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माघ मेला पर पद्मश्री माता राजमोहनी देवी की तपोस्थली व समाधिस्थल पर जुटे हजारों अनुयायी, संसदीय सचिव चिंतामणि महाराज व रायगढ़ राजपरिवार के सदस्य देवेंद्र प्रताप सिंह हुए शामिल

सूरजपुर मुनादी।। मुकेश गोयल

पद्मश्री माता राजमोहनी की तपोस्थली गोविंदपुर रजमेलान में तीन दिवसीय भव्य माघ मेला का आयोजन सम्पन्न हुआ। सतनदी के किनारे आयोजित इस आयोजन में छत्तीसगढ़ के अलावा झारखंड, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश से काफी तादाद में अनुयायी शामिल हुए थे। इस दौरान कार्यक्रम में आमंत्रित रायगढ़ राजपरिवार के सदस्य व जिला पंचायत सदस्य देवेंद्र प्रताप सिंह, संसदीय सचिव चिंतामणि महाराज, मुरलीधर सिंघानिया व संत समाज के कई लोगों ने माता राजमोहनी देवी को श्रद्धांजली अर्पित करते हुए अपने विचार व्यक्त किये। इस दौरान संस्था के अध्यक्ष त्रिभुवन सिंह टेकाम ने सभी आमंत्रित अतिथियों का आभार व्यक्त किया।

उत्तर सरगुजा के साथ अविभाजित मध्यप्रदेश के साथ उत्तरप्रदेश, सीमावर्ती बिहार प्रान्त में विभिन्न आंदोलन की प्रणेता माता राजमोहनी देवी की तपोस्थली रजमेलान में 25 फरवरी से 27 फरवरी तक माघ मेला का आयोजन किया गया। पद्मश्री माता राजमोहनी देवी जन सेवा संस्था के साथ उनके अनुयायी द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि मध्यप्रदेश, झारखंड से काफी तादाद में महिला पुरुष बच्चे यहां शामिल होने आए थे। माघ मेला का आरंभ 25 फरवरी को कलश यात्रा से हुआ। इस दौरान काफी संख्या में लोग शामिल हुए। इसके बाद गोविंदपुर से 5 किमी दूर रजमेलान सतनदी के किनारे माता राजमोहनी देवी की समाधि स्थल व मंदिर प्रांगण में तीन दिनों तक अखंड कीर्तन व विभिन्न कार्यक्रम सम्पन्न हुए। इस तीन दिवसीय आयोजन के अंतिम दिवस रायगढ़ राजपरिवार के सदस्य व जिला पंचायत सदस्य देवेंद्र प्रताप सिंह व संसदीय सचिव चिंतामणि महाराज ने यहां आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया। कार्यक्रम के पहले चरण में आमंत्रित संसदीय सचिव चिंतामणि महाराज ने माता राजमोहनी देवी के छायाचित्र पर माल्यार्पण किया, इस दौरान उन्होनें संस्था की प्रमुख माता राजमोहनी देवी की पुत्री रामबाई का सम्मान भी किया। इस दौरान संस्था ने संसदीय सचिव का स्वागत भी किया। संसदीय सचिव चिंतामणि महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि समाज को संस्कारवान व सभ्य बनाने के लिए संत के मार्गदर्शन की आवश्यकता पड़ती है। ऐसी मार्गदर्शक माता राजमोहनी देवी ने इस आदिवासी अंचल में आदिवासी समुदाय को संस्कारवान विचार की नई दिशा दी। उन्होनें उस दौर में समाज को विभिन्न कुरूतियों से दूर रखते हुए विभिन्न सामाजिक आंदोलन में सहभागिता निभाते हुए बड़े क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। आज उनके आदर्श, विचारों को मानने वाला एक बड़ा तबका है, जो छत्तीसगढ़ के अलावा झारखंड, मध्यप्रदेश व उत्तरप्रदेश तक फैला हुआ है। आज जिस परिवार व समाज ने उनके बताए मार्ग का अनुशरण किया, वे आज भी संस्कारवान है। उन्होनें इस अंचल में संत गहिरा गुरु व माता राजमोहनी देवी के द्वारा सभ्य समाज के निर्माण में अभूतपूर्व भूमिका का उल्लेख करते हुए युवावर्ग से आह्वान किया कि वे उनकी तपोस्थली पर जाए और सभ्य, संस्कारवान समाज के निर्माण की प्रेरणा लेते हुए इसे प्रसारित करें।

कार्यक्रम के द्वितीय चरण में रायगढ़ राजपरिवार के सदस्य व जिला पंचायत सदस्य देवेंद्र प्रताप सिंह ने माता राजमोहनी के छाया चित्र पर माल्यार्पण करते हुए माता रामबाई का सम्मान किया। उन्होनें अपने उद्बोधन में कहा कि मैं बचपन से ही माता राजमोहनी देवी के बारे में सुनता आ रहा हूं। आज संस्था के बुलावे पर यहां आकर मैं अपने आपको गौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ। उन्होनें कहा कि इन क्षेत्रों से संत गहिरा गुरु व माता राजमोहनी देवी के द्वारा आदिवासी समाज को दिखाई गई नई दिशा को समाज कभी भुला नहीं सकता। चाहे वे शराबबन्दी हो यहां फिर विभिन्न जनआंदोलन। सभी में इन संतों की अहम भूमिका रही है। उन्होनें लोगों से खासकर युवा पीढ़ी से आह्वान किया कि वे इनके बताए हुए सद् मार्ग पर चलने की प्रेरणा ले और समाज का उत्थान करें। उन्होनें आज के दौर में भी इनके बताए हुए मार्ग को उतना ही प्रासंगिक बताते हुए इसे विस्तारित करने की बात कही। उन्होनें अंत में यह आमंत्रित करने के लिए संस्था का आभार भी व्यक्त किया।

माता के मार्ग का अनुशरण करें समाज- माता रामबाई

माता राजमोहनी देवी की पुत्री माता रामबाई ने अपने उद्बोधन में उपस्थित समुदाय को सम्बोधित करते हुए कहा कि हमलोगों को माताजी के बताए हुए मार्ग का अनुशरण करना चाहिए। उन्होनें समाज से शराबबंदी का आह्वान भी किया। उन्होनें महिला, पुरुष, बच्चों से कहा कि वे अपने घरों को स्वच्छ रखते हुए भक्तिभाव से इसे पावन रखे तभी आने वाली पीढ़ी संस्कारवान बनेगी। अंत में उन्होनें आमंत्रित सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अध्यक्ष त्रिभुवन सिंह टेकाम ने माताजी के बताए आदर्श, सिद्धांतों का अनुशरण करने की बात कही। उन्होनें सभी आमंत्रित सदस्यों का आभार भी व्यक्त किया। कार्यक्रम को महामंत्री अमृत राम मरावी, जीआर उइके ने भी संबोधित किया। तीन दिनों के दौरान अमरनाथ, अम्बिका प्रसाद, माहेश्वरी लाल उइके द्वारा प्रवचन की प्रस्तुति की गई।

कार्यक्रम के दौरान सर्व आदिवासी समाज के प्रदेश उपाध्यक्ष मोहन सिंह टेकाम, संत समाज के देवनारायण सिंह पावले, शिवभजन सिंह मरावी, लैलूंगा से मुरलीधर सिंघानिया, सत्यनारायण सिंह, जयसिंह मरकाम, गोपाल सिंह टेकाम, पुरन राम, अदल सिंह, अर्जुन सिंह, लल्लाराम, गोधल सिंह, लाल सिंह, कलेश्वर सिंह, दसरथ सिंह, अमित सिंह, अमरजीत, फुलमन सिंह, सिंगरौली से चैत सिंह, रामबिहारी, रामललन उइके, उत्तरप्रदेश से सहदेव सिंह, बासदेव, कमलेश्वर, रामविचार, झारखंड से रामकिशुन, संतकुमार आदि उपस्थित रहे। इसके अलावा प्रशासनिक अमले की ओर से प्रतापपुर तहसीलदार गरिमा ठाकुर, रेवटी चौकी प्रभारी केपी चौहान व काफी तादाद में पुलिस अमला मौजूद रहा।

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