Monday, June 25, 2018
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नेशनल सिटीजन रजिस्टर पर प्रत्येक भारतीय नागरिक का पंजीयन अनिवार्य करें गृह मंत्रालय – अरुण कुमार पांडेय

 

बस्तर  से धर्मेन्द्र सिंह की मुनादी

 

नए साल का जश्न मना रहे हिंदुस्तान को देश की सीमा के बाहर से ज्यादा आंतरिक आतंकवाद से खतरा है, उक्त बात शिवसेना – छत्तीसगढ़ के युवा नेता अरुण कुमार पाण्डेय ने जारी एक पत्र विज्ञप्ति के माध्यम से कही।पाण्डेय ने देश के माननीय गृहमंत्री को इसविषय पर ध्यानाकर्षित करने के लिए पत्र लिखने की बात कही है।अवगत होकि कुछ समय पूर्व ही बर्मा में हुए आतंकी हमलों से रोहिंग्या मुसलमानों की देश के सीमाई इलाकों में घुसपैठ प्रारंभ हो गया था, जिसपर देश के सम्माननीय मीडिया संस्थानों, नागरिकों व शोसल मीडिया द्वारा जमकर विरोध किया गया था व इसतरह के घुसपैठ को राष्ट्रहित में खतरा भी बताया गया, इसके उपरांत भी केंद्रीय गृहमंत्रालय से इस विषय पर कोई प्रतिक्रिया नही आई।ठीक इसी प्रकार से देश के विभाजनों के समय से चाहे पाकिस्तान का बंटवारा हो या बांग्लादेश का न जाने कितने ही लोगों द्वारा हिंदुस्तान में शरण लिया गया। शरणार्थियों को सरकार द्वारा यहां की नागरिकता भी दी गई।परन्तु आतंकवाद की चुनौतियों के बीच सोचने वाली बात यह हैकि देश भर में असंवैधानिक रूप से निवास कर रहे अन्य राष्ट्रों के लोगों की अबतक पहचान नही हो पाई है। अकेले देश की राजधानी दिल्ली जैसे महानगरों में लाखों की संख्या में ऐसे लोग निवास करते हैं जिनके पास भारतीय नागरिकता का कोई प्रमाण नही हैछत्तीसगढ़ राज्य में भी अन्य राष्ट्रों के नागरिकों की उपस्थिति लाखों की संख्या में है, केंद्रीय सतर्कता आयोग व केंद्रीय गृह मंत्रालय को ऐसे गैर भारतीयों की पहचान करने की आवश्यकता है। हमें 26/11 की घटना को नही भूलना चाहिए क्योंकि ऐसे ही लोग देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा साबित हो सकते हैं।युवासेना – छत्तीसगढ़ के प्रदेश सचिव अरुण कुमार पाण्डेय जी के अनुसार केंद्रीय गृह मंत्रालय को राष्ट्रीय नागरिक पंजी (नेशनल सिटीजन्स रजिस्टर) पर प्रत्येक राज्य के लोगों का पंजीयन अनिवार्य करवाना चाहिए, जिससे वास्तविक उस राज्य के निवासियों की वास्तविक संख्या व वास्तविक प्रवासियों की संख्या ज्ञात हो सकें। तथा इसप्रकार गैर भारतीयों की पहचान करके उनपर विदेश मंत्रालय के नियमों के अनुरुप कार्यवाही भी किया जा सकता है।

 

नए वर्ष के पहले दिन असम राज्य में नेशनल सिजिजन्स रजिस्टर में अनिवार्य रूप से नाम दर्ज कराने हेतु प्रस्ताव पास करने वाला पहला राज्य बना जिसमे यह बात सामने आई कि असम के 3 करोड़ कुल जनसंख्या में केवल 1.9 करोड़ लोग ही नागरिक साबित हो सकें।

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