Tuesday, June 19, 2018
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जब चर्च में गूंजी वेद की ऋचाएं, कैथोलिक विशप ने कहा यह हमारा धरोहर

सेंट्रल डेस्क मुनादी ।।

जब देश में गंगा जमुनी संस्कृति की बात होती है तो कुछ लोग सवाल उठाते हैं कि दूसरे धर्म और संस्कृति के लोग इस बात को क्यों नहीं समझते या उतनी सांस्कृतिक उदारता क्यों नहीं दिखाते जितना हिन्दू दिखाता है ? तब अजमेर के एक चर्च से वेद की ऋचाएं ध्वनित होती हैं और यह स्थापित किये जाने का एक प्रयास होता है कि भारत में गंगा जमुनी संस्कृति है और हम ही उसजे वाहक हैं।

16 दिसम्बर को सेंट एंसलम स्कूल के समारोह में भारत की सनातन संस्कृति से संबंधित कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। संभवतः स्कूल के इतिहास में यह पहला समारोह रहा होगा, जिसमें ऋषि-मुनियों, वेद-पुराण आदि को लेकर संगीत और नाटक की प्रस्तुति दी गई। अंग्रेजी पढ़ने वाले विद्यार्थियों ने जिस तरह सनातन संस्कृति के कार्यजराम किये वह स्वयं में अद्भुत था। 16 दिसम्बर की शाम को अजमेर के सुप्रसिद्ध सेंट एंसलम सीनियर हायर सैकंडरी स्कूल का वार्षिकोत्सव राजस्थान के स्कूली शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी के मुख्य आतिथ्य और हाॅकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के पुत्र अर्जुन अवार्ड विजेता अशोक चैहान की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। इस समारोह में कैथोलिक समुदाय के अजमेर प्रांत के धर्मगुरु बिशप पायस थाॅमस डिसूजा विशेष तौर से उपस्थित रहे।

स्कूल के छात्रों ने ऋषि-मुनियों के भेष में घटनाओं को जीवंत करने वाले नाटक की प्रस्तुति दी। विद्यार्थियों को यह बताया गया कि भारत की सनातन संस्कृति ही सर्वश्रेष्ठ है। इस माहौल को अजमेर क्षेत्र के ईसाई धर्मगुरु बिशप पायस डिसूजा ने अपने संबोधन में और ऊंचाईयां दीं। बिशप डिसूजा ने बहुत शुद्ध और प्रभावी तरीके से हिन्दी का उपयोग किया। बिशप का कहना था कि कुछ लोग मजाक में कहते हैं कि हमारा देश राम भरोसे चल रहा है और यह मजाक नहीं सच है। भारत में विभिन्न धर्मों के लोग अपने-अपने धर्म के अनुरूप रहते हैं। यह कार्य ईश्वर की कृपा से ही संभव है। हम बंटकर नहीं बल्कि बांटकर खाने में विश्वास करते हैं। जब हमारे पास वेद-पुराण हैं तो हमें विज्ञान के लिए दूसरे की नकल करने की जरुरत नहीं है। उन्होंने एंसलम स्कूल के विद्यार्थियों से कहा कि अंग्रेजी पढ़े लेकिन अंग्रेज नहीं बने। उन्होंने कहा की हम सबको अपने देश की संस्कृति से जुड़े रहना चाहिए। हमारे देश की संस्कृति ही सबको साथ लेकर चल सकती है। बिशप डिसूजा ने सनातन संस्कृति के बारे में भाषण दिया उसको सुनकर समारोह में उपस्थित कैथोलिक समुदाय के प्रतिनिधि भी आश्चर्यचकित थे। समारोह में मिशनरीज स्कूलों के प्राचार्य आदि उपस्थित रहे। विदित हो कि मिशनरीज स्कूलों के प्राचार्य आदि ईसाई धर्म की शिक्षा ग्रहण करने वाले ही बनते हैं। सेंट एंसलम स्कूल का संचालन केसरगंज स्थित सेंट एंसलम चर्च के परिसर में होता है। यह चर्च 100 वर्ष पुराना है। ऐसे में चर्च परिसर में भारत की सनातन संस्कृति की गूंज अपने आप में मायने रखती है।
इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राजस्थान के मंत्री देवयानी भी उपस्थित रहे। उन्होंने भी इस कार्यक्रम की प्रशंसा की।

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