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मजदूरी से लौटकर रास्ते में ही थककर सो गईं मां-बेटी, सुबह मां उठी ही नहीं, बेटी मदद को चीखती-चिल्लाती रही….

डेस्क मुनादी।। महामारी की दूसरी लहर ने लोगों को इस कदर डरा रखा है कि वे अब दूसरों की मदद करने से भी कतराने लगे है। कोई सड़क पर मरता ही क्यों ना रहे, लेकिन मदद के हाथ उसके लिए आगे नहीं बढ़ते…क्योंकि सबके मन में कोरोना का डर घर कर गया है।

ऐसा ही एक मामला कर्नाटक के कोलार शहर से सामने आया। जहां पर एक महिला सड़क पर बेहोश होकर पड़ी रही उसके बाजू में बैठी उसकी बेटी मां को अस्पताल ले जाने के लिए रोती रही बिलखती रही, लेकिन कोई भी अपनी गाड़ी से महिला को अस्पताल ले जाने के लिए तैयार नहीं हुआ।

जानकारी के मुताबिक चंद्रकला नाम की एक महिला अपनी 12 साल की बेटी के साथ एक गांव पहुंची थी। जहां वे मजदूरी का काम कर रहे थे।काम खत्म होने के बाद चंद्रकला की तबीयत थोड़ी बिगड़ गई ऐसे में मां बेटी घर लौटने लगे। लेकिन घर पहुंचने से पहले ही मां की तबीयत बहुत ज्यादा खराब हो गई और रात गुजारने के लिए दोनों दुकान के बाहर ही बैठ गए।

सुबह होते ही चंद्रकला अपनी बेटी की गोद में सर रखकर सो गई, लेकिन दोपहर होते-होते जब बेटी ने मां को उठाने की कोशिश की, तब वह उठी नहीं। चंद्रकला बेहोश हो चुकी थी। मां को इस हालत में देखकर बेटी रोती रही चिल्लाती रही लेकिन महिला को कोई भी अस्पताल ले जाने को तैयार नहीं हुआ।

ऐसे में काफी मिन्नतें करने के बाद किसी तरह से जेसीबी मशीन आई और महिला को हॉस्पिटल पहुंचाया। लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। चंद्रकला की सांसें थम चुकी थी। रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई है कि महिला को corona नहीं था। उसकी किसी और वजह से मौत हुई है।

इस घटना से एक बार फिर हमारे इंसान होने पर सवाल खड़े कर दिए हैं।जहां लोगों के दिल में दूसरों के प्रति कोई भाव या फर्ज़ बचा ही नहीं है।

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