Sunday, May 19, 2019
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यदि यहां के विधायक और सांसद जरा भी इनसे रुचि रखते तो अब तक इनको धरने पर बैठने की जरूरत नही पड़ती

रायगढ़ मुनादी।
राज्य सभा सांसद आम आदमी पार्टी के सुशील गुप्ता झाड़ू यात्रा के तहत खरसिया होते हुए रायगढ़ पहुंचे थे इस बीच वे जिले का अब तक का सबसे चर्चित व 200 दिनों तक एनटीपीसी भू विस्थापित आंदोलन कारियों से मुलाकात करने भि पहुँचे थे। यहाँ उन्होंने भूंविस्थापित आन्दोलनकारियो से मुलाकात करने पहुंचे थे।
यहां आप के सुशील गुप्ता ने कहा कि यदि यहां के विधायक व सांसद जरा सी भी रुचि लेते तो आज इन्हें 200 दिनों से आंदोलन पर बैठने की जरूरत नही पड़ती। उनकी सरकार यहां से लेकर दिल्ली तक लेकिन विधायक और सांसद कभी आना भी नही चाहे। लेकिन वे इस मुद्दे को संसद में उठाने सहित प्रधानमंत्री, उर्जा मंत्री और एनटीपीसी इडी से भी इस मामले बात की जाएगी।
दर असल छत्तीसगढ़ के साथ पूरे देश में चर्चा का विषय बनने वाली एनटीपीसी लारा परियोजना प्रभावितों का हड़ताल आज अपने रिकॉर्ड 200 दिन तक पहुंच गया। 20 मार्च 2018 से शुरू हुआ आंदोलन धीरे-धीरे करते हुए सारे रिकॉर्डो को तोड़कर लगातार 200 दिन तक पहुंचने वाली छत्तीसगढ़ का देश का सबसे लंबा हड़ताल है। परंतु यह लंबा हड़ताल प्रजातंत्र राष्ट्र भारत में एक चिंतन का विषय भी है, जमीन खो चुके किसानों को आज इतना लंबा हड़ताल करने की जरूरत क्यों पड़ी? इतने लंबे हड़ताल पर किसी भी प्रकार का मांगों का पुरा न होना विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्रिक देश के बुनियादी अस्तित्व पर सवाल उठाता है‌।
गांधीवादी शांतिपूर्ण आंदोलनों के महत्व पर भी प्रश्नचिन्ह खड़ा करने वाला यह आंदोलन आज हर किसी से यह सवाल कर रहा है कि क्या आज शांतिपूर्ण आंदोलनों महत्व समाप्त होते जा रहा है। क्या आज शांतिपूर्ण आंदोलन को ह्येय की दृष्टि से देखा जा रहा है? आज खेती करने वाले किसान से लेकर जमीन छीन चुके किसानों को अपने हक के लिए किस कदर जान देना पड़ रहा है। यह किसानों की स्थिति को देखकर पता लगाया जा सकता है।

जमीन मे खेती किसानी कर रहे विस्थापित आज अपने परिवार का पालन पोषण करने के लिए भी असमर्थ है। फर्जीपुनर्वास नीति बनाकर भू-विस्थापितों को ठगने वाली कंपनी और उसको शरण देने वाले प्रशासन ने विस्थापितों को मरने के लिए मजबूर कर दिया है। सबसे लंबा चलने वाला आंदोलन आज किसानों की यथास्थिति को स्पष्ट प्रकट करता है।

जमीन खोने के बाद भी उन्हें आज न्याय नहीं मिला। उनकी जमीन का मुआवजा पुनर्वास का लाभ और अन्य कई मामलों का निपटान आज तक नहीं हुआ। एनटीपीसी प्रबंधन ने एक तिहाई भू-विस्थापितों को पुनर्वास लाभ देकर आज शेष बचे विस्थापितों के साथ सौतेला व्यवहार किया। वहीं प्रशासन के अधिकारियों के गलत निर्णयों ने भू-विस्थापितों को कहीं के लायक नहीं छोड़ा।

जब भू-विस्थापितों ने अपने हक के लिए आवाज उठाया तो उनको जेल भेज दिया गया। 200 दिन का हड़ताल आज विस्थापितों के साथ किए गए अन्याय की कहानी कहता है।

आंदोलन करने वाले विस्थापितों के 200 दिन पूरे होने पर दिल्ली से आए राज्य सभा सांसद डॉ. सुशील कुमार गुप्ता ने मुलाकात किया। वे पिछले दिन धरना स्थल पर भी पहुंचे थे। उन्होंने एक आम आदमी की हैसियत से प्रशासन और प्रबंधन से कई प्रश्न पूछे। विस्थापितों का हौसला बढ़ाया और यह कहा कि अब लड़ाई राष्ट्रीय स्तर पर लड़ी जाएगी और मैं आप की बात प्रधानमंत्री और ऊर्जा मंत्री तक पहुंचाऊंगा।

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