Tuesday, December 11, 2018
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जिसे कभी दफ्तर के लोग सम्मान के साथ सलामी ठोका करते थे आज वही दफ्तर के सहकर्मी ……. क्या है पूरा मामला पढिये ….

रायगढ मुनादी।

जब तक नॉकरी थी हर तरफ जलवा था दफ्तर के तमाम कर्मचारियों से मान सम्मान मिलता रहा लेकिन जैसे ही शासकीय सेवा से सेवा निवृत हुए मानो सब के लिए अजनबी से हो गए। हम बात कर रहे है रायगढ वन मण्डल के डीएफओ के निज सहायक रहे एस आर साहू की जो बीते मई माह में सेवा निवृत्त हुए थे। सेवा निवृत्त होने के बाद हर तरफ से सिर्फ और सिर्फ परेशानियो ने घेर लिया। जहां अपने पुराने सहकर्मियों का साथ छूट गया और तो और सेवा निवृत्त होने के बाद उनके देयकों व पेंशन तक फिक्स करने सहित कोई औपचारिकता पूरी नही की गई। ऐसे में एकाएक किडनी फेल हो जाना किसी गहरी अंधेरी खाई में गिर जाने जैसा हो गया। अब तक तो पेंशन प्रकरण भी नही बना जमा पूंजी मिलने की बात तो दूर की कौड़ी जैसी हो गई। बीमारी के बारे में दफ्तर के दूसरे सहकर्मियों को भी जानकारी हो गई लेकिन इसके बाद भी किसी ने जरा सी न तो अपनी नैतिक जिम्मेदारी पूरी किया ताकि डूबते को तिनके का सहारा मिल सके। किडनी फेल हो जाने की जानकारी के बाद भी सेवा निवृत्त कर्मचारी के प्रकरण को निराकरण करने में दिलचस्पी नही दिखाई।

वन विभाग के इस सेवा निवृत्त कर्मचारी को उसके रिटायरमेंट के 6 महिने बाद भी पूरा पेेंशन नहीं मिल रहा है। विभागीय हिला हवाली से तंग कर्मचारी ने अपनी समस्या से उच्चाधिकारियों को कई बार अवगत कराया। बावजूद इसके उनकी ओर से भी कोई समाधान नहीं किया गया। इस कारण अब यह सेवा निवृत्त कर्मचारी अपने परिवार के साथ धरने पर बैठने वाला है। यह पूरा मामला रायगढ़ वनमण्डल का है, जहां डीएफओ के पूर्व निज सहायक एसआर साहू ने अपनी सेवा दी है। वे बीते 31 मई 2018 को सेवानिवृत्त हुए इसके बाद से अब तक पेंशन से संबंधित देयक अब तक नहीं मिल सका है। इसमें पीपीओ/जीपीओ अभी तक जारी नहीं किया गया है, उपदान भुगतान हेतु लंबित है, जीआईएस/एसबीएस भुगतान हेतु लंबित है, अवकाश नगदीकरण की राशि अब तक नहीं मिली है, महंगाई भत्ता का अंतर देयक भी अब तक अप्राप्त है।

जब डॉ ने किडनी फेल होने की बात—
सोचिए जरा जिस कर्मचारी को उसके सेवा काल के दौरान दफ्तर के तमाम कर्मचारी पूरे सम्मान के साथ पेश आते थे आज वही उनके दर्द को समझने की कोशिश नही कर रहे हैं। अब वह बुलन्दी के अर्श से फर्श पर पहुंच चुका था डॉ किडनी फेल हो जाने की खबर पर मुहर लगा देता है । ऐसे में पैरों तले जमीन खिसक जाती है अब क्या होगा।

इसके इलाज में लाखों रुपए खर्च होना है कहा से होगा कैसे होगा। ऐसे में जब सेवा निवृत्त के बाद जहां वेतन मिलना बंद होने के बाद पेंशन भी पूरा नहीं मिल रहा हो। इस स्थिति में परिवार को चलाने की जिम्मेदारी सर पर थी और इस दौरान उनकी किडनी भी फेल हो गयी। किडनी में हुए ट्यूमर का शीघ्र नही कराने पर जान पर बन आने की स्तिथि उतपन्न होने पर आनन फानन में यहां वहां से रकम की व्यवस्था कर मुम्बई के एक अस्पताल में इलाज कराया लेकिन अब तक सेवा निवृत्त कर्मचारी की पेंशन प्रकरण का निराकरण नही हो सका है।

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