Monday, June 25, 2018
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योगी ने अपने ऊपर लगे मुक़दमे हटाने की तैयारी शुरू की , प्रशासन ने कहा ये राजनितिक मुकदमें थे

गोरखपुर से धनेश की मुनादी

 

जब विपक्ष में बैठा नेता सरकार के खिलाफ आंदोलन करता है तो उसके ऊपर कई मुकदमें लगा दिए जाते हैं, उस समय कहा जाता है की यह अपराध की श्रेणी में आता है इसलिए जुर्म दर्ज किया गया है लेकिन जैसे ही वह सत्ता में पहुंचता है उसका अपराध राजनैतिक हो जाता है. जिन प्रशानिक लोगों के लिए जो कार्यंपाहले अपराध हुआ करता था वही बाद में राजनितिक आरोप बन जाता है और प्रशासनिक अधिकारी बड़े बेशर्मी से अपनी बातों से पलट भी जाते हैं. ऐसे में यदि कोई नेता सीएम बन जाये तो सरे मुकदमें स्वयमेव समाप्त होब्जते हैं. ऐसा ही कुछ यूपी में होवरः है.
सीएम योगी आदित्यनाथ समेत 13 नेताओं के खिलाफ वर्ष 1995 में पीपीगंज थाने में दर्ज मुकदमे को वापस लिए जाने के मामले में राज्यपाल की अनुमति मिलने के बाद प्रशासन ने पहल तेज कर दी है शासन से पत्र मिलने के बाद डीएम ने एडीएम सिटी को शीघ्र कार्यवाही पूरी करने को कहा है वर्ष 1995 में गोरक्षपीठ के तत्कालीन उत्तराधिकारी योगी आदित्यनाथ अपने समर्थकों के साथ पीपीगंज क्षेत्र में धरना-प्रदर्शन करने गए थे तब पीपीगंज में धारा 144 लागू थी योगी के साथ वर्तमान केंद्रीय राज्यमंत्री शिवप्रताप शुक्ल, विधायक शीतल पांडेय, राकेश सिंह पहलवान, विश्वकर्मा द्विवेदी, कुंवर नरेंद्र सिंह, उपेंद्र दत्त शुक्ल, समीर सिंह, विभ्राट चंद कौशिक, शंभुशरण सिंह, भानुप्रताप सिंह, ज्ञान प्रताप शाही, रमापति राम त्रिपाठी समेत 13 लोगों के खिलाफ पुलिस ने धारा 188 के तहत मुकदमा दर्ज किया था राजनीतिक मुदकमा वापस लिए जाने की राज्यपाल से अनुमति मिलने के बाद प्रदेश सरकार के अनु सचिव अरुण कुमार राय ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर इस मामले में औपचारिकताएं पूरी करने को कहा है शासन से पत्र आने के बाद जिला प्रशासन ने इस मामले सक्रियता बढ़ा दी है डीएम ने एडीएम सिटी को अग्रिम कार्यवाही शीघ्र पूरी करने का निर्देश दिया है

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