Sunday, May 20, 2018
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विकलांगों को मिलने वाली सुविधा पर भी मारा डांका, गोलमाल का मामला हुआ उजागर, जानिए क्या है पूरा मामला

सूरजपुर से रक्षेन्द्र प्रताप सिंह की मुनादी।

जिले के 1242 प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं में सर्व शिक्षा अभियान के तहत बनवाए गए रैम्प भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गए हैं। विकलांग बच्चों को विद्यालय में बनी सीढ़ीयों को चढऩे में कोई दिक्कत न हो इस उद्देश्य को लेकर रैम्प का निर्माण शाला प्रबंधन समितियों के माध्यम से कराया गया है। विद्यालयों में बनाए गए रैम्प प्राक्कलन के अनुसार नहीं बनाए गए हैं। सूचना के अधिकार के तहत इसका खुलासा हुआ है। रैम्प के निर्माण के लिए राजीव गांधी शिक्षा मिशन से परियोजना कार्यालय से 1 करोड़ 86 लाख 45 हजार रुपए की स्वीकृति वर्ष 2011-12 मेंं प्रदान की गई थी।जिले के शिक्षा, आजाक एवं सर्व शिक्षा अभियान के प्राथमिक एवं माध्यमिक स्कूलों में विकलांग बच्चों को सीढ़ीयां चढऩे में कोई परेशानी न हो इस दृष्टिकोण से शाला प्रबंधन समितियों को रैम्प निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। एक रैम्प के निर्माण के लिए 15 हजार रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई थी। जिले के 1242 विद्यालयों में इसका निर्माण संबंधित विद्यालय के शाला प्रबंधन समिति द्वारा कराया वर्ष 2014 में कराया गया था। रैम्प निर्माण के दौरान शाला प्रबंधन समितियों ने जिम्मेदार अधिकारियों की शह पर गुणवत्ता से समझौता कर शासन को लाखों रुपए का चूना लगाया है।

विकासखण्डवार कितने स्कूलों में बनाए गए रैम्प. भैयाथान – 200. रामानुजनगर – 211. प्रेमनगर – 200. प्रतापपुर – 234. ओडग़ी – 188. सूरजपुर – 209 

इस तरह दिया भ्रष्टाचार अंजाम

सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी अनुसार प्राक्कलन में बताए गए जानकारी अनुसार निर्माण एजेंसियों को रैम्प निर्माण स्थल पर सूचना पटल का निर्माण करना था। सूचना पटल में योजना का नाम, कार्य का नाम, स्वीकृति दिनांक, कार्य की लागत, मजदूरी का दर, क्रियान्वयन एजेंसी एवं कार्य प्रारम्भ का दिनांक उल्लेख किया जाना था। रैम्प में टाइल्स लगाया जाना था। उक्त निर्माण स्थल पर निर्माण एजेंसियों ने सूचना पटल का निर्माण नहीं कराया है। प्राक्कलन में सूचना पटल के निर्माण हेतु 1 हजार रुपए का प्रावधान किया गया था। इस हिसाब से 1242 स्कूलों में 12 लाख 42 हजार का गोलमाल उजागर हो गया है। वहीं अधिकांश रैम्प में उनके शाला प्रबंधन समिति द्वारा प्राक्कलन अनुसार टाइल्स नहीं लगाया गया है। टाइल्स की जगह सीमेंट प्लास्टर पर ही रस्सी से निशान बनाकर टाइल्स की शक्ल देने का प्रयास किया गया है। प्राक्कलन में टाइल्स लगाने हेतु 2 हजार 3 सौ 86 रुपए का प्रावधान किया गया है। ऐसे में निर्माण एजेंसियों ने टाइल्स की राशि बचा ली गई है। वहीं रैम्प निर्माण में इस्पात से निर्मित पाइप की बजाए सस्ते व अमानक पाइप को निर्माण एजेंसियों द्वारा लगाया गया है। वहीं कई विद्यालयों में रैम्प का निर्माण ही शाला प्रबंधन समिति द्वारा नहीं किया गया है। जबकि निर्माण एजेंसियों को कार्यादेश प्राप्त होने के 8 दिवस के भीतर रैम्प का निर्माण कराना था। डीआरडीए द्वारा प्रशासकीय स्वीकृति आदेश सन् 2013 के जून माह में जारी किया गया था। इससे रैम्प निर्माण में जिले में करीब 50 लाख रुपए का गोलमाल उजागर हो गया है।

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