Friday, June 5, 2020
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फेक न्यूज़ के फंदे में फंसा कोरोना के प्रति जागरूकता, जानकार लोग भी फैला रहे भ्रम, ऐसे में क्या करे आम आदमी ? पढ़िए बयानों और अफवाहों की पड़ताल

शेखर की मुनादी।।

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फेक न्यूज़ और व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी के मकड़जाल ने आम तो क्या खास लोगों को भी फांस लिया है। आम ही नहीं खास भी ऐसे कामों में जुटे हैं। क्या करें औऱ क्या ना करें के दरम्यान कोरोना काल बन कर जनसंहार में जुटा है । कंक्रीट की दीवारों में खुद को समेटने वालों के जेहन में खौफ का बसेरा है, तो सड़कों पर सन्नाटा पसरा है । दुनिया भऱ में फैली तबाही का मंजर और देश को कोरोना काल से बचाने की कवायद का हाल जानने के लिए लोगों को मीडिया माध्यमों का आसरा है । निगाहें टिकी हैं हर रिपोर्ट पर हर बयान पर लेकिन कोरोना का मकड़जाल ऐसा है , कि सच क्या और झूठ क्या इसका फैसला करना मुश्किल है । जी हां , मौजूदा वक्त में सदी के महानायक के एक बयान को लेकर उनके चाहने वालों के बीच उहापोह है । दरअसल पिछले दिनों बिग बी ने वीडियो जारी कर बताया , कि कोरोना वायरस का वजूद इंसानी मल में हफ्तों तक रहता है , ऐसे में ये मक्खियों के सहारे फैल सकता है । इस बयान को प्रधानमंत्री ने रीट्विट कर दिया ।

मामले में ट्विस्ट उस समय आया है, जब स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस दावे को खारिज कर दिया है । निसंदेह जागरूकता के संदेश जनहित में जरूरी है , बिग बी जैसे लोगों की अपील असरदार भी होती है । निसंदेह स्वच्छता हर मायने में फायदेमंद है , लेकिन जब हालात ऐसे हों , कि कोरोना का काल मंडरा रहा हो, हर दिल में बेचैनी हो । मौत पता नहीं कब किसके दरवाजे दस्तक दे जाए । बयान तथ्यों पर आधारित हो तो बेहतर है । खास तौर पर अमिताभ बच्चन जैसी शख्सियत हो तो बात पते की ही होनी चाहिए ।

अब बात व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी की भी करें तो कोरोना के देशी उपचार के साथ मंत्रों और टोटके तक सोशल मीडिया में खूब वायरल किये जा रहे हैं। कर्पूर, लौंग, हल्दी से लेकर शिव पुराण के तथाकथित मंत्र भी। डॉक्टर्स इन उपायों को खारिज करते हैं लेकिन आम लोगों को इसकी परवाह नहीं, उन्होंने ऐसे टोटकों के सहारे ही कोरोना को हराने की ठान ली है। व्हाट्सप्प यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर यह बताने में जुटे हैं कि हम इलाज के बजाय तोतजे से ही इस महामारी को भगा देंगे। यही नहीं की बाबाओं ने अपना नाम भी कोरोना बाबा रख लिया।

विशेषज्ञ चिकित्सकों का कहना है कि इससे सिर्फ सोशल डिस्टेनसिंग बनाकर ही बचा जा सकता है। लेकिन जिनके बातों को लोग मानते हैं उनके तरफ से जब तथ्यहीन बातें की जाती है तब सवाल उठता है कि क्या स्वीकार करें और क्या नहीं ? हालांकि आयुष मंत्रालय द्वारा भी शुरुआत।में एक दवा को कोरोना से बचने की दवा बताया था उसे भी चिकित्सकों ने खारिज कर दिया था। जब सरकारी एजेंसीज, सुपरस्टार्स, राजनेता बाबाओं की भाषा में तथ्यहीन बात करें तब सोचिए, आम लोगों का क्या हाल होगा। आदमी किस पर भरोसा करे ?

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