Friday, May 24, 2019
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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष – सशक्तिकरण की प्रतीक ग्रामीण महिलाएं, कर रही जागरूक पढिये कैसे ….


खरसिया मुनादी।

जीवन के सभी क्षेत्रों में आज महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलकर कार्य कर रही हैं | और महिला सशक्तिकरण एक बहु चर्चित मुद्दा बन चुका है। घर के अंदर या बाहर सभी जगहों पर महिलाएं अपना एक स्वतंत्र दृष्टिकोण रखती हैं। और वे अपनी शिक्षा व्यवसाय या जीवनशैली से संबंधित सभी निर्णय स्वयं लेते हुए अपने जीवन पर तेजी से अपना नियंत्रण कायम करने में कामयाब हो रही हैं। कामकाजी महिलाओं की संख्या में लगातार वृद्धि होने की वजह से महिलाओं को वित्तीय स्वतंत्रता प्राप्त हुई है। और इस वजह से उन्हें अपने जीवन का नेतृत्व खुद करने एवं अपनी पहचान बनाने का आत्मविश्वास भी प्राप्त हुआ है।

वे सफलतापूर्वक विधिवत व्यवस्थाएंओं को अपनाकर यह साबित करने का प्रयास कर रही हैं कि वे किसी भी मामले में पुरुषों से पीछे नहीं है। लेकिन ऐसा करते हुए भी महिलाएं अपने व्यवसाय के साथ साथ अच्छी तरह से अपने घर एवं परिवार के लिए प्रतिबद्धता के बीच संतुलन कायम रखने पर भी ध्यान देती है। वे उल्लेखनीय सदवाक्य के साथ आसानी से मां, बेटी, बहन, पत्नी एवं एक सक्रिय पेशेवर जैसी कई भूमिकाएं एक साथ निभाने में कामयाब हो रही हैं। काम करने के समान अवसरों के साथ वे टीम वर्क की भावना के साथ तय समय सीमा के भीतर लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अपने अपने व्यवसायों में पुरुष समकक्षो को हर संभव सहयोग दे रही हैं।

महिला सशक्तिकरण सिर्फ शहरी कामकाजी महिलाओं तक ही सीमित नहीं है। बल्कि दूरदराज के कस्बों एवं गांव में भी महिलाएं अपनी आवाज बुलंद कर रही हैं। वे पढ़ी लिखी हो या ना हो अब किसी भी मायने में अपने पुरुष समकक्षो से पीछे नहीं रहना चाहती। अपनी सामाजिक एवं आर्थिक पृष्ठभूमि की परवाह किए बिना वे अपने सामाजिक एवं राजनीतिक अधिकारों को प्राप्त करने के लिए प्रयत्नशील हैं। और साथ ही साथ अपनी उपस्थिति भी महसूस करा रही हैं। हम आपको बताना चाहते हैं | रायगढ़ जिले की महिलाएं खेल, समाज, सेवा, साहित्य, नशा उन्मूलन शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में निरंतर आगे बढ़ रही हैं। राष्ट्रीय स्तर राज्य स्तरीय जिला स्तरीय खेलकूद स्पर्धा सामाजिक कार्यों में जिले की महिलाओं की सशक्त उपस्थिति है। उनमें हर क्षेत्र में आगे बढ़ने की ललक है। विविध क्षेत्रों में महिलाएं ना केवल पुरुषों के साथ चल रही हैं बल्कि कई क्षेत्रों में उनसे आगे भी हैं। पुरानी बस्ती खरसिया की श्रीमति अम्बिका राठौर तकनिकी शिक्षा के क्षेत्र में ड्रीमजोन कंप्यूटर एजुकेशन में वाईस डायरेक्टर के रूप में कार्यरत है, वही राजनीती के क्षेत्र में महिला शहर कांग्रेस कमेटी खरसिया की प्रवक्ता भी है | पतरापाली की श्रीमती प्रियंका गुप्ता ग्रामीण महिला होते हुए भी घर की चारदीवारी से बाहर निकल कर दलित, शोषित, पीड़ित, वंचित, वर्गों की महिलाओं को शिक्षा महिला हिंसा कानूनी साक्षरता और अपने अधिकार के बारे में जागरूक कर रही हैं। वर्तमान में सावित्रीबाई फुले महिला मंडल के अध्यक्ष हैं। श्रीमती किरण शर्मा ग्राम भेलवाडीह शिक्षिका के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने साहित्य क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है। उनकी कृति छत्तीसगढ़ी में काव्य संग्रह गोहार छत्तीसगढ़ के अंगना में बगरत चिन्हारी निबंध, बाल संग्रह माटी महतारी प्रकाशित हो चुकी है। कई पत्र पत्रिकाओं एवं दैनिक समाचार पत्रों में कहानी प्रकाशित होती रहती है। कई सामाजिक संस्थाओं से सम्मान प्राप्त कर चुकी हैं अपनी लेखनी के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोकजीवन संस्कृति रहन सहन परंपरा को लेखनी के माध्यम से लोगों के सामने प्रस्तुत कर रही हैं। वे शास्त्रीय गायन में विशारद आर्ट कला में डिप्लोमा प्राप्त कर गरीब बच्चों को निशुल्क शिक्षा प्रदान करने का लक्ष्य बना लिए हैं। श्रीमती माधुरी पटेल ग्राम छौतौना (आरंग) निवासी वर्तमान में छत्तीसगढ़ आजीविका मिशन बिहान योजना में खरसिया परियोजना क्षेत्र में कार्यकर्ता के रूप में कार्य करते हुए महिला हिंसा वंचित समुदाय महिला सशक्तिकरण महिलाओं को संगठित कर बचत की भावना महिलाओं में जगा रही हैं। वर्तमान में खरसिया क्षेत्र के ग्रामीण अंचलों में स्व सहायता समूह गठन कर बचत के लिए प्रेरित कर रही हैं उनका कहना है कि शिक्षित बालिका से होगा सशक्त देश। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की स्थिति दोयम दर्जे की है। यदि कोई महिला आगे बढ़कर कोई कार्य करना भी चाहती है तो उसे समाज स्वीकार नहीं करता। समाज में पर्दा प्रथा पुराने रीति रिवाज तथा रूढ़िवादिता आज विद्यमान हैं। जिससे महिलाएं विकास प्रक्रिया में पूर्ण भागीदारी नहीं कर पा रही हैं। ऐसी परिस्थिति में बरगड निवासी हेमकुमारी सिदार 2 वर्षों से आदिवासी बाहुल्य ग्राम पंचायत तेंदु मुड़ी में सचिव के पद पर कार्यरत हैं वे पंचायती राज में महिलाओं की भूमिका सक्रिय हो उसके लिए निरंतर प्रयासरत हैं। आज से कुछ बरस पहले तक मीडिया में अंगुलियों पर गिनी जाने वाली महिलाएं थी। लेकिन आज स्थिति भिन्न है। आज मीडिया जगत का ऐसा कोई कोना नहीं है । जहां महिलाएं आत्मविश्वास और दक्षता से मोर्चा नहीं संभाल रही हैं। विगत वर्षों में प्रिंट इलेक्ट्रॉनिक और इंटरनेट पत्रकारिता की दुनिया में महिला स्वर प्रखरता से उभरे हैं। इस जगमगाहट का एक अहम कारण यह है कि पत्रकारिता के लिए वंचित संवेदनशीलता की जरूरत होती है। वह महिलाओं में नैसगिक रूप से पाई जाती हैं। पत्रकारिता में एक विशिष्ट किस्म की संवेदनशीलता की आवश्यकता होती है और समांतर रूप से कुशलतापूर्वक अभिव्यक्त करने की बी संवाद और संवेदना के सुनियोजित समिश्रण का नाम ही सुंदर पत्रकारिता है। महिलाओं में संवाद की स्तर पर स्वयं को अभिव्यक्त करने का गुण भी पुरुषों की तुलना में अधिक बेहतर होता है। यही वजह रही है कि मीडिया में महिलाओं का गरिमा में वर्चस्व बढ़ा है। खरसिया नगर पुरानी बस्ती निवासी राकेश केसरवानी जी की सुपुत्री नेहा केसरवानी आज पत्रकारिकता के जगत में अपना परचम लहरा रही है| कुशाऊभाई ठाकरे पत्रकारिकता एवं जनसंचार विश्वविध्यालय से पहला सेमेस्टर में यूनिवर्सिटी टॉप करते हुए अपनी पढाई पूरी करने के बाद केम्पस सिलेक्शन के दौरान ही उनकी क़ाबलियत को एक ही बार में आईबीसी 24 चैनल में पहचान लिया तथा इनको अपने चैनल में संवादाता नियुक्त किया आज नेहा केशरवानी को चैनल में कार्य करते हुए महीनों बीत गए जहाँ वे सफलता पूर्वक अपने कार्य को निष्पादित कर रही है| कुमारी आरती चौहान नेटवर्क मार्केटिंग में काम कर सिर्फ अपने परिवार ही नहीं बल्कि दूसरे परिवार की लड़कियों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं वे पहले घर में ही खाना बनाती थी| जब से नेटवर्क मार्केटिंग से जुड़ी हैं तब से उनकी आय का स्रोत बढ़ा है और वह आर्थिक रूप से सशक्त हो कर दूसरे लड़कियों को भी सशक्त करने के लिए प्रयासरत हैं। ग्राम पंचायत डोमनारा, परसापाली सरपंच श्रीमती सौरिन बाई सिदार, श्रीमती सुलोचना सिंह दोनों एक गृहणी होते हुए भी पंचायत की बागडोर संभालते हुए साथ ही महिलाओं को सशक्त करने के लिए ग्राम पंचायत में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित हो इसलिए ग्राम सभा के बारे में जागरूक करते हुए महिला हिंसा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कुपोषण अभियान स्वच्छता अभियान शासन की जन कल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य उनके द्वारा की जा रही है। श्रीमती उषा यादव आरोह फाउंडेशन में कार्यरत हैं, उनका कहना है कि देश में ऐसी भी सालों की कमी नहीं सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण के लिए चलाए जा रहे तमाम कार्यक्रमों से दूर दराज की शिक्षित और गैर संगठित महिलाओं में जागरूकता आई है उन्हें दिल से मिली है खुद के पैरों पर खड़ा होने के लिए सरकार की योजनाएं उनके लिए मददगार बन रही हैं सरकारी संस्थाएं देर से ही सही लेकिन आप उनके हुनर के लिए बाजार का दरवाजा खुलने का काम कर रही हैं मदद के लिए सभी संभव प्लेटफार्म उपलब्ध कराए जा रहे हैं ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए प्रशिक्षण और रोजगार योजना शुरू की गई है|

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