Tuesday, December 11, 2018
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जशपुर: यहाँ कौन जीतेगा कहना मुश्किल, लेकिन “हम जीत रहे हैं” इसकी उम्मीद इन तीनो को है….उम्मीद भी क्यों न हो वजह भी तो….

जशपुर मुनादी———

 

जशपुर विधानसभा चुनाव तो हुआ पर ऐसे कदम जो अचम्भे से भरे हुए थे,11 प्रत्याशियों की दौड़  थी।पर इन 11 प्रत्याशियों में भाजपा से बागी होकर पूरे चुनाव में  जिसने सबको आकर्षित किया वो खुड़िया दीवान का चेहरा था।जो भाजपा को मंथन करने पर विवश कर दिया।जशपुर विधानसभा की अगर क्षेत्रफल की दृष्टि से देखें तो एक संसदीय क्षेत्र से कम नही दिखता।झारखंड बॉर्डर के शंख नदी से शुरू होकर सरगुजा के बार्डरों तक फैले इस विधानसभा की दूरी दोनों छोर लगभग 200 किलोमीटर है।
हालांकि इन 11 प्रत्याशियों में बात करें तो मुख्य रूप से रुझानों में कांग्रेस के विनय भगत,भाजपा के गोविंद राम भगत,आम आदमी पार्टी के रोहित लकड़ा और निर्दलीय प्रत्याशी खुड़िया दीवान प्रदीप नारायण सिंह की चमक चारों तरफ बिखरी।मगर प्रत्याशियों की इस चमक में खुड़िया दीवान की चमक सबसे अलग ही दिखी,जो वोटरों को हर जगह लुभा रही थी।वहीं भाजपा अपने परंपरागत मतदाताओ को अपने दूर होते देखना भी स्वयम्भू नेताओं के लिए कष्टदायक था।जहां मतदाताओं को लुभाने के लिए हेलीकॉप्टर की रोज गड़गड़ाहट से हवाई फायर तो हो रहे थे।केंद्र एवं छत्तीसगढ़ और झारखंड के आला मंत्री,योगी आदित्यनाथ के अलावा सौदान सिंह भी क्षेत्र में लगातार कसरत करते रहे,वहीं कांग्रेस भी के प्रचार अभियान में कुछ विशेष तो नही था,पर कांग्रेस अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की सभा करके अपने परंपरागत मतदाताओं को बचा तो रही ही थी,साथ मे कुछ रणनीतियों के तहत यादव और कुछ जगहों पर भाजपा के मतदाताओं को भी अपने साथ लाने में कामयाब दिखी।हालांकि ये रुझान दिखे,ये मतों में कितने बदले ये तो वक्त ही बताएगा।हालांकि आम आदमी पार्टी के युवा प्रत्याशी रोहित लकड़ा ने भी अपनी छाप छोड़ी जहां ईसाई मतदाताओं के अलावा अन्य वर्गों से भी कुछ मतदाताओं को अपने ओर खींचते देखे गए।
पर पूरे चुनाव में जिस तरह भाजपा का पूरा अमला पूरे चुनाव में सिर्फ खुड़िया दीवान के इर्द गिर्द ही घूमता नजर आया,और वहीं हमलावर भी रही।खुड़िया दीवान के तिलिस्म में भाजपा पूरे चुनाव भर उलझी रही।इस परिस्थिति में कांग्रेस को यहाँ खुला मैदान मिला जो कांग्रेस को लाभ दे सकती है।पूरे चुनाव में अगर भाजपा जिसे विपक्षी समझ बैठी और कांग्रेस पर एक बार भी हमलावर नही दिखी।
पूरे चुनाव के रुझान जो हैं छाप वितरण के बाद 10 दिनों के समय मे ही अपनी उपस्थिति खुड़िया दीवान ने प्रत्येक बूथ पर दिखाई।चाहे वो लोदाम पोरतेंगा से झारखंड बॉर्डर हों या सरगुजा के बॉर्डर दनगरी या बाम्बा पसिया के बूथ जो सरगुजा बॉर्डर पर हैं।
यही वजह रहा कि जशपुर विधानसभा त्रिकोणीय संघर्ष में दिख रही है ।इस त्रिकोणीय संघर्ष के बीच किसी की जीत या हार का अनुमान लगाना फिलहाल मुश्किल है लेकिन मजे की बात ये है कि जीत का कॉन्फिडेंट तीनो उम्मीदवारों में कूट कूट कर भरा हुआ दिख रहा है। भाजपा और दीवान की लड़ाई में कांग्रेस को यहां भारी फायदा होने वाला है यह सोंचकर कांग्रेस अभी से ही जीत का सपना देख रही है जबकि भाजपा जीत के पुराने रिकार्ड और हिन्दू मतदाताओं पर अभी भी भरोसा जमाकर बैठी हुई है और भाजपा को पूरी उम्मीद है कि उसके पुराने मतदाताओं ने अबतक उनका साथ नही छोड़ा है वहीं भाजपा के बागी दीवान भी भावी जीत को लेकर आश्वश्त दिख रहे हैं । इनके समर्थकों में खुड़िया इतिहास और इतिहास से जुड़े जीत की पुरानी मिथकों पर पूरा भरोसा है।इनका कहना है कि खुड़िया जब भी लड़ा उसे जीत ही मिली है चाहे युद्ध हो या चुनाव……

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