Wednesday, January 17, 2018
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टॉयलेट घोटाला मामले में ठेकेदारों पर नहीं होगी FIR, जानिये कैसे बचे ठेकेदार

 

घोटालों की मुनादी ।।

रायगढ़ शौचालय घोटाला के खुलासे के बाद यदि आप सोच रहे हों कि ठेकेदार अब नहीं बच पाएंगे और जल्द ही वे सलाखों के पीछे होंगे तो भूल जाइए। ठेकेदारों पर न तो जुर्म दर्ज होगा न ही उनकी गिरफ्तारी होगी। अव्वल तो नगर निगम इसके लिए कोई कदम आगे नहीं बढ़ाने जा रही है और यदि बढ़ भी दिया तो पुलिस ठेकेदारों के खिलाफ FIR नहीं लिखेगी।

रायगढ़ में स्वच्छता अभियान के तहत बनाये गए टॉयलेट, घोटालों की भेंट चढ़ गए। कहा जा रहा है कि यदि गम्भीरता से जांच की जाय तो 55 प्रतिशत टॉयलेट, जो कागजों पर तो बने लेकिन ज़मीन पर नहीं हैं। ऐसे में यह तय करना जरूरी है कि इसके लिए जिम्मेदार कौन है। जांच कमेटी के एक सदस्य ने कहा कि यह घोटाला संगठित लूट है और इसके लिए जिम्मेदार बहुत सारे लोग हैं। इस लूट में कहीं सत्ता तो कहीं अधिकारियों की छूट भी शामिल है। शहर में बनने वाले 7006 शौचालय निगम और सत्तापक्ष के गले की हड्डी बना हुआ है। कहा जा रहा है कि घोटाले में लिप्त ज्यादातर ठेकेदार भाजपा विधायक के लोग हैं। लेकिन ऐसा कहने भर से ही यह ठगी, राजनीतिक आरोप भर बनकर रह जाती है। यह घोटाला जरा दूजे किस्म का है। इस घोटाले में ठेकेदार, इंजीनियर, हितग्राही सब शामिल हैं, 96 % मामले ऐसे ही हैं। कुछ मामलों में हितग्राही को भी ठगा गया है। इसका मतलब यह नहीं कि इसके लिए कोई जिम्मेदार ही नहीं, जिम्मेदारी है और इसकी जवाबदारी तय होनी चाहिये। पहला सवाल यह ठेके का बंदरबांट के अलावा और क्या विकल्प थे जिससे ठेका किसी खास दल के लोगों के बजाय व्यावसायिक ठेकेदार से काम हो जाता और दूसरा यह कि क्या ठेकेदारों पर करवाई हो सकती है ? इन सवालों का जवाब केस स्टडी से ढूढने के कोशिश कीजिये।

ठेकेदारों पर नहीं होती FIR

यह कोई सरकारी नियम नहीं है कि ठेकेदार पर FIR नहीं होगी लेकिन छत्तीसगढ़ में ऐसा कोई उदाहण नहीं मिलता। कभी शासन या सरकार में बैठे लोग उन्हें बचा लेते हैं तो कभी पुलिस। पिछले बार रायगढ़ नगर निगम में एक बड़ा घोटाला हुआ जिसमें पूर्व निगम आयुक्त भी फंसे और उनपर भी FIR हुआ लेकिन ठेकेदारों का बाल भी बांका न हो सका। पुलिस ने कहा कि ठेकेदार नहीं अधिकारी दोषी हैं। यहां की पुलिस भी अजीब है, एक आदमी पर बलवा का धारा लगा देती है, एक्सीडेंट से मौत पर 304 लग देती है लेकिन ठेकेदारों पर कोई करवाई को नियम में नहीं होना बताती है।

ठेकेदारों पर FIR के लिए लड़ें

इस मामले में ज्यादातर लोग जो घोटाले के लिए सीधे विधायक को दोष देकर जी को शांत करने में लगे हैं उन्हें चाहिए कि लोगों को जागरूक कर ठेकेदारों के खिलाफ FIR करवाने के लिए प्रेरित करें। पुलिस पर दबाव डालकर ठेकेदारों को सलाखों के पीछे भेजें। जबकि यहां के तमाम घोटालों की फ़ाइल धूल के नीचे अब भी दबी हुई हैं कम से कम इस नए घोटाले के लिए जिम्मेदार लोगों का गिरेबान पकड़कर उन्हें उनकी सही जगह पर भिजवाने में अपनी भूमिका निभाएं क्योंकि राजनीति के पचड़े में यदि इस घोटाले को लपेटेंगे तो इसका भी वही हाल होगा।

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