों को गणवेश एवं अनुशासन का पाठ भी पढ़ाया जा रहा है। शिक्षा के लिए भी लगातार छात्रावास में रहने वाले बच्चों को निरंतर कोचिंग भी दी जा रही है। हालांकि छात्रावास परिसर में पानी की कमी की समस्या जरूर बनी हुई है लेकिन ऐसी समस्याओं को दूर कर बेहतर शिक्षा देने का काम छात्रावास अधीक्षका द्वारा किया जा रहा है जिसकी पालकों द्वारा भी सराहना की जा रही है।

कन्या छात्रावास में बेहतर व्यवस्था के चलते दूर-दूर के गांव के बच्चे भी दाखिला लेने के लिए कतार में लगे होते हैं और यहां दाखिला मिलने के बाद अपना भविष्य संवारने में जुट जाते है । छात्रावास में निवासरत बच्चों का साफ तौर पर कहना था कि छात्रावास की व्यवस्था काफी बेहतर होने से उन्हें घर का माहौल मिल पाता है और उन्हें घर की याद नही आती। वे छात्रावास में ही रहना पसंद करते हैं वहीं जब छात्रावास में अध्ययनरत बच्चों के पालकों से व्यवस्था को लेकर चर्चा की गई तब उनका कहना था कि छात्रावास में कभी किसी भी तरह की कोई शिकायत बच्चों से नहीं की जाती ।

बेहतर व्यवस्था के चलते हुए अपने बच्चों के भविष्य को लेकर वे निश्चिंत हो जाते हैं। बहरहाल शासन द्वारा एक और जहां बालिका शिक्षा को बढ़ावा देते हुए छात्रावास का संचालन किया जा रहा है वही बलौदा की कन्या छात्रावास में अनुसूचित जाति वर्ग के बालिकाओं का भविष्य संवारने का काम भी निरंतर किया जा रहा है। छात्रावास परिसर में सुरक्षा गार्ड की तैनाती भी की गई है जो चौबीसों घंटे छात्रावास में उपलब्ध रहती है जिससे छात्रावासी बच्चे निर्भीक होकर के अध्ययन अध्यापन का कार्य करते हैं । बहरहाल सरायपाली ब्लॉक का बलौदा में संचालित कन्या छात्रावास इन दिनों अन्य छात्रावासों के लिए रोल माडल साबित हो रहा है।

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